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Una News: सुअरों में अफ्रीकी स्वाइन फीवर फैलने से कारोबार पर दिखेगा असर
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ऊना जिला के सूअर पालक कर रहे विभागीय नियमों की पालना
टीकाकरण से लेकर बैठने की जगह पर दवाइयों का कर रहे नियमित छिड़काव
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना/बड़ूही (ऊना)। सोलन और बिलासपुर में सुअर अफ़्रीकी स्वाइन फीवर से ग्रस्त पाए गए हैं। इसके चलते हिमाचल प्रदेश सरकार ने पशुपालन विभाग के माध्यम से सुअरों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी है। सरकार ने विभाग के माध्यम से एडवाइजरी जारी कर दी है। फिलहाल जिला ऊना में सुअर पालकों में ऐसा कोई भी केस विभाग के सामने नहीं आया है। जिला ऊना के सुअर पालक विभाग के आदेशों की पालना कर रहे हैं और टीकाकरण से लेकर बैठने की जगह पर दवाइयों का नियमित छिड़काव हो रहा है। सुअरों में वर्तमान में ये बीमारी पाए जाने की सूरत में बचाव के तौर पर सरकार ने यह प्रभावी कदम उठाया है। विभाग के अनुसार सुअरों में अफ़्रीकी स्वाइन फीवर होने से यह एक बेहद संक्रामक बीमारी है, जो सुअरों में 100 प्रतिशत मृत्यु दर का कारण बनती है। विभाग के अनुसार बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, दस्त, असामान्य तंत्रिका संकेत अल्सर या छाले जैसे लक्षण सुअरों में दिखाई दें तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सुअरों में कुछ बीमारियां मनुष्यों के लिए भी खतरनाक हो सकती हैं। इसलिए सुअरों के साथ संपर्क में आने से पहले उचित सावधानी बरतें और सभी सुरक्षा नियमों का पालन करें।
टकारला क्षेत्र में सुअर व्यापार से जुड़े व्यक्ति केवल ने बताया कि हमें अभी सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। समय-समय पर सुअरों का टीकाकरण कराते हैं और उनके बैठने की जगह पर दवाइयों का नियमित छिड़काव करते रहते हैं। अभी तक व्यापार पर कोई असर नहीं पड़ा है। अगर ऐसा है तो आने वाले समय में इसका प्रभाव दिखाई दे सकता है।
बाक्स
दिलवां गांव के सुअर पालक दुलो राम ने कहा कि हम स्थानीय स्तर पर मीट की बिक्री नहीं करते। छोटे बच्चों को पालते हैं और बड़े होने पर उन्हें चंडीगढ़ में बेचते हैं। हमारे सुअर पूरी तरह स्वस्थ हैं और डॉक्टरों के निर्देशों का पालन कर रहे हैं। अगर सरकार ने प्रतिबंध लगाया है तो इसका असर हमारे व्यापार पर भी पड़ेगा।
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बाक्स
चुरूडू के पशु चिकित्सा अधिकारी गोपाल कृष्ण ने बताया कि हम सुअरों पर पूरी निगरानी रख रहे हैं और सुअर पालकों को सतर्क कर दिया गया है। यदि कोई सुअर बीमार होता है या उसकी मृत्यु होती है तो उसका सैंपल लेकर जांच की जाएगी। अभी के लिए सुअरों की खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है।
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक विनय शर्मा के अनुसार प्रदेश के कुछ जिलाें में सुअर अफ़्रीकी स्वाइन फीवर संक्रामक बीमारी से ग्रस्त पाए हैं। सरकार ने बचाव के तौर पर एडवाइजरी जारी की है। फिलहाल सुअर पालकों पर विभाग बराबर निगरानी रखे हुए है।
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टीकाकरण से लेकर बैठने की जगह पर दवाइयों का कर रहे नियमित छिड़काव
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना/बड़ूही (ऊना)। सोलन और बिलासपुर में सुअर अफ़्रीकी स्वाइन फीवर से ग्रस्त पाए गए हैं। इसके चलते हिमाचल प्रदेश सरकार ने पशुपालन विभाग के माध्यम से सुअरों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी है। सरकार ने विभाग के माध्यम से एडवाइजरी जारी कर दी है। फिलहाल जिला ऊना में सुअर पालकों में ऐसा कोई भी केस विभाग के सामने नहीं आया है। जिला ऊना के सुअर पालक विभाग के आदेशों की पालना कर रहे हैं और टीकाकरण से लेकर बैठने की जगह पर दवाइयों का नियमित छिड़काव हो रहा है। सुअरों में वर्तमान में ये बीमारी पाए जाने की सूरत में बचाव के तौर पर सरकार ने यह प्रभावी कदम उठाया है। विभाग के अनुसार सुअरों में अफ़्रीकी स्वाइन फीवर होने से यह एक बेहद संक्रामक बीमारी है, जो सुअरों में 100 प्रतिशत मृत्यु दर का कारण बनती है। विभाग के अनुसार बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, दस्त, असामान्य तंत्रिका संकेत अल्सर या छाले जैसे लक्षण सुअरों में दिखाई दें तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सुअरों में कुछ बीमारियां मनुष्यों के लिए भी खतरनाक हो सकती हैं। इसलिए सुअरों के साथ संपर्क में आने से पहले उचित सावधानी बरतें और सभी सुरक्षा नियमों का पालन करें।
टकारला क्षेत्र में सुअर व्यापार से जुड़े व्यक्ति केवल ने बताया कि हमें अभी सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। समय-समय पर सुअरों का टीकाकरण कराते हैं और उनके बैठने की जगह पर दवाइयों का नियमित छिड़काव करते रहते हैं। अभी तक व्यापार पर कोई असर नहीं पड़ा है। अगर ऐसा है तो आने वाले समय में इसका प्रभाव दिखाई दे सकता है।
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दिलवां गांव के सुअर पालक दुलो राम ने कहा कि हम स्थानीय स्तर पर मीट की बिक्री नहीं करते। छोटे बच्चों को पालते हैं और बड़े होने पर उन्हें चंडीगढ़ में बेचते हैं। हमारे सुअर पूरी तरह स्वस्थ हैं और डॉक्टरों के निर्देशों का पालन कर रहे हैं। अगर सरकार ने प्रतिबंध लगाया है तो इसका असर हमारे व्यापार पर भी पड़ेगा।
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चुरूडू के पशु चिकित्सा अधिकारी गोपाल कृष्ण ने बताया कि हम सुअरों पर पूरी निगरानी रख रहे हैं और सुअर पालकों को सतर्क कर दिया गया है। यदि कोई सुअर बीमार होता है या उसकी मृत्यु होती है तो उसका सैंपल लेकर जांच की जाएगी। अभी के लिए सुअरों की खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है।
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक विनय शर्मा के अनुसार प्रदेश के कुछ जिलाें में सुअर अफ़्रीकी स्वाइन फीवर संक्रामक बीमारी से ग्रस्त पाए हैं। सरकार ने बचाव के तौर पर एडवाइजरी जारी की है। फिलहाल सुअर पालकों पर विभाग बराबर निगरानी रखे हुए है।