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Una News: लोहारा गांव की रेनू शर्मा ने बंजर भूमि पर पैदा किया रोजगार
Fri, 16 Oct 2026 12:09 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Fri, 16 Oct 2026 12:09 AM IST
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ऊना। उपमंडल अंब के लोहारा गांव की रेनू शर्मा पत्नी रमन कुमार ने साबित कर दिया है कि अगर मन में कुछ करने का दृढ़ संकल्प हो तो बंजर जमीन पर भी फूल उगाए जा सकते हैं। रेनू शर्मा पिछले आठ वर्षों से एक ऐसी जमीन पर विभिन्न मसालों एवं जिमीकंद फसल की खेती कर रही हैं जहां कभी बंदरों के आतंक से लोगों ने खेती करना बंद कर दिया था। खेती से रेनू शर्मा प्रतिमाह 20 से 25 हजार रुपये की आय कमा रही हैं।
रेनू शर्मा ने बताया कि उन्होंने 2018 में एक पॉलीहाउस में देखा कि सब्जियों पर काफी अधिक स्प्रे की जा रही है। यह देखकर उन्होंने संकल्प लिया कि वह स्वयं शुद्ध चीज खाएंगी और दूसरों तक भी शुद्ध चीज ही पहुंचाएंगी, इसके लिए उन्होंने प्राकृतिक खेती को चुना। शुरुआत में उन्होंने पांच कनाल भूमि पर एक क्विंटल हल्दी की खेती की, इसी हल्दी से आगे बीज तैयार कर अपने कार्य को विस्तार दिया। आज अपनी निजी भूमि सहित लीज की लगभग 35 कनाल भूमि पर हल्दी की खेती कर रही हैं। मौजूदा समय में रेनू शर्मा इस भूमि पर चार प्रकार की शुद्ध प्राकृतिक हल्दी की खेती कर रही हैं, इनमें प्रगति, अंबा, ब्लैक और कस्तूरी हल्दी शामिल है। प्राकृतिक खेती करने के लिए सर्वप्रथम उनके ससुर दौलत राम ने उनका मार्गदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने स्थानीय स्तर पर प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण शिविरों से प्रशिक्षण प्राप्त किया। वर्तमान में रेनू हल्दी के अलावा कश्मीरी लहसुन, अदरक, जिमीकंद, मिर्ची आदि की खेती करती हैं और इनका अचार भी बेचती हैं। उन्होंने बताया कि जिला ऊना सहित हमीरपुर, बिलासपुर और कांगड़ा से ऑर्डर मिल जाते हैं। प्रगति हल्दी पाउडर 500 से 700 रुपये प्रति किलो और ब्लैक हल्दी 2500 से 3500 रुपये प्रति किलो बेची जा रही है। विभिन्न अचार 300 रुपये प्रति किलो बेचे जाते हैं। वहीं प्रगति हल्दी का बीज 150 रुपये प्रति किलो, ब्लैक हल्दी का 550 से 600 रुपये और कस्तूरी हल्दी का बीज 400 रुपये प्रति किलो दिया जाता है। रेनू शर्मा गौणी बाबा स्वयं सहायता समूह की प्रधान भी हैं। उन्होंने बताया कि कृषि ब्लॉक अंब और ऊना की मदद से भी उत्पादों के ऑर्डर प्राप्त किए जाते हैं। रेनू शर्मा खेती के कार्य में स्थानीय चार से पांच मजदूरों की सहायता लेती हैं, जिन्हें 500 रुपये दिहाड़ी के हिसाब से वेतन दिया जाता है। रेनू ने बताया कि वह भविष्य में आंवला की खेती को अपनाकर अपने कारोबार को और विस्तार देने का लक्ष्य है।
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रेनू शर्मा ने बताया कि उन्होंने 2018 में एक पॉलीहाउस में देखा कि सब्जियों पर काफी अधिक स्प्रे की जा रही है। यह देखकर उन्होंने संकल्प लिया कि वह स्वयं शुद्ध चीज खाएंगी और दूसरों तक भी शुद्ध चीज ही पहुंचाएंगी, इसके लिए उन्होंने प्राकृतिक खेती को चुना। शुरुआत में उन्होंने पांच कनाल भूमि पर एक क्विंटल हल्दी की खेती की, इसी हल्दी से आगे बीज तैयार कर अपने कार्य को विस्तार दिया। आज अपनी निजी भूमि सहित लीज की लगभग 35 कनाल भूमि पर हल्दी की खेती कर रही हैं। मौजूदा समय में रेनू शर्मा इस भूमि पर चार प्रकार की शुद्ध प्राकृतिक हल्दी की खेती कर रही हैं, इनमें प्रगति, अंबा, ब्लैक और कस्तूरी हल्दी शामिल है। प्राकृतिक खेती करने के लिए सर्वप्रथम उनके ससुर दौलत राम ने उनका मार्गदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने स्थानीय स्तर पर प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण शिविरों से प्रशिक्षण प्राप्त किया। वर्तमान में रेनू हल्दी के अलावा कश्मीरी लहसुन, अदरक, जिमीकंद, मिर्ची आदि की खेती करती हैं और इनका अचार भी बेचती हैं। उन्होंने बताया कि जिला ऊना सहित हमीरपुर, बिलासपुर और कांगड़ा से ऑर्डर मिल जाते हैं। प्रगति हल्दी पाउडर 500 से 700 रुपये प्रति किलो और ब्लैक हल्दी 2500 से 3500 रुपये प्रति किलो बेची जा रही है। विभिन्न अचार 300 रुपये प्रति किलो बेचे जाते हैं। वहीं प्रगति हल्दी का बीज 150 रुपये प्रति किलो, ब्लैक हल्दी का 550 से 600 रुपये और कस्तूरी हल्दी का बीज 400 रुपये प्रति किलो दिया जाता है। रेनू शर्मा गौणी बाबा स्वयं सहायता समूह की प्रधान भी हैं। उन्होंने बताया कि कृषि ब्लॉक अंब और ऊना की मदद से भी उत्पादों के ऑर्डर प्राप्त किए जाते हैं। रेनू शर्मा खेती के कार्य में स्थानीय चार से पांच मजदूरों की सहायता लेती हैं, जिन्हें 500 रुपये दिहाड़ी के हिसाब से वेतन दिया जाता है। रेनू ने बताया कि वह भविष्य में आंवला की खेती को अपनाकर अपने कारोबार को और विस्तार देने का लक्ष्य है।
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