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आलू की पक्की फसल हुई 10 फीसदी खराब, हजारों का नुकसान
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ऊना। जनवरी महीने में लगभग 20 दिन हुई मूसलाधार बारिश का सीधा नुकसान फसलों को हुआ है। खासकर आलू और गेहूं की फसल खराब मौसम से प्रभावित हुई है। कई क्षेत्रों में आलू के खेत पूरी तरह पानी से डूब चुके हैं।
आलू का बीज जमीन में ही सड़ गया है। बताया जा रहा है कि बारिश के कारण जिले में आलू की लगभग 10 प्रतिशत फसल खराब हो चुकी है। पंडोगा, भदसाली, ईसपुर, लालसिंगी, घालूवाल, झलेड़ा गांवों में आलू की फसल बारिश की भेंट चढ़ गई। फसल के खराब होने से किसानों को हजारों रुपये का नुकसान पहुंचा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार क्षेत्र में 500 से 600 हेक्टेयर जमीन पर आलू की चार महीने वाली फसल लगाई जाती है। इस बार आलू की पक्की फसल के लिए बीज की कीमत 1600 रुपये से लेकर तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल तक रही। एक कनाल में एक क्विंटल तक बीज लग जाता है। ऐसे में जिन किसानों की 10 कनाल तक आलू की फसल खराब हुई है उन्हें 16 हजार से 30 हजार तक का नुकसान पहुंचा है। ध्यान रहे कि जिला में केवल उन्ही क्षेत्रों में आलू की फसल को नुकसान पहुंचा है जहां खेतों में पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं है। पानी कई दिनों तक खेतों में खड़ा रहा और इससे जमीन में दबा बीज सड़ना शुरू हो गया। इस बीच चिंता की बात यह भी है कि अब किसान मार्च माह तक कोई फसल भी नहीं बीज पाएंगे। आलू की फसल ऐसे समय में खराब हुई है जब किसानों के पास कोई और फसल बीजने का विकल्प भी नहीं है। बीज सड़ने के साथ खेत खाली रहने का नुकसान भी किसानों को उठाना पड़ेगा। इस संबंध में उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि उन्होंने हाल ही में कार्यभार संभाला है। उन्हें फसलों को हुए नुकसान से जुड़े मामले की जानकारी नहीं है। आने वाले दो दिन में इस बारे में जानकारी जुटाकर उचित कदम उठाए जाएंगे।
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आलू का बीज जमीन में ही सड़ गया है। बताया जा रहा है कि बारिश के कारण जिले में आलू की लगभग 10 प्रतिशत फसल खराब हो चुकी है। पंडोगा, भदसाली, ईसपुर, लालसिंगी, घालूवाल, झलेड़ा गांवों में आलू की फसल बारिश की भेंट चढ़ गई। फसल के खराब होने से किसानों को हजारों रुपये का नुकसान पहुंचा है।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार क्षेत्र में 500 से 600 हेक्टेयर जमीन पर आलू की चार महीने वाली फसल लगाई जाती है। इस बार आलू की पक्की फसल के लिए बीज की कीमत 1600 रुपये से लेकर तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल तक रही। एक कनाल में एक क्विंटल तक बीज लग जाता है। ऐसे में जिन किसानों की 10 कनाल तक आलू की फसल खराब हुई है उन्हें 16 हजार से 30 हजार तक का नुकसान पहुंचा है। ध्यान रहे कि जिला में केवल उन्ही क्षेत्रों में आलू की फसल को नुकसान पहुंचा है जहां खेतों में पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं है। पानी कई दिनों तक खेतों में खड़ा रहा और इससे जमीन में दबा बीज सड़ना शुरू हो गया। इस बीच चिंता की बात यह भी है कि अब किसान मार्च माह तक कोई फसल भी नहीं बीज पाएंगे। आलू की फसल ऐसे समय में खराब हुई है जब किसानों के पास कोई और फसल बीजने का विकल्प भी नहीं है। बीज सड़ने के साथ खेत खाली रहने का नुकसान भी किसानों को उठाना पड़ेगा। इस संबंध में उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि उन्होंने हाल ही में कार्यभार संभाला है। उन्हें फसलों को हुए नुकसान से जुड़े मामले की जानकारी नहीं है। आने वाले दो दिन में इस बारे में जानकारी जुटाकर उचित कदम उठाए जाएंगे।
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