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Una News: ऊना में तेजी से घाटी गन्ने की खेती, अब नाममात्र ही होती है बिजाई
Thu, 23 Oct 2025 12:19 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Thu, 23 Oct 2025 12:19 AM IST
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ऊना। कभी गन्ने की फसल के लिए देश भर में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले ऊना जिला में यह फसल तेजी से घटी है। लगभग एक साल में तैयार होने वाली फसल की जगह अब दो से छह महीने में तैयार होने वाली फसलों ने ले ली है।
वहीं सिंचाई सुविधा में तेजी से विकास होना भी इस फसल की घटना का एक अहम कारण माना जाता है। कभी ऊना जिला में करीब 1000 हेक्टेयर में गन्ना उगाया जाता रहा, अब यही फसल घटकर 130 से 140 हेक्टेयर के आसपास रह गई है।
बताया जाता है कि किसान इस फसल को तैयार करने से लेकर इसकी शक्कर तैयार करने तक की प्रक्रिया को अब बेहद पेचीदा मानते हैं और इसके स्थान पर गेहूं मक्की आलू जैसी फसलें तैयार करना एक बेहतर सौदा मानते हैं। यही नहीं गन्ने के स्थान पर अब हरी सब्जियां उगाना भी एक बेहतर विकल्प बन चुका है।
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जानकारी के अनुसार किसी समय में ऊना के हरोली क्षेत्र के बीत इलाके में गन्ना बड़ी मात्रा में उगाया जाता था। जिला में तैयार गन्ने का अपना एक मीठा स्वाद इसको अलग पहचान देता था। यही कारण है कि देशभर में ऊना के गन्ने की एक अलग पहचान थी। इससे तैयार गुड़ और शक्कर को देश भर में सप्लाई किया जाता रहा। हालांकि सिंचाई सुविधा बढ़ने पर किसानों ने इस फसल से हाथ खींच लिए।
किसान लक्ष्मण दास, मुख्त्यार चंद, अमरीक सिंह, वीरेंद्र कुमार, राजेंद्र कुमार, सुशील सैनी सहित अन्य ने बताया कि आलू, गेहूं, मक्का जैसी फसलें दो से छह महीने में तैयार होती है। जबकि गन्ने को तैयार करने में एक साल तक का समय लगता है। यही नहीं गन्ने को सीधा बेचने के लिए पंजाब की शुगर मिल जाना पड़ता है। जबकि इससे शक्कर तैयार करने की प्रक्रिया भी काफी पेचीदा रहती है। इस फसल से आय भी उम्मीद मुताबिक नहीं होती, जबकि गेहूं, मक्का और आलू, हरी सब्जियों से अच्छी आई होती है और उसमें समय सीमा भी कम लगती है।
बीत इलाके में कभी सिंचाई सुविधा नहीं उपलब्ध थी। इस कारण किसान मजबूरी में गन्ने की फसल तैयार करते थे। इसके स्थान पर किसान हरी सब्जियां, आलू और गेहूं जैसी फसलें तैयार करने लगे हैं। वर्तमान में 135 हेक्टेयर के करीब जमीन पर ही गन्ना तैयार किया जाता है। हालांकि किसान यह फसल भी केवल अपने आवश्यकता के लिए ही तैयार करते हैं।
उपनिदेशक कृषि विभाग कुलभूषण धीमान ने बताया कि सिंचाई सुविधा बढ़ाने पर किसानों ने गन्ने जैसी फसलों से हाथ खींचा है। किसान अब कम समय सीमा में तैयार होने वाली फसलों की ओर अधिक ध्यान दे रहे हैं। इससे किसानों को साल में कई बार आय भी प्राप्त होती है जबकि गन्ना भी आय एक अच्छा स्रोत है। अगर कोई किसान इस फसल के बारे में अधिक जानकारी लेना चाहता है तो विभाग से संपर्क कर सकता है।
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वहीं सिंचाई सुविधा में तेजी से विकास होना भी इस फसल की घटना का एक अहम कारण माना जाता है। कभी ऊना जिला में करीब 1000 हेक्टेयर में गन्ना उगाया जाता रहा, अब यही फसल घटकर 130 से 140 हेक्टेयर के आसपास रह गई है।
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बताया जाता है कि किसान इस फसल को तैयार करने से लेकर इसकी शक्कर तैयार करने तक की प्रक्रिया को अब बेहद पेचीदा मानते हैं और इसके स्थान पर गेहूं मक्की आलू जैसी फसलें तैयार करना एक बेहतर सौदा मानते हैं। यही नहीं गन्ने के स्थान पर अब हरी सब्जियां उगाना भी एक बेहतर विकल्प बन चुका है।
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जानकारी के अनुसार किसी समय में ऊना के हरोली क्षेत्र के बीत इलाके में गन्ना बड़ी मात्रा में उगाया जाता था। जिला में तैयार गन्ने का अपना एक मीठा स्वाद इसको अलग पहचान देता था। यही कारण है कि देशभर में ऊना के गन्ने की एक अलग पहचान थी। इससे तैयार गुड़ और शक्कर को देश भर में सप्लाई किया जाता रहा। हालांकि सिंचाई सुविधा बढ़ने पर किसानों ने इस फसल से हाथ खींच लिए।
किसान लक्ष्मण दास, मुख्त्यार चंद, अमरीक सिंह, वीरेंद्र कुमार, राजेंद्र कुमार, सुशील सैनी सहित अन्य ने बताया कि आलू, गेहूं, मक्का जैसी फसलें दो से छह महीने में तैयार होती है। जबकि गन्ने को तैयार करने में एक साल तक का समय लगता है। यही नहीं गन्ने को सीधा बेचने के लिए पंजाब की शुगर मिल जाना पड़ता है। जबकि इससे शक्कर तैयार करने की प्रक्रिया भी काफी पेचीदा रहती है। इस फसल से आय भी उम्मीद मुताबिक नहीं होती, जबकि गेहूं, मक्का और आलू, हरी सब्जियों से अच्छी आई होती है और उसमें समय सीमा भी कम लगती है।
बीत इलाके में कभी सिंचाई सुविधा नहीं उपलब्ध थी। इस कारण किसान मजबूरी में गन्ने की फसल तैयार करते थे। इसके स्थान पर किसान हरी सब्जियां, आलू और गेहूं जैसी फसलें तैयार करने लगे हैं। वर्तमान में 135 हेक्टेयर के करीब जमीन पर ही गन्ना तैयार किया जाता है। हालांकि किसान यह फसल भी केवल अपने आवश्यकता के लिए ही तैयार करते हैं।
उपनिदेशक कृषि विभाग कुलभूषण धीमान ने बताया कि सिंचाई सुविधा बढ़ाने पर किसानों ने गन्ने जैसी फसलों से हाथ खींचा है। किसान अब कम समय सीमा में तैयार होने वाली फसलों की ओर अधिक ध्यान दे रहे हैं। इससे किसानों को साल में कई बार आय भी प्राप्त होती है जबकि गन्ना भी आय एक अच्छा स्रोत है। अगर कोई किसान इस फसल के बारे में अधिक जानकारी लेना चाहता है तो विभाग से संपर्क कर सकता है।