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शिक्षा बोर्ड के सभी कर्मचारियों के मानदेय का जल्द हो भुगतान : धीमान
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कर्मचारी
पुनः मूल्यांकन राशि और जांच फीस हुई दोगुना
कर्मचारी को बोर्ड की तरफ से न मिला मानदेय और न हुई बढ़ोतरी
संवाद न्यूज एजेंसी
नारी (ऊना)। हिमाचल प्रदेश साइंस मास्टर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष चंद्र केश धीमान ने प्रेस बयान में कहा कि 29 मार्च 2025 की वार्षिक परीक्षा प्रदेश में खत्म हो चुकी है लेकिन अभी तक किसी भी कर्मचारी को बोर्ड की तरफ से मानदेय नहीं दिया गया। न ही किसी तरह से उसके मानदेय में बढ़ोतरी की। पुनः मूल्यांकन राशि और जांच फीस को 21 मार्च की अधिसूचना के अनुसार दोगुना कर दिया गया है। यह फीस पहले 500 थी, अब सीधी 1000 कर दी गई। राज्य ओपन स्कूल की फीस की राशि में भी बहुत इजाफा किया है। संघ ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सुक्खू और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर से मांग की है कि सरकार बोर्ड के चेयरमैन और सचिव को इस पर दोबारा से विचार करने को कहे। दूसरी तरफ सरकार बोर्ड को जल्द ही दिशा निर्देश दे कि वह समय पर सभी के मानदेय का भुगतान करे। इस बार बोर्ड ने शिक्षकों के उस मानदेय को भी बंद कर दिया है जो 75 प्रतिशत से अधिक अंक लेने वाले विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन पर पहले मुख्य परीक्षक को मिलता था। संघ ने बोर्ड से आग्रह किया है कि जल्द ही इस अधिसूचना को वापस लेकर और इसकी पुरानी स्थिति की अधिसूचना जल्द जारी की जाए।
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पुनः मूल्यांकन राशि और जांच फीस हुई दोगुना
कर्मचारी को बोर्ड की तरफ से न मिला मानदेय और न हुई बढ़ोतरी
संवाद न्यूज एजेंसी
नारी (ऊना)। हिमाचल प्रदेश साइंस मास्टर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष चंद्र केश धीमान ने प्रेस बयान में कहा कि 29 मार्च 2025 की वार्षिक परीक्षा प्रदेश में खत्म हो चुकी है लेकिन अभी तक किसी भी कर्मचारी को बोर्ड की तरफ से मानदेय नहीं दिया गया। न ही किसी तरह से उसके मानदेय में बढ़ोतरी की। पुनः मूल्यांकन राशि और जांच फीस को 21 मार्च की अधिसूचना के अनुसार दोगुना कर दिया गया है। यह फीस पहले 500 थी, अब सीधी 1000 कर दी गई। राज्य ओपन स्कूल की फीस की राशि में भी बहुत इजाफा किया है। संघ ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सुक्खू और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर से मांग की है कि सरकार बोर्ड के चेयरमैन और सचिव को इस पर दोबारा से विचार करने को कहे। दूसरी तरफ सरकार बोर्ड को जल्द ही दिशा निर्देश दे कि वह समय पर सभी के मानदेय का भुगतान करे। इस बार बोर्ड ने शिक्षकों के उस मानदेय को भी बंद कर दिया है जो 75 प्रतिशत से अधिक अंक लेने वाले विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन पर पहले मुख्य परीक्षक को मिलता था। संघ ने बोर्ड से आग्रह किया है कि जल्द ही इस अधिसूचना को वापस लेकर और इसकी पुरानी स्थिति की अधिसूचना जल्द जारी की जाए।