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निस्वार्थ भाव जरूरी : गौरदास

Tue, 09 Feb 2021 07:38 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 09 Feb 2021 07:38 PM IST
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selfless sense necessary : gaurdass
बढेड़ा में भगवत कथा के दौरान मौजूद श्रद्घालु - फोटो : Una
ऊना। क्षेत्र के निकटवर्ती गांव कोटला कलां में स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में चल रहे धार्मिक समागम में मंगलवार को श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रभु महिमा का श्रवण किया। इस अवसर पर कथा ब्यास गौर दास महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन चरित्र को चरितार्थ करके संगतों को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
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उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति काम, क्रोध, लोभ, मोह, अंहकार और विकार में पड़ जाता है वे अपने लक्ष्य से भटक जाता है और वे भगवान की नजरों से दूर चला जाता है। उन्होंने कहा कि भगवान के पास जाने के लिए हमारे मन में निस्वार्थ भाव होना जरूरी है। भगवान को भी वे लोग प्रिय है, जो भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा रखते हैं। भगवान ऐसे लोगों को किसी न किसी तरीके से फायदा लाभ पहुंचाते हैं और विपत्तियों का नाश करते हैं। यदि मानस जीवन में आकर भी जन भलाई के कार्य न करके हर तरफ बुराई करें, बेकसूर लोगों को दुखी करें तो ऐसे लोगों को अपने जीवन का सारा हिसाब नरक में देना पड़ता है। कथा में पहुंचने से पहले श्रद्धालुओं ने बाबा बाल जी महाराज की आशीर्वाद लिया।

कथा वाचक अतुल कृष्ण महाराज

कथा वाचक अतुल कृष्ण महाराज- फोटो : Una

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