{"_id":"69d1031c17862cee8a053deb","slug":"rain-has-become-a-curse-for-wheat-harvesting-and-standing-crops-in-the-fields-una-news-c-93-1-ssml1048-187078-2026-04-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Una News: गेहूं कटाई और खेतों में खड़ी फसल के लिए बारिश बनी अभिशाप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Una News: गेहूं कटाई और खेतों में खड़ी फसल के लिए बारिश बनी अभिशाप
Sun, 05 Apr 2026 05:54 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sun, 05 Apr 2026 05:54 AM IST
विज्ञापन
चकसराय/पंडोगा (ऊना)। जिले में गेहूं की कटाई के बीच बदले मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले कई दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश और तेज हवाओं ने खेतों में तैयार और कटी हुई गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई क्षेत्रों में खेतों में कटी फसल भीग गई है जबकि खड़ी फसल तेज हवा के कारण जमीन पर बिछ गई है। ऐसे में किसानों को दाने सड़ने और अंकुरित होने से पैदावार घटने का डर सताने लगा है।
जानकारी के अनुसार जिलेभर के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों गेहूं की कटाई का कार्य चल रहा है लेकिन मौसम ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। कई स्थानों पर पककर तैयार खड़ी गेहूं की फसल बारिश और हवाओं के कारण झुककर जमीन पर फैल गई हैं। इससे कटाई का कार्य भी प्रभावित हो गया है।
पंडोगा क्षेत्र के किसानों का कहना है कि बार-बार हो रही बूंदाबांदी ने कटाई की रफ्तार रोक दी है। कई स्थानों पर तेज हवा के कारण खड़ी फसल जमीन पर बिछ गई है। इससे हार्वेस्टर और मशीनों से कटाई कराना भी मुश्किल हो गया है। किसानों का कहना है कि खेतों में गिरी फसल को काटने में अधिक समय और खर्च लगता है।
विज्ञापन
उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉ. प्रेम ठाकुर का कहना है कि यदि बारिश जल्द थम जाए और तेज धूप निकल आए तो नुकसान कुछ हद तक कम हो सकता है लेकिन लगातार नमी, जलभराव या ओलावृष्टि की स्थिति में गेहूं की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों पर गंभीर असर पड़ेगा। बारिश के कारण दाने काला पड़ने और वजन घटने की आशंका बढ़ जाती है।
स्थानीय किसान दिनेश ठाकुर ने बताया कि पहले ही बीज, खाद और मजदूरी के बढ़ते खर्च ने किसानों की कमर तोड़ रखी है। अब अगर कटाई के समय बारिश से फसल खराब हो जाती है तो पूरे साल की मेहनत पर पानी फिर जाएगा। उन्होंने कहा कि खेतों में भीगी हुई फसल को समेटना आसान नहीं होता। इसमें अतिरिक्त मजदूरी लगती है और दानों की गुणवत्ता भी खराब हो जाती है।
किसान राकेश कुमार ने कहा कि बड़ी मेहनत से तैयार की गई फसल अब मौसम की मार झेल रही है। यदि दो-तीन दिन और बारिश होती रही तो दाने काले पड़ सकते हैं या उनमें अंकुर निकल सकते हैं। ऐसे में फसल बेचने पर उचित दाम मिलना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने बताया कि किसान अब जल्द से जल्द खेतों से फसल समेटने की कोशिश में जुटे हैं।
किसान हरमिंदर सिंह ने कहा कि कटाई के समय इस तरह की बारिश किसानों के लिए सबसे बड़ा संकट होती है। सरकार को ऐसे समय में प्रभावित किसानों के लिए विशेष राहत और मुआवजे की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो कई किसानों की फसल पूरी तरह खराब हो सकती है।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार जिलेभर के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों गेहूं की कटाई का कार्य चल रहा है लेकिन मौसम ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। कई स्थानों पर पककर तैयार खड़ी गेहूं की फसल बारिश और हवाओं के कारण झुककर जमीन पर फैल गई हैं। इससे कटाई का कार्य भी प्रभावित हो गया है।
विज्ञापन
पंडोगा क्षेत्र के किसानों का कहना है कि बार-बार हो रही बूंदाबांदी ने कटाई की रफ्तार रोक दी है। कई स्थानों पर तेज हवा के कारण खड़ी फसल जमीन पर बिछ गई है। इससे हार्वेस्टर और मशीनों से कटाई कराना भी मुश्किल हो गया है। किसानों का कहना है कि खेतों में गिरी फसल को काटने में अधिक समय और खर्च लगता है।
विज्ञापन
उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉ. प्रेम ठाकुर का कहना है कि यदि बारिश जल्द थम जाए और तेज धूप निकल आए तो नुकसान कुछ हद तक कम हो सकता है लेकिन लगातार नमी, जलभराव या ओलावृष्टि की स्थिति में गेहूं की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों पर गंभीर असर पड़ेगा। बारिश के कारण दाने काला पड़ने और वजन घटने की आशंका बढ़ जाती है।
स्थानीय किसान दिनेश ठाकुर ने बताया कि पहले ही बीज, खाद और मजदूरी के बढ़ते खर्च ने किसानों की कमर तोड़ रखी है। अब अगर कटाई के समय बारिश से फसल खराब हो जाती है तो पूरे साल की मेहनत पर पानी फिर जाएगा। उन्होंने कहा कि खेतों में भीगी हुई फसल को समेटना आसान नहीं होता। इसमें अतिरिक्त मजदूरी लगती है और दानों की गुणवत्ता भी खराब हो जाती है।
किसान राकेश कुमार ने कहा कि बड़ी मेहनत से तैयार की गई फसल अब मौसम की मार झेल रही है। यदि दो-तीन दिन और बारिश होती रही तो दाने काले पड़ सकते हैं या उनमें अंकुर निकल सकते हैं। ऐसे में फसल बेचने पर उचित दाम मिलना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने बताया कि किसान अब जल्द से जल्द खेतों से फसल समेटने की कोशिश में जुटे हैं।
किसान हरमिंदर सिंह ने कहा कि कटाई के समय इस तरह की बारिश किसानों के लिए सबसे बड़ा संकट होती है। सरकार को ऐसे समय में प्रभावित किसानों के लिए विशेष राहत और मुआवजे की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो कई किसानों की फसल पूरी तरह खराब हो सकती है।