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सेवानिवृत्त अध्यापिका शशि बाला बच्चों को निशुल्क दे रही शिक्षा
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सतीश शर्मा
नारी (ऊना)। जिला मुख्यालय के साथ लगते गांव कोटला खुर्द की रहने वाली सेवानिवृत्त जेबीटी अध्यापिका शशि बाला जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा में मदद कर रही हैं।
प्राइमरी स्कूल कोटला खुर्द में वह बच्चों को निशुल्क शिक्षा दे रही हैं। उनकी यह मुहिम पांच सालों से लगातार जारी है। जानकारी के अनुसार शशि बाला 30 जून 2017 को प्राइमरी स्कूल सलोह से सेवानिवृत्त हुई।
सेवानिवृत्ति से पहले भी वह जरूरतमंद बच्चों की मदद को तत्पर रहती थीं। जरूरतमंदों को स्वेटर, जूते, पाठ्य सामग्री वितरित करती रहीं। इसके अलावा जो बच्चा अपनी फीस देने में असमर्थ होता था, उनकी फीस भी वह अपनी जेब से भुगतान करती थीं। अब सेवानिवृत्ति के बाद भी उनकी यह सेवा मुहिम जारी है।
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सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने प्राइमरी स्कूल कोटला खुर्द में बच्चों को निशुल्क पढ़ाने का कार्य शुरू किया। इसके लिए उन्होंने बाकायदा शिक्षा विभाग ने अनुमति भी ली। कोटला खुर्द विद्यालय की मुख्य अध्यापिका मीना कुमारी का कहना है कि शशि बाला के कार्यों ने उन्हें प्रभावित किया है।
कहा कि अपने घर का काम और समय त्याग कर बच्चों को ज्ञान देने से बड़ा पुण्य कार्य कोई नहीं है। वहीं शशि बाला का कहना है कि हर समर्थ इंसान का कर्तव्य बनता है कि जहां जरूरत हो वहां हम सेवा करें। कहा कि मुझे बच्चों के बीच समय गुजार कर सुकून प्राप्त होता है। संवाद
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नारी (ऊना)। जिला मुख्यालय के साथ लगते गांव कोटला खुर्द की रहने वाली सेवानिवृत्त जेबीटी अध्यापिका शशि बाला जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा में मदद कर रही हैं।
प्राइमरी स्कूल कोटला खुर्द में वह बच्चों को निशुल्क शिक्षा दे रही हैं। उनकी यह मुहिम पांच सालों से लगातार जारी है। जानकारी के अनुसार शशि बाला 30 जून 2017 को प्राइमरी स्कूल सलोह से सेवानिवृत्त हुई।
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सेवानिवृत्ति से पहले भी वह जरूरतमंद बच्चों की मदद को तत्पर रहती थीं। जरूरतमंदों को स्वेटर, जूते, पाठ्य सामग्री वितरित करती रहीं। इसके अलावा जो बच्चा अपनी फीस देने में असमर्थ होता था, उनकी फीस भी वह अपनी जेब से भुगतान करती थीं। अब सेवानिवृत्ति के बाद भी उनकी यह सेवा मुहिम जारी है।
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सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने प्राइमरी स्कूल कोटला खुर्द में बच्चों को निशुल्क पढ़ाने का कार्य शुरू किया। इसके लिए उन्होंने बाकायदा शिक्षा विभाग ने अनुमति भी ली। कोटला खुर्द विद्यालय की मुख्य अध्यापिका मीना कुमारी का कहना है कि शशि बाला के कार्यों ने उन्हें प्रभावित किया है।
कहा कि अपने घर का काम और समय त्याग कर बच्चों को ज्ञान देने से बड़ा पुण्य कार्य कोई नहीं है। वहीं शशि बाला का कहना है कि हर समर्थ इंसान का कर्तव्य बनता है कि जहां जरूरत हो वहां हम सेवा करें। कहा कि मुझे बच्चों के बीच समय गुजार कर सुकून प्राप्त होता है। संवाद