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Una News: ताड़का वध से अहिल्या उद्धार तक के प्रसंगों ने बांधा समां
Fri, 16 Oct 2026 12:07 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Fri, 16 Oct 2026 12:07 AM IST
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गगरेट (ऊना)। श्रीराम के शौर्य, धर्म की रक्षा और करुणा का संदेश लेकर गगरेट के आर्मी ग्राउंड पड़ाव में चल रही रामलीला के चतुर्थ दिवस कलाकारों ने ऐसा समां बांधा कि पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण में डूब गया।
धार्मिक आयोजन कमेटी गगरेट की ओर से आयोजित रामलीला में वृंदावन-मथुरा से आए गिरिराज आदर्श रामलीला संस्थान के कलाकारों ने ताड़का वध, सुबाहु-मारीच वध और अहिल्या उद्धार के प्रसंगों का मंचन कर दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।
कार्यक्रम में जिला परिषद अध्यक्ष पवन नंबरदार ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की। रामलीला के मंच पर महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा से जुड़े प्रसंग को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। कथा के अनुसार, यज्ञ में बाधा डालने वाली राक्षसी ताड़का का भगवान श्रीराम अंत करते हैं।
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इसके बाद यज्ञ को नष्ट करने पहुंचे सुबाहु और मारीच के प्रसंग का मंचन हुआ। भगवान श्रीराम के पराक्रम और शस्त्र कौशल को दर्शाते दृश्यों ने दर्शकों में उत्साह भर दिया। कलाकारों के संवाद, अभिनय और युद्ध दृश्यों की प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियां बजाकर उत्साहवर्धन किया।
रामलीला का एक भावपूर्ण दृश्य महर्षि गौतम की पत्नी अहिल्या के उद्धार का रहा। भगवान श्रीराम के आगमन से अहिल्या के उद्धार की कथा को कलाकारों ने संवेदनशील अभिनय के साथ प्रस्तुत किया।
इस प्रसंग ने जहां दर्शकों को भावविभोर किया, वहीं भगवान श्रीराम के चरित्र में निहित करुणा, मर्यादा और धर्म के आदर्शों को भी उजागर किया।
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धार्मिक आयोजन कमेटी गगरेट की ओर से आयोजित रामलीला में वृंदावन-मथुरा से आए गिरिराज आदर्श रामलीला संस्थान के कलाकारों ने ताड़का वध, सुबाहु-मारीच वध और अहिल्या उद्धार के प्रसंगों का मंचन कर दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।
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कार्यक्रम में जिला परिषद अध्यक्ष पवन नंबरदार ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की। रामलीला के मंच पर महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा से जुड़े प्रसंग को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। कथा के अनुसार, यज्ञ में बाधा डालने वाली राक्षसी ताड़का का भगवान श्रीराम अंत करते हैं।
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इसके बाद यज्ञ को नष्ट करने पहुंचे सुबाहु और मारीच के प्रसंग का मंचन हुआ। भगवान श्रीराम के पराक्रम और शस्त्र कौशल को दर्शाते दृश्यों ने दर्शकों में उत्साह भर दिया। कलाकारों के संवाद, अभिनय और युद्ध दृश्यों की प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियां बजाकर उत्साहवर्धन किया।
रामलीला का एक भावपूर्ण दृश्य महर्षि गौतम की पत्नी अहिल्या के उद्धार का रहा। भगवान श्रीराम के आगमन से अहिल्या के उद्धार की कथा को कलाकारों ने संवेदनशील अभिनय के साथ प्रस्तुत किया।
इस प्रसंग ने जहां दर्शकों को भावविभोर किया, वहीं भगवान श्रीराम के चरित्र में निहित करुणा, मर्यादा और धर्म के आदर्शों को भी उजागर किया।