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Una News: हादसों से नहीं लिया सबक, अभिभावक अपने बच्चों को दे रहे वाहन की चाबी

Thu, 29 Jan 2026 07:08 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 29 Jan 2026 07:08 PM IST
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Parents are handing over vehicle keys to their children, having not learnt any lessons from accidents.
स्कूलों में होने वाले सड़क सुरक्षा अभियानों का भी नहीं दिख रहा असर
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लोगों ने प्रशासन की सख्ती की सराहना की
संवाद न्यूज एजेंसी
बंगाणा (ऊना)। सड़क हादसों में बच्चों और किशोरों की मौत के दुखद मामले आए दिन सामने आ रहे हैं। इसे देखते हुए हाल ही में जिला प्रशासन ने सख्त आदेश जारी किए हैं। लोगों ने इस आदेश की सराहना की है और उनका कहना है कि अभिभावकों को अपने बच्चों की सुरक्षा के प्रति अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। हर दिन देखा जा रहा है कि 18 साल से कम उम्र के स्कूली बच्चे अपने अभिभावकों की अनुमति से दोपहिया वाहन चला रहे हैं। बच्चे अपने साथियों को भी स्कूटी या मोटरसाइकिल पर बैठाकर स्कूल या कॉलेज आने-जाने में बड़ी शान दिखा रहे हैं। इससे हादसे हो रहे हैं। स्कूलों में होने वाले सड़क सुरक्षा अभियानों का भी असर नहीं दिख रहा। इस विषय पर कुछ लोगों ने अपने विचार साझा किए हैं।
हर दिन देखा जा रहा है कि नाबालिग स्कूली बच्चे स्पीड से दोपहिया वाहन चला रहे हैं। इसका जिम्मेदार कौन है। केवल बच्चे नहीं, बल्कि अभिभावक भी जिम्मेदार हैं। उनसे आग्रह है कि अपने नाबालिग बच्चों को वाहन चलाने न दें। --सुरेश शर्मा
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हम जहां भी जाते हैं, बच्चों को जागरूक करते हैं कि 18 साल से पहले कोई भी बच्चा मोटरसाइकिल या स्कूटी न चलाए। जब आप 18 साल की उम्र पूरी कर लें, तब अपना लाइसेंस बनवाकर ही वाहन चलाएं। -समाजसेवी योग राज योगी
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नाबालिग बच्चों को वाहन चलाने के लिए स्वयं अभिभावक प्रोत्साहित कर रहे हैं। कुछ अभिभावक इसे अपनी शान समझते हैं। ऐसे अभिभावकों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। -मनोज डोगरा

हम या हमारे बच्चे पैदल ही स्कूल आते-जाते थे। आज स्कूल घर से थोड़ी दूरी पर है, फिर भी अभिभावक उन्हें पैदल नहीं जाने देते। वे अपने नाबालिग बच्चों को बड़ी शान से मोटरसाइकिल या स्कूटी खरीद कर दे रहे हैं। हादसा होने के बाद ही पछताते हैं। -सेवानिवृत्त सूबेदार खुशी राम
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