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पंजाब अपने हिस्से की एक भी बूंद हरियाणा को नहीं देगा : भगवंत मान
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नंगल डैम के पीछे बनी झील में पानी का जायजा लेते मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान व शिक्षा मंत्री हरजो
केंद्र सरकार चल रही नई नई चालें
संवाद न्यूज एजेंसी
नंगल (ऊना)। नंगल पहुंचे पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नंगल डैम का जायजा लेने के बाद पत्रकारों से बात करते कहा कि हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने के लिए एक भी बूंद पानी नहीं है। मानवता के आधार पर अगर हरियाणा को पीने के लिए पानी चाहिए तो इसे जरूर जारी करेंगे। भगवंत मान ने कहा कि पंजाब की पूर्व सरकार ने तो कभी पंजाब के पानी की रक्षा की ही नहीं लेकिन अब पंजाब में आम आदमी की सरकार है और केंद्र सरकार के दबाव में नहीं आएगी। हमारे पंजाब में धान की बिजाई का सीजन है। पंजाब को अतिरिक्त पानी की जरूरत होगी और पंजाब सरकार किसानों के खेतों में पानी पंहुचाने के लिए पाइपलाइन की व्यवस्था कर रही है। केंद्र सरकार पंजाब के किसानों से बदला लेने के लिए इस तरह के प्रयास करने में जुटी है जो संभव ही नही हैं। नंगल डैम से पानी छोड़ने के लिए गेटों पर जाने वाले रास्ते पर ताला जड़ दिया है ताकि कोई गेटों से अतिरिक्त पानी न छोड़ सके। बीबीएमबी ने कानून को ताक पर रखकर हरियाणा को 8500 क्यूसेक पानी देने का फैसला कर लिया। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कहा कि बीबीएमबी में पंजाब का 60 फीसदी हिस्सा है और बोर्ड का यह फैसला मनमाना, तानाशाही और गैर-लोकतांत्रिक है। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार, हरियाणा और राजस्थान की सरकारों को चेतावनी देते हुए कहा कि उनकी दमनकारी नीतियां पंजाब में नहीं चलने देंगे। यदि केंद्र ऐसी साजिशें रचने से पीछे नहीं हटा तो उसे यह भी भुला देना चाहिए कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए पंजाब देश को धान देता है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि हरियाणा और राजस्थान को पानी का जो हिस्सा बनता है वह आवंटित किया जाता है। हरियाणा इस साल मार्च महीने के अंत तक अपने हिस्से का पानी इस्तेमाल कर चुका है। अब भाजपा हरियाणा को और पानी देने के लिए पंजाब पर दबाव बना रही है। यह गैर-कानूनी चालें खेलने के बजाय केंद्र सरकार को पाकिस्तान के साथ हुई सिंधु जल संधि रद्द करने के बाद चिनाब, झेलम और अन्य नदियों के पानी को राज्य की ओर मोड़ना चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नंगल (ऊना)। नंगल पहुंचे पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नंगल डैम का जायजा लेने के बाद पत्रकारों से बात करते कहा कि हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने के लिए एक भी बूंद पानी नहीं है। मानवता के आधार पर अगर हरियाणा को पीने के लिए पानी चाहिए तो इसे जरूर जारी करेंगे। भगवंत मान ने कहा कि पंजाब की पूर्व सरकार ने तो कभी पंजाब के पानी की रक्षा की ही नहीं लेकिन अब पंजाब में आम आदमी की सरकार है और केंद्र सरकार के दबाव में नहीं आएगी। हमारे पंजाब में धान की बिजाई का सीजन है। पंजाब को अतिरिक्त पानी की जरूरत होगी और पंजाब सरकार किसानों के खेतों में पानी पंहुचाने के लिए पाइपलाइन की व्यवस्था कर रही है। केंद्र सरकार पंजाब के किसानों से बदला लेने के लिए इस तरह के प्रयास करने में जुटी है जो संभव ही नही हैं। नंगल डैम से पानी छोड़ने के लिए गेटों पर जाने वाले रास्ते पर ताला जड़ दिया है ताकि कोई गेटों से अतिरिक्त पानी न छोड़ सके। बीबीएमबी ने कानून को ताक पर रखकर हरियाणा को 8500 क्यूसेक पानी देने का फैसला कर लिया। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कहा कि बीबीएमबी में पंजाब का 60 फीसदी हिस्सा है और बोर्ड का यह फैसला मनमाना, तानाशाही और गैर-लोकतांत्रिक है। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार, हरियाणा और राजस्थान की सरकारों को चेतावनी देते हुए कहा कि उनकी दमनकारी नीतियां पंजाब में नहीं चलने देंगे। यदि केंद्र ऐसी साजिशें रचने से पीछे नहीं हटा तो उसे यह भी भुला देना चाहिए कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए पंजाब देश को धान देता है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि हरियाणा और राजस्थान को पानी का जो हिस्सा बनता है वह आवंटित किया जाता है। हरियाणा इस साल मार्च महीने के अंत तक अपने हिस्से का पानी इस्तेमाल कर चुका है। अब भाजपा हरियाणा को और पानी देने के लिए पंजाब पर दबाव बना रही है। यह गैर-कानूनी चालें खेलने के बजाय केंद्र सरकार को पाकिस्तान के साथ हुई सिंधु जल संधि रद्द करने के बाद चिनाब, झेलम और अन्य नदियों के पानी को राज्य की ओर मोड़ना चाहिए।