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Una News: बंगाणा के खेत-खलिहानों में प्रवासी पक्षियों की बहार
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संवाद न्यूज एजेंसी
बंगाणा (ऊना)। उपमंडल बंगाणा की धनेत पंचायत के गांव तमलेट और डुमखर खड्ड के आसपास इन दिनों साइबेरिया से आए प्रवासी पक्षियों की भरमार देखी जा रही है। पिछले लगभग एक सप्ताह से सुबह और शाम के समय बड़ी संख्या में ये पक्षी खेत-खलिहानों में चहलकदमी करते नजर आ रहे हैं। स्थानीय निवासी सुखदेव सिंह, बलदेव सिंह, शेखू, शभू, बूगगू, चैन सिंह, लखींद्र सिंह, बहादुर सिंह, अवतार सिंह और अजय शर्मा सहित अन्य लोगों का कहना है कि इन पक्षियों की बढ़ती गतिविधि से क्षेत्र का प्राकृतिक सौंदर्य बढ़ गया है। पर्यावरण प्रेमियों ने भी इसे मौसम बदलाव का संकेत बताया है और पक्षियों के संरक्षण की अपील की है। लोगों का कहना है कि ये प्रवासी पक्षी न तो फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं और न ही इंसानों को। बल्कि ऐसा प्रतीत होता है कि वे फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीट-पतंगों को खाकर किसानों की मदद कर रहे हैं। इस कारण ये पक्षी किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं।
जिला वन विभाग के डीएफओ सुशील राणा ने बताया कि ये पक्षी न केवल प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ावा देते हैं बल्कि कीट-पतंगों का सफाया कर फसलों को भी सुरक्षित रखते हैं। उन्होंने कहा कि प्रवासी पक्षी कुछ समय बाद स्वयं ही अपनी अगली मंजिल की ओर उड़ान भरेंगे।
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बंगाणा (ऊना)। उपमंडल बंगाणा की धनेत पंचायत के गांव तमलेट और डुमखर खड्ड के आसपास इन दिनों साइबेरिया से आए प्रवासी पक्षियों की भरमार देखी जा रही है। पिछले लगभग एक सप्ताह से सुबह और शाम के समय बड़ी संख्या में ये पक्षी खेत-खलिहानों में चहलकदमी करते नजर आ रहे हैं। स्थानीय निवासी सुखदेव सिंह, बलदेव सिंह, शेखू, शभू, बूगगू, चैन सिंह, लखींद्र सिंह, बहादुर सिंह, अवतार सिंह और अजय शर्मा सहित अन्य लोगों का कहना है कि इन पक्षियों की बढ़ती गतिविधि से क्षेत्र का प्राकृतिक सौंदर्य बढ़ गया है। पर्यावरण प्रेमियों ने भी इसे मौसम बदलाव का संकेत बताया है और पक्षियों के संरक्षण की अपील की है। लोगों का कहना है कि ये प्रवासी पक्षी न तो फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं और न ही इंसानों को। बल्कि ऐसा प्रतीत होता है कि वे फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीट-पतंगों को खाकर किसानों की मदद कर रहे हैं। इस कारण ये पक्षी किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं।
जिला वन विभाग के डीएफओ सुशील राणा ने बताया कि ये पक्षी न केवल प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ावा देते हैं बल्कि कीट-पतंगों का सफाया कर फसलों को भी सुरक्षित रखते हैं। उन्होंने कहा कि प्रवासी पक्षी कुछ समय बाद स्वयं ही अपनी अगली मंजिल की ओर उड़ान भरेंगे।
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