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Una News: पैरा ओलंपिक स्टार निषाद कुमार ने खेलों की दुनियां में हिमाचल को दी पहचान
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निषाद ने टोक्यो और पेरिस पैरालंपिक में लगातार दो बार रजत पदक जीतकर बढ़ाया मान
हिमाचल दिवस
संवाद न्यूज एजेंसी
अंब(ऊना)। पैरा ओलंपिक स्टार निषाद कुमार खेलों की दुनियां में हिमाचल की पहचान बन चुके हैं। निषाद ने टोक्यो पैरालंपिक और पेरिस पैरालंपिक में लगातार दो बार रजत पदक जीतकर देश का परचम दुनिया भर में लहरा दिया। जिला ऊना के उपमंडल अंब के छोटे से गांव बदाऊं का लाल आज पैरालंपिक खेलों में देश के लिए मेडल की गारंटी बन चुका है। विश्व रैंकिंग में दूसरा स्थान रखने वाला निषाद बचपन में जमैका के एथलीट यूसेन बोल्ट से प्रभावित था। इसके लिए उसने खूब दौड़ लगाई कि यूसेन बोल्ट बनना है लेकिन बाद में उसने पाया कि वह हाई जंप के लिए ज्यादा फिट है। उसके पास फोन नहीं था। वह लोगों के फोन पर देखता था कि हाई जंप की प्रैक्टिस कैसे करे। एक अति साधारण परिवार के बच्चे निषाद ने घर के पास ही चरांद (पशुओं की चरागाह) में लकड़ी के डंडे गाड़कर उस पर रस्सी बांधकर प्रैक्टिस शुरू की। कई बार लोग उन डंडों को तोड़ देते थे। वह जानता था कि कौन ऐसा करता है लेकिन उसने कभी किसी से इसका शिकवा नहीं किया और अपनी प्रैक्टिस जारी रखी। पहली बार फाजा वर्ल्ड ग्रैंड प्रिंक्स में खेलने गया। जहां गोल्ड मिला। वहां जाने के लिए परिवार ने रिश्तेदारों और जानने वालों से लगभग ढाई लाख लोन लिया था। इस बारे में उसे कुछ भी नहीं बताया था। कुछ महीने बाद उसी मैदान में नवंबर 2019 में अपनी पहली वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रांज मेडल जीता था। इसके बाद भारत को टोक्यो पैरालंपिक का कोटा मिला था। जहां उसने रजत पदक हासिल किया था। इसके बाद सितंबर 2024 में पेरिस पैरालंपिक में भी वही कारनामा दोहराकर खेलों के क्षेत्र में हिमाचल और देश की शान बढ़ाई।
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हिमाचल दिवस
संवाद न्यूज एजेंसी
अंब(ऊना)। पैरा ओलंपिक स्टार निषाद कुमार खेलों की दुनियां में हिमाचल की पहचान बन चुके हैं। निषाद ने टोक्यो पैरालंपिक और पेरिस पैरालंपिक में लगातार दो बार रजत पदक जीतकर देश का परचम दुनिया भर में लहरा दिया। जिला ऊना के उपमंडल अंब के छोटे से गांव बदाऊं का लाल आज पैरालंपिक खेलों में देश के लिए मेडल की गारंटी बन चुका है। विश्व रैंकिंग में दूसरा स्थान रखने वाला निषाद बचपन में जमैका के एथलीट यूसेन बोल्ट से प्रभावित था। इसके लिए उसने खूब दौड़ लगाई कि यूसेन बोल्ट बनना है लेकिन बाद में उसने पाया कि वह हाई जंप के लिए ज्यादा फिट है। उसके पास फोन नहीं था। वह लोगों के फोन पर देखता था कि हाई जंप की प्रैक्टिस कैसे करे। एक अति साधारण परिवार के बच्चे निषाद ने घर के पास ही चरांद (पशुओं की चरागाह) में लकड़ी के डंडे गाड़कर उस पर रस्सी बांधकर प्रैक्टिस शुरू की। कई बार लोग उन डंडों को तोड़ देते थे। वह जानता था कि कौन ऐसा करता है लेकिन उसने कभी किसी से इसका शिकवा नहीं किया और अपनी प्रैक्टिस जारी रखी। पहली बार फाजा वर्ल्ड ग्रैंड प्रिंक्स में खेलने गया। जहां गोल्ड मिला। वहां जाने के लिए परिवार ने रिश्तेदारों और जानने वालों से लगभग ढाई लाख लोन लिया था। इस बारे में उसे कुछ भी नहीं बताया था। कुछ महीने बाद उसी मैदान में नवंबर 2019 में अपनी पहली वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रांज मेडल जीता था। इसके बाद भारत को टोक्यो पैरालंपिक का कोटा मिला था। जहां उसने रजत पदक हासिल किया था। इसके बाद सितंबर 2024 में पेरिस पैरालंपिक में भी वही कारनामा दोहराकर खेलों के क्षेत्र में हिमाचल और देश की शान बढ़ाई।