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Una News: ओयल प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में गंभीर बीमारियों का हो रहा निदान
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आयुर्वेदिक प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से मरीजों का उपचार करने विशेषज्ञ चिकित्सक। स्रोत संवाद
ओयल में संचालित हो रहा प्रदेश का एकमात्र आयुर्वेदिक प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र
बाहरी जिलों से भी इस पद्धति का लाभ लेने के लिए आ रहे मरीज
सतीश शर्मा
गगरेट/नारी (ऊना)। गगरेट उपमंडल के ओयल गांव में प्रदेश के एकमात्र आयुर्वेदिक प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र का संचालन किया जा रहा। जहां प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से छोटी से लेकर गंभीर बीमारियों का इलाज किया जा रहा। इस पद्धति से इलाज कराकर सैकड़ों लोग तंदुरुस्त हो चुके, जबकि कइयों का इलाज जारी है। इस चिकित्सा पद्धति का लाभ लेने प्रतिदिन कई मरीज चिकित्सा केंद्र में पहुंचते हैं। ऊना के अलावा बाहरी इलाकों से भी यहां प्राकृतिक पद्धति का लाभ लेने आ रहे।
जानकारी के अनुसार ओयल गांव में गांधी आश्रम में 10 बेड का आयुर्वेदिक प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र चलाया जा रहा। इसमें प्राकृतिक चिकित्सा से गंभीर बीमारियों का इलाज भी किया जाता है, जिसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता। कुछ मरीजों को ओपीडी तो जिनके लिए आवश्यक लगे, उन्हें दाखिल कर इलाज मुहैया कराया जा रहा। अस्पताल में एक आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी, फार्मासिस्ट, होम्योपैथी का विशेषज्ञ तथा अन्य सहायक स्टाफ भी उपलब्ध है। स्थानीय लोगों में तिलक राज, राकेश कुमार, शशिपाल, ज्ञान प्रकाश, शिवादेव, विनय कुमार, रचना देवी व श्यामा ने बताया कि वर्तमान में यहां तैनात डॉक्टर की मेहनत और प्रयासों से बेहतरीन इलाज सुविधा मिल रही है। जिला और बाहर के जिलों से भी इलाज कराने रोगी आ रहे हैं। यहां कुछ माह के भीतर सैकड़ों मरीज स्वास्थ्य लाभ ले चुके।
आयुर्वेदिक प्राकृतिक चिकित्सा अस्पताल में तैनात डॉक्टर परमजीत नंदा ने बताया कि कुछ ऐसी बीमारियां जिनका इलाज लोग कई जगहों पर दिखाकर भी नहीं करा पाए, वे इस प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र से ठीक होकर गए। आयुर्वेदिक प्राकृतिक चिकित्सा से सर्वाइकल को ग्रीवा पद्धति, कमर दर्द को कटी बस्ती, शियाटिका को अग्निकर्मा, साइनसाइटिस बीमारी को नसय और शिरोधारा, माइग्रेन को शिरोधारा और विरोचन से ठीक किया जा रहा। बताया कि हमारे अस्पताल की पूरी टीम दिनभर चिकित्सा कार्यों में जुटी रहती है। टीम का हर सदस्य अपने काम में विशेषज्ञ है। बता दें कि प्राकृतिक चिकित्सा आयुर्वेदिक पद्धति को सबसे प्राचीन माना जाता है। शेष पद्धतियां इसी पर ही आधारित हैं।
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जिला आयुष अधिकारी डॉ. किरण शर्मा ने बताया कि आयुर्वेदिक प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र ओयल में बेहतरीन कार्य हो रहा है। आयुष विभाग की ओर से कई ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतरीन कार्य किया जा रहा। जिसके लिए वहां तैनात स्टाफ व विशेषज्ञ प्रशंसा के पात्र हैं।
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बाहरी जिलों से भी इस पद्धति का लाभ लेने के लिए आ रहे मरीज
सतीश शर्मा
गगरेट/नारी (ऊना)। गगरेट उपमंडल के ओयल गांव में प्रदेश के एकमात्र आयुर्वेदिक प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र का संचालन किया जा रहा। जहां प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से छोटी से लेकर गंभीर बीमारियों का इलाज किया जा रहा। इस पद्धति से इलाज कराकर सैकड़ों लोग तंदुरुस्त हो चुके, जबकि कइयों का इलाज जारी है। इस चिकित्सा पद्धति का लाभ लेने प्रतिदिन कई मरीज चिकित्सा केंद्र में पहुंचते हैं। ऊना के अलावा बाहरी इलाकों से भी यहां प्राकृतिक पद्धति का लाभ लेने आ रहे।
जानकारी के अनुसार ओयल गांव में गांधी आश्रम में 10 बेड का आयुर्वेदिक प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र चलाया जा रहा। इसमें प्राकृतिक चिकित्सा से गंभीर बीमारियों का इलाज भी किया जाता है, जिसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता। कुछ मरीजों को ओपीडी तो जिनके लिए आवश्यक लगे, उन्हें दाखिल कर इलाज मुहैया कराया जा रहा। अस्पताल में एक आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी, फार्मासिस्ट, होम्योपैथी का विशेषज्ञ तथा अन्य सहायक स्टाफ भी उपलब्ध है। स्थानीय लोगों में तिलक राज, राकेश कुमार, शशिपाल, ज्ञान प्रकाश, शिवादेव, विनय कुमार, रचना देवी व श्यामा ने बताया कि वर्तमान में यहां तैनात डॉक्टर की मेहनत और प्रयासों से बेहतरीन इलाज सुविधा मिल रही है। जिला और बाहर के जिलों से भी इलाज कराने रोगी आ रहे हैं। यहां कुछ माह के भीतर सैकड़ों मरीज स्वास्थ्य लाभ ले चुके।
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आयुर्वेदिक प्राकृतिक चिकित्सा अस्पताल में तैनात डॉक्टर परमजीत नंदा ने बताया कि कुछ ऐसी बीमारियां जिनका इलाज लोग कई जगहों पर दिखाकर भी नहीं करा पाए, वे इस प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र से ठीक होकर गए। आयुर्वेदिक प्राकृतिक चिकित्सा से सर्वाइकल को ग्रीवा पद्धति, कमर दर्द को कटी बस्ती, शियाटिका को अग्निकर्मा, साइनसाइटिस बीमारी को नसय और शिरोधारा, माइग्रेन को शिरोधारा और विरोचन से ठीक किया जा रहा। बताया कि हमारे अस्पताल की पूरी टीम दिनभर चिकित्सा कार्यों में जुटी रहती है। टीम का हर सदस्य अपने काम में विशेषज्ञ है। बता दें कि प्राकृतिक चिकित्सा आयुर्वेदिक पद्धति को सबसे प्राचीन माना जाता है। शेष पद्धतियां इसी पर ही आधारित हैं।
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जिला आयुष अधिकारी डॉ. किरण शर्मा ने बताया कि आयुर्वेदिक प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र ओयल में बेहतरीन कार्य हो रहा है। आयुष विभाग की ओर से कई ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतरीन कार्य किया जा रहा। जिसके लिए वहां तैनात स्टाफ व विशेषज्ञ प्रशंसा के पात्र हैं।

आयुर्वेदिक प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से मरीजों का उपचार करने विशेषज्ञ चिकित्सक। स्रोत संवाद