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सोशल मीडिया से टूट रहे रिश्ते, मेडिटेशन से आएगी नई सोच : डॉ. किरण
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अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता कार्यक्रम में शिक्षा भारती बीएड कालेज की छात्राएं । संवाद
कहा, छात्राएं सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें, खुद का करें सम्मान
शिक्षा भारती बीएड कॉलेज समूर खुर्द में अपराजिता कार्यक्रम में किया जागरूक
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। आधुनिकता के दौर में मेडिटेशन (ध्यान) और प्राणायाम बहुत जरूरी है। इससे एकाग्रता और मन शांत होता है। नई सोच आती है। यह बात अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉक्टर किरण शर्मा ने कही।
कार्यक्रम का आयोजन मंगलवार को शिक्षा भारती बीएड कॉलेज समूर खुर्द में किया गया। उन्होंने प्रशिक्षु छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें। हर क्षेत्र में सीखने की कला होनी चाहिए। तभी आगे बढ़ा जा सकता है और सकारात्मक सोच से ही चैतन्य शक्ति बनती है। कि आध्यात्मिकता के साथ जुड़कर हर बाधा को दूर किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि इंसान को अपने जीवन में हर दिन अपने लिए कुछ नया करने की सीख लेकर आगे बढ़ना होगा। तभी समाज में बदलाव संभव है। शब्दों में बहुत एनर्जी होती है और इससे ही ब्रह्मांड में सकारात्मक ऊर्जा का संचरण होता है। इंसान को सेल्फ रिस्पेक्ट (आत्मसम्मान) करना सीखना चाहिए। अगर इसकी पहल अपनी ओर से होगी तो सामने वाले से भी वैसे ही सकारात्मक व्यवहार देखने को मिलेगा। महिलाओं को खुद की सुरक्षा और सम्मान करना चाहिए लेकिन वर्तमान के बदलते परिवेश में समाज के हर वर्ग के रास्ते में सोशल मीडिया बाधा बना हुआ है। आपसी प्रेम और रिश्ते खत्म हो रहे हैं। सहनशीलता खत्म हो रही है और शिक्षा ही एक ऐसा हथियार है, जिससे हर बाधा को दूर किया जा सकता है। आज की युवा पीढ़ी सोशल मीडिया के जाल में फंसकर अपने मार्ग से विचलित हो गई है। न बच्चा अपने अभिभावकों की सुन रहा है और न ही संस्थानों में शिक्षकों की बातों की ओर ध्यान दिया जा रहा है। अगर ऐसा ही सिलसिला चलता रहा तो आने वाले समय में विकट स्थिति खड़ी हो सकती है। युवा पीढ़ी को अपना पूरा ध्यान अपने लक्ष्य को पूरा करने की ओर केंद्रित करना चाहिए लेकिन वर्तमान का युवा सोशल मीडिया, फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सिस्टम में उलझ कर रह गया है और अपने जीवन और लक्ष्य प्राप्ति की ओर कोई भी ध्यान नहीं दे रहा है।
बाक्स
काॅलेज के प्रिंसिपल हंसराज ने अपराजिता कार्यक्रम की सराहना की और कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से आज की युवा पीढ़ी की मानसिकता में बदलाव आता है और नए रक्त का संचार होता है।
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जितनी बड़ी कठिनाई जिंदगी में आ जाए, इंसान को हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। जब लग रहा है कि हिम्मत हार रहे हैं तो खुद को मोटिवेट (प्रोत्साहित) होने की प्रेरणा कार्यक्रम से मिली। -शिखा
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कार्यक्रम में सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखकर हर रोज नया काम करने की सीख मिली। -शिवांगी
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आज के दौर में लड़का-लड़की एक समान है। किसी भी तरह का मतभेद नहीं करना चाहिए। कार्यक्रम में ऐसे भेदभाव का विरोध करने की प्रेरणा मिली। -कनिका
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महिलाओं और बच्चों के साथ हो रहे उत्पीड़न को सहन करने के बजाय आवाज उठाने की प्रेरणा मिली ताकि शुरुआत में अपराध को बढ़ने से रोका जा सके। -ज्योति
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नारी देश का सम्मान है। इसे कम नहीं समझना चाहिए। कार्यक्रम में जानकारी प्राप्त करके ज्ञानवर्धन हुआ। -किरण देवी
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मेडिटेशन करके हर चीज प्राप्त करने की प्रेरणा मिली। धार्मिक गतिविधियों में जुड़ने की जानकारी मिली। -अंजलि शर्मा
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कार्यक्रम में नकारात्मक सोच को कभी भी अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। हर रोज नई सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। -शिवानी
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शिक्षा भारती बीएड कॉलेज समूर खुर्द में अपराजिता कार्यक्रम में किया जागरूक
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। आधुनिकता के दौर में मेडिटेशन (ध्यान) और प्राणायाम बहुत जरूरी है। इससे एकाग्रता और मन शांत होता है। नई सोच आती है। यह बात अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉक्टर किरण शर्मा ने कही।
कार्यक्रम का आयोजन मंगलवार को शिक्षा भारती बीएड कॉलेज समूर खुर्द में किया गया। उन्होंने प्रशिक्षु छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें। हर क्षेत्र में सीखने की कला होनी चाहिए। तभी आगे बढ़ा जा सकता है और सकारात्मक सोच से ही चैतन्य शक्ति बनती है। कि आध्यात्मिकता के साथ जुड़कर हर बाधा को दूर किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि इंसान को अपने जीवन में हर दिन अपने लिए कुछ नया करने की सीख लेकर आगे बढ़ना होगा। तभी समाज में बदलाव संभव है। शब्दों में बहुत एनर्जी होती है और इससे ही ब्रह्मांड में सकारात्मक ऊर्जा का संचरण होता है। इंसान को सेल्फ रिस्पेक्ट (आत्मसम्मान) करना सीखना चाहिए। अगर इसकी पहल अपनी ओर से होगी तो सामने वाले से भी वैसे ही सकारात्मक व्यवहार देखने को मिलेगा। महिलाओं को खुद की सुरक्षा और सम्मान करना चाहिए लेकिन वर्तमान के बदलते परिवेश में समाज के हर वर्ग के रास्ते में सोशल मीडिया बाधा बना हुआ है। आपसी प्रेम और रिश्ते खत्म हो रहे हैं। सहनशीलता खत्म हो रही है और शिक्षा ही एक ऐसा हथियार है, जिससे हर बाधा को दूर किया जा सकता है। आज की युवा पीढ़ी सोशल मीडिया के जाल में फंसकर अपने मार्ग से विचलित हो गई है। न बच्चा अपने अभिभावकों की सुन रहा है और न ही संस्थानों में शिक्षकों की बातों की ओर ध्यान दिया जा रहा है। अगर ऐसा ही सिलसिला चलता रहा तो आने वाले समय में विकट स्थिति खड़ी हो सकती है। युवा पीढ़ी को अपना पूरा ध्यान अपने लक्ष्य को पूरा करने की ओर केंद्रित करना चाहिए लेकिन वर्तमान का युवा सोशल मीडिया, फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सिस्टम में उलझ कर रह गया है और अपने जीवन और लक्ष्य प्राप्ति की ओर कोई भी ध्यान नहीं दे रहा है।
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काॅलेज के प्रिंसिपल हंसराज ने अपराजिता कार्यक्रम की सराहना की और कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से आज की युवा पीढ़ी की मानसिकता में बदलाव आता है और नए रक्त का संचार होता है।
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जितनी बड़ी कठिनाई जिंदगी में आ जाए, इंसान को हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। जब लग रहा है कि हिम्मत हार रहे हैं तो खुद को मोटिवेट (प्रोत्साहित) होने की प्रेरणा कार्यक्रम से मिली। -शिखा
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कार्यक्रम में सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखकर हर रोज नया काम करने की सीख मिली। -शिवांगी
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आज के दौर में लड़का-लड़की एक समान है। किसी भी तरह का मतभेद नहीं करना चाहिए। कार्यक्रम में ऐसे भेदभाव का विरोध करने की प्रेरणा मिली। -कनिका
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महिलाओं और बच्चों के साथ हो रहे उत्पीड़न को सहन करने के बजाय आवाज उठाने की प्रेरणा मिली ताकि शुरुआत में अपराध को बढ़ने से रोका जा सके। -ज्योति
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नारी देश का सम्मान है। इसे कम नहीं समझना चाहिए। कार्यक्रम में जानकारी प्राप्त करके ज्ञानवर्धन हुआ। -किरण देवी
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मेडिटेशन करके हर चीज प्राप्त करने की प्रेरणा मिली। धार्मिक गतिविधियों में जुड़ने की जानकारी मिली। -अंजलि शर्मा
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कार्यक्रम में नकारात्मक सोच को कभी भी अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। हर रोज नई सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। -शिवानी