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Una News: कक्षा एक से पांचवीं तक वर्दी वितरण के नए फैसले का विरोध

Wed, 09 Jul 2025 12:53 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 09 Jul 2025 12:53 AM IST
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Opposition to the new decision of uniform distribution from class one to fifth
अभिभावक बोले, एक बच्चे को वर्दी मिलेगी और दूसरे को नहीं, इससे पैदा होगा भेदभाव
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केवल अनुसूचित जाति और बीपीएल परिवारों के लड़के ही गरीब नहीं

संवाद न्यूज एजेंसी

ऊना। प्रदेश सरकार की ओर से पहली से पांचवीं कक्षा तक बच्चों को वर्दी वितरण को लेकर नया फैसला लिया गया। इसमें पांचवीं तक सभी लड़कियों और अनुसूचित जाति और बीपीएल लड़कों को छोड़कर अन्य किसी लड़के को वर्दी या उसके एवज में धनराशि नहीं मलेगी। सरकार के इस फैसले का अभिभावकों की ओर से कड़ा विरोध किया जा रहा।
उनका कहना है कि पहले ही वर्दी को लेकर 600 रुपये की बेहद कम राशि दी जाती थी। अब उस पर भी भेदभाव होगा। कहा कि गरीब परिवारों के बच्चे ही सरकारी स्कूलों में जाते हैं। कहा कि जिन जातियों के लड़कों को वर्दियां नहीं मिलेंगी, क्या सभी के परिवार अमीर हैं। कहा कि धरातल पर बीपीएल में कौन से परिवार आते हैं, वह जग जाहिर है।
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सरकार को चाहिए या तो सभी को वर्दी की सुविधा देना बंद करें या उन सभी बच्चों को इसका लाभ दिया जाए, जो गरीब परिवारों से संबंध रखते हैं। समाज में ऐसे परिवार भी हैं, जिन्हें दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होती, परंतु बीपीएल में नहीं है। सरकार को चाहिए की असली गरीब को ही सुविधा मिले।
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रमा देवी, अभिभावक
सरकारी स्कूलों में एक तो बच्चों की संख्या दिन-प्रतिदिन कम होती जा रही, दूसरा सरकार नए आदेश जारी कर अभिभावकों को अपने बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ाने के लिए मजबूर कर रही। जिन बच्चों को वर्दी नहीं मिलती, वे एक दूसरे से वर्दी न मिलने का कारण पूछते हैं। इससे बच्चों में भेदभाव की भावना पैदा होगी। इसका विभाग और सरकार के पास क्या जवाब है।
संजीव कुमार, अभिभावक।
बच्चों को वर्दी की एवज में धनराशि दी जाती है, जो असल लागत से आधी है। अब उस पर भी रोक लगाई जा रही। खासकर लड़कों को लेकर भेदभाव क्यों किया जा रहा। क्या लड़के गरीब परिवारों से नहीं हो सकते। वर्तमान में लड़का और लड़की एक समान का नारा दिया जाता है और धरातल पर इसके विपरीत फैसले लिए जा रहे।

शमा देवी, अभिभावक।
छोटे बच्चों को लेकर ऐसे फैसले लिए जाना असंवेदनशील है। सरकार अगर वर्दी नहीं दे सकती या बजट नहीं है तो किसी भी बच्चों को न दे। छोटे बच्चों में इससे नकारात्मक भावना पैदा होगा। जब एक बच्चे के सामने कोई दूसरा नई वर्दी में आए और वह पुरानी में, तो उनके मन पर क्या बीतेगी। बच्चों के मन कोमल होते हैं। सरकार को इसकी संवेदनशीलता समझनी होगी।
रमेश कुमार, अभिभावक
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