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सीमावर्ती गांवों में आज लिए जाएंगे मिट्टी व पानी के सैंपल
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पीएसीएल कंपनी का दौरा कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते उपायुक्त ऊना राघव शर्मा, उपायुक्त रोपड़ डॉ ?
- फोटो : Una
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ऊना/नंगल। नंगल के अजौली मोड़ स्थित पीएसीएल उद्योग से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी और वायु प्रदूषण से स्थानीय निवासियों को राहत प्रदान करने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए गए हैं। इस दिशा में राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ओर से गठित कमेटी के सदस्यों जिला उपायुक्त राघव शर्मा, उपायुक्त रोपड़ डॉ. प्रीति यादव सहित अन्यों ने पीएसीएल कंपनी का दौरा कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।
कमेटी ने पीएसीएल में लगे ट्रीटमेंट प्लांट के अलावा पूरी इकाई को जांचा। मौके पर शिकायतकर्ता भी मौजूद रहे। शुक्रवार यानि आज प्रभावित गांवों के भूमिगत पानी और मिट्टी के सैंपल लिए जाएंगे। सैंपल रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस संबंध में उपायुक्त राघव शर्मा ने कहा सीमावर्ती गांवों की इस समस्या को समाप्त करने के लिए प्रदेश सरकार के निर्देशों की अनुपालना करते हुए पुरजोर प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, उपायुक्त रूपनगर प्रीति यादव ने कहा कि पंजाब और हिमाचल के अधिकारियों को साथ लेकर इकाई में जांच की गई है। रिपोर्ट तैयार कर एनजीटी को भेजी जाएगी।
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बता दें कि पंजाब की सीमा से सटे जिला के सनोली, मजारा, मलूकपुर व बीनेवाल पूना गांवों में पीएसीएल उद्योग से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी से ग्रामीण परेशान है। बीते दिनों जल शक्ति विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में सैंपल लिए और पाया कि उद्योग से निकलने वाले गंदे पानी से इन सीमावर्ती गांवों में पीने के पानी के स्रोत दूषित हो रहे हैं। किसानों की खेती योग्य भूमि भी खराब हो रही है। प्रदेश सरकार में ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी ने स्वयं आकर इन गांवों का दौरा किया था और रिपोर्ट मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को दी थी।
कमेटी ने मांगा पुराना रिकॉर्ड
औद्योगिक इकाई के मुख्य महाप्रबंधक एमपीएस वालिया ने कहा कि उनका प्लांट जीरो लिक्विड डिस्चार्ज है। प्लांट की एक भी बूंद बाहर नहीं छोड़ते। उन्होंने कहा कि एनजीटी की ओर से गठित कमेटी ने कुछ पुराने रिकार्ड मांगे है। जल्द यह रिकॉर्ड उपलब्ध करवा दिया जाएगा।
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कमेटी ने पीएसीएल में लगे ट्रीटमेंट प्लांट के अलावा पूरी इकाई को जांचा। मौके पर शिकायतकर्ता भी मौजूद रहे। शुक्रवार यानि आज प्रभावित गांवों के भूमिगत पानी और मिट्टी के सैंपल लिए जाएंगे। सैंपल रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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इस संबंध में उपायुक्त राघव शर्मा ने कहा सीमावर्ती गांवों की इस समस्या को समाप्त करने के लिए प्रदेश सरकार के निर्देशों की अनुपालना करते हुए पुरजोर प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, उपायुक्त रूपनगर प्रीति यादव ने कहा कि पंजाब और हिमाचल के अधिकारियों को साथ लेकर इकाई में जांच की गई है। रिपोर्ट तैयार कर एनजीटी को भेजी जाएगी।
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बता दें कि पंजाब की सीमा से सटे जिला के सनोली, मजारा, मलूकपुर व बीनेवाल पूना गांवों में पीएसीएल उद्योग से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी से ग्रामीण परेशान है। बीते दिनों जल शक्ति विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में सैंपल लिए और पाया कि उद्योग से निकलने वाले गंदे पानी से इन सीमावर्ती गांवों में पीने के पानी के स्रोत दूषित हो रहे हैं। किसानों की खेती योग्य भूमि भी खराब हो रही है। प्रदेश सरकार में ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी ने स्वयं आकर इन गांवों का दौरा किया था और रिपोर्ट मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को दी थी।
कमेटी ने मांगा पुराना रिकॉर्ड
औद्योगिक इकाई के मुख्य महाप्रबंधक एमपीएस वालिया ने कहा कि उनका प्लांट जीरो लिक्विड डिस्चार्ज है। प्लांट की एक भी बूंद बाहर नहीं छोड़ते। उन्होंने कहा कि एनजीटी की ओर से गठित कमेटी ने कुछ पुराने रिकार्ड मांगे है। जल्द यह रिकॉर्ड उपलब्ध करवा दिया जाएगा।