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Una News: बुखार, खांसी और शरीर में दर्द हो तो रहें सतर्क
Thu, 27 Aug 2026 12:39 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Thu, 27 Aug 2026 12:39 AM IST
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ऊना। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को स्वाइन फ्लू और मौसमी इन्फ्लुएंजा से बचाव के प्रति जागरूक किया जा रहा है। संक्रमण की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य संस्थानों में निगरानी और आवश्यक तैयारियों को मजबूत किया गया है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव वर्मा ने लोगों से व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखने, संक्रमण से बचाव के उपाय अपनाने और फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेने की अपील की है।
डॉ. वर्मा ने बताया कि क्षेत्रीय अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड अलग से स्थापित किया गया है। जहां पर चार बिस्तर की व्यवस्था इस तरह के संकमण से ग्रस्त मरीजों के लिए एहतियातन के तौर पर की गई है।
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स्वाइन फ्लू इन्फ्लुएंजा वायरस-ए के एच1एन1 स्ट्रेन से होने वाला संक्रमण है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने और थूकने से निकलने वाली बूंदों के माध्यम से यह संक्रमण दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि सावधानी और समय पर उपचार से संक्रमण को गंभीर होने से रोकने में मदद मिल सकती है।
डॉ. वर्मा ने बताया कि स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे हो सकते हैं। इनमें तेज बुखार, खांसी, बलगम, पूरे शरीर में दर्द, अत्यधिक थकान, ठंड लगना और कंपकंपी शामिल हैं। लगातार छींकें आना, तेज सिरदर्द, छाती में भारीपन और सांस लेने में कठिनाई भी इसके लक्षण हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर इसे सामान्य वायरल बुखार समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और शीघ्र चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि पांच वर्ष से कम आयु के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों से पीड़ित और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वालों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है।
ऐसे लोगों को फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव वर्मा ने लोगों से व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखने, संक्रमण से बचाव के उपाय अपनाने और फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेने की अपील की है।
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डॉ. वर्मा ने बताया कि क्षेत्रीय अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड अलग से स्थापित किया गया है। जहां पर चार बिस्तर की व्यवस्था इस तरह के संकमण से ग्रस्त मरीजों के लिए एहतियातन के तौर पर की गई है।
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स्वाइन फ्लू इन्फ्लुएंजा वायरस-ए के एच1एन1 स्ट्रेन से होने वाला संक्रमण है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने और थूकने से निकलने वाली बूंदों के माध्यम से यह संक्रमण दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि सावधानी और समय पर उपचार से संक्रमण को गंभीर होने से रोकने में मदद मिल सकती है।
डॉ. वर्मा ने बताया कि स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे हो सकते हैं। इनमें तेज बुखार, खांसी, बलगम, पूरे शरीर में दर्द, अत्यधिक थकान, ठंड लगना और कंपकंपी शामिल हैं। लगातार छींकें आना, तेज सिरदर्द, छाती में भारीपन और सांस लेने में कठिनाई भी इसके लक्षण हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर इसे सामान्य वायरल बुखार समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और शीघ्र चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि पांच वर्ष से कम आयु के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों से पीड़ित और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वालों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है।
ऐसे लोगों को फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।