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Una News: बीस सरकारी स्कूलों में प्रधानाचार्य के पद खाली
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अतिरिक्त कार्यभार देकर किया जा रहा संचालन
बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर, अभिभावक चिंतित
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर करने के लिए बेशक बड़े दावे किए जाते रहे हों लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता को बिना योग्य नेतृत्व के कैसे पूरा किया जा सकेगा। स्कूलों में जहां भारी संख्या में अध्यापकों के पद खाली पड़े हैं, वहीं जिला के कई सरकारी स्कूलों में प्रधानाचार्य के पद भी खाली हैं। स्कूल में तैनात वरिष्ठ अध्यापक व उप प्रधानाचार्य को अतिरिक्त कार्यभार देकर व्यवस्थाओं का संचालन किया जा रहा है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल बसाल, टक्का, समूर और पंडोगा स्कूलों में प्रधानाचार्यों के पद खाली चल रहे हैं। कुल मिलाकर 20 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल ऐसे हैं, जहां प्रधानाचार्या की तैनाती नहीं है। प्रधानाचार्य का पद अतिरिक्त कार्यभार संभालने वाले अध्यापकों पर नियमित कक्षाएं लगाने का जिम्मा भी है। इसके साथ कार्यालय से जुड़े कार्यों को पूरा करने में भी माथापच्ची करनी पड़ती है। इससे कहीं न कहीं बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ता है।
क्षेत्र के अभिभावकों ममता देवी, निर्मला देवी, कंचन शर्मा, सुमन रानी, रविंद्र शर्मा, सुखविंद्र आदि ने कहा कि बिना योग्य मार्गदर्शन कैसे कोई स्कूल बेहतरी की ओर बढ़ सकता है।
जिले के स्कूलों में शिक्षा विभाग और सरकार के निर्देश अनुसार नियुक्तियां की जा रही हैं। प्रधानाचार्य पदों की नियुक्ति को लेकर भी प्रक्रिया जारी है। उम्मीद है कि नई नियुक्तियां जल्द होंगी, जिससे अधिकतर स्कूलों की समस्या हल हो जाएगी। -राजेंद्र कौशल, उपनिदेशक, जिला उच्च शिक्षा विभाग।
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बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर, अभिभावक चिंतित
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर करने के लिए बेशक बड़े दावे किए जाते रहे हों लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता को बिना योग्य नेतृत्व के कैसे पूरा किया जा सकेगा। स्कूलों में जहां भारी संख्या में अध्यापकों के पद खाली पड़े हैं, वहीं जिला के कई सरकारी स्कूलों में प्रधानाचार्य के पद भी खाली हैं। स्कूल में तैनात वरिष्ठ अध्यापक व उप प्रधानाचार्य को अतिरिक्त कार्यभार देकर व्यवस्थाओं का संचालन किया जा रहा है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल बसाल, टक्का, समूर और पंडोगा स्कूलों में प्रधानाचार्यों के पद खाली चल रहे हैं। कुल मिलाकर 20 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल ऐसे हैं, जहां प्रधानाचार्या की तैनाती नहीं है। प्रधानाचार्य का पद अतिरिक्त कार्यभार संभालने वाले अध्यापकों पर नियमित कक्षाएं लगाने का जिम्मा भी है। इसके साथ कार्यालय से जुड़े कार्यों को पूरा करने में भी माथापच्ची करनी पड़ती है। इससे कहीं न कहीं बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ता है।
क्षेत्र के अभिभावकों ममता देवी, निर्मला देवी, कंचन शर्मा, सुमन रानी, रविंद्र शर्मा, सुखविंद्र आदि ने कहा कि बिना योग्य मार्गदर्शन कैसे कोई स्कूल बेहतरी की ओर बढ़ सकता है।
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जिले के स्कूलों में शिक्षा विभाग और सरकार के निर्देश अनुसार नियुक्तियां की जा रही हैं। प्रधानाचार्य पदों की नियुक्ति को लेकर भी प्रक्रिया जारी है। उम्मीद है कि नई नियुक्तियां जल्द होंगी, जिससे अधिकतर स्कूलों की समस्या हल हो जाएगी। -राजेंद्र कौशल, उपनिदेशक, जिला उच्च शिक्षा विभाग।
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