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Una News: अब कुठारकलां के बाशिंदों ने नगर निगम में शामिल करने के विरोध में किया प्रदर्शन
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टैक्स का बोझ और मनरेगा जैसी सुविधा से वंचित होने पर जता रहे रोष
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। नगर निगम में पंचायत के क्षेत्रों को शामिल करने का विरोध शुरू हो गया। इससे पूर्व ग्राम पंचायत रायंसरी ने नगर निगम के दायरे में न जाने को लेकर प्रदर्शन किया था। शुक्रवार को ग्राम पंचायत कुठार कलां के ग्रामीणों ने नगर निगम में शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई। ग्रामीणों ने पंचायत में स्थित शिव मंदिर में एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन किया। इसके अलावा उपायुक्त ऊना से इस संबंध में उचित कार्रवाई करने की मांग भी उठाई। ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत की कुल भूमि में से केवल 10 प्रतिशत भूमि पर ही आबादी है। इसके अलावा 50 प्रतिशत भूमि पर कृषि की जाती है। ग्रामीणों का मुख्य आय का स्रोत कृषि और पशु पालन है। पशुपालन के लिए आए दिन नए शेड भी बनाने पड़ते हैं। ऐसे में जब पंचायत को नगर निगम में शामिल कर दिया जाएगा तो एक शेड डालने के लिए भी नगर निगम कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ेंगे। इससे स्थानीय लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। नगर निगम में शामिल होने के बाद नए निर्माण कार्य और पुराने की मरम्मत के लिए भी नगर निगम से मंजूरी लेनी पड़ेगी। साथ ही मनरेगा सहित अन्य सुविधाएं जिससे ग्रामीणों को रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं, वह भी समाप्त हो जाएंगे। नगर निगम में शामिल होने के बाद टैक्स भी ग्रामीणों को अदा करना पड़ेगा। इससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। ऐसे में सरकार को इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।
ग्रामीण कई हितों से होंगे वंचित
ग्राम पंचायत कोटला खुर्द को नगर निगम में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। इसका सभी ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। नगर निगम में शामिल होने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के मिलने वाले लाभ और योजनाओं से ग्रामीण वंचित हो जाएंगे। साथ ही कई प्रकार के टैक्स व मनरेगा जैसी योजना से भी वंचित होना पड़ेगा। सरकार को इस फैसले पर विचार करना चाहिए।
ममता रानी, प्रधान ग्राम पंचायत कोटला खुर्द।
नक्शे पास करवाने में लगाने पड़ेंगे चक्कर
ग्राम पंचायत में अधिकतर लोग कृषि और पशुपालन कर अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं। पशुपालन के लिए कई बार शेड बनाने सहित अन्य कार्य आए दिन चले रहते हैं। नगर निगम में शामिल होने के बाद लोगों को इन छोटे-छोटे कार्य करने से पहले नगर निगम से मंजूरी लेनी पड़ेगी।
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नरेश कुमार, उप प्रधान ग्राम पंचायत कोटला खुर्द।
टैक्स का बढ़ेगा बोझ
नगर निगम में शामिल होने के बाद कुछ वर्ष तक तो सरकार टैक्स में छूट प्रदान करती है। कुछ वर्षों के बाद नगर निगम होने के चलते लोगों से कई प्रकार के टैक्स जैसे हाउस टैक्स, सीवरेज टैक्स और अन्य टैक्स वसूल किए जाते हैं। इससे लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
वेद प्रकाश, ग्रामीण
नक्श पास करवाने के लिए लगते हैं कई चक्कर
नगर निगम बनने के बाद जिन पंचायतों को इसमें शामिल किया जाएगा, उनके बाशिंदों को निर्माण कार्य संबंधी ऊना जाकर कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इससे लोगों का समय और पैसा दोनों खर्च होगा।
ईशान, ग्रामीण
लोगों की समस्याओं का निपटारे में लगेगा समय
नगर निगम बनने के बाद इसका क्षेत्र काफी बड़ा होता है। पंचायतों में तो स्थानीय समस्याओं को पंचायत स्तर पर सुलझा दिया जाता है लेकिन नगर निगम के अधीन आने के बाद छोटी-छोटी समस्याओं को निपटाने के लिए समय लगने से भी परेशानी होगी। इससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
पूजा सैणी, पूर्व प्रधान।
सरकार फैसले पर करे विचार
नगर निगम बनाने के लिए पंचायत क्षेत्रों को शामिल करने के फैसले पर सरकार को विचार करना चाहिए। इससे पंचायत क्षेत्रों में सरकार की तरफ से दी जाने वाली सुविधाएं मिलना बंद हो जाएंगी। विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र बनाने के लिए नगर निगम कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ेेंगे। इससे लोगों की समस्याएं बढ़ जाएंगी।
पूर्ण चंद, ग्रामीण
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। नगर निगम में पंचायत के क्षेत्रों को शामिल करने का विरोध शुरू हो गया। इससे पूर्व ग्राम पंचायत रायंसरी ने नगर निगम के दायरे में न जाने को लेकर प्रदर्शन किया था। शुक्रवार को ग्राम पंचायत कुठार कलां के ग्रामीणों ने नगर निगम में शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई। ग्रामीणों ने पंचायत में स्थित शिव मंदिर में एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन किया। इसके अलावा उपायुक्त ऊना से इस संबंध में उचित कार्रवाई करने की मांग भी उठाई। ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत की कुल भूमि में से केवल 10 प्रतिशत भूमि पर ही आबादी है। इसके अलावा 50 प्रतिशत भूमि पर कृषि की जाती है। ग्रामीणों का मुख्य आय का स्रोत कृषि और पशु पालन है। पशुपालन के लिए आए दिन नए शेड भी बनाने पड़ते हैं। ऐसे में जब पंचायत को नगर निगम में शामिल कर दिया जाएगा तो एक शेड डालने के लिए भी नगर निगम कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ेंगे। इससे स्थानीय लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। नगर निगम में शामिल होने के बाद नए निर्माण कार्य और पुराने की मरम्मत के लिए भी नगर निगम से मंजूरी लेनी पड़ेगी। साथ ही मनरेगा सहित अन्य सुविधाएं जिससे ग्रामीणों को रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं, वह भी समाप्त हो जाएंगे। नगर निगम में शामिल होने के बाद टैक्स भी ग्रामीणों को अदा करना पड़ेगा। इससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। ऐसे में सरकार को इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।
ग्रामीण कई हितों से होंगे वंचित
ग्राम पंचायत कोटला खुर्द को नगर निगम में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। इसका सभी ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। नगर निगम में शामिल होने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के मिलने वाले लाभ और योजनाओं से ग्रामीण वंचित हो जाएंगे। साथ ही कई प्रकार के टैक्स व मनरेगा जैसी योजना से भी वंचित होना पड़ेगा। सरकार को इस फैसले पर विचार करना चाहिए।
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ममता रानी, प्रधान ग्राम पंचायत कोटला खुर्द।
नक्शे पास करवाने में लगाने पड़ेंगे चक्कर
ग्राम पंचायत में अधिकतर लोग कृषि और पशुपालन कर अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं। पशुपालन के लिए कई बार शेड बनाने सहित अन्य कार्य आए दिन चले रहते हैं। नगर निगम में शामिल होने के बाद लोगों को इन छोटे-छोटे कार्य करने से पहले नगर निगम से मंजूरी लेनी पड़ेगी।
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नरेश कुमार, उप प्रधान ग्राम पंचायत कोटला खुर्द।
टैक्स का बढ़ेगा बोझ
नगर निगम में शामिल होने के बाद कुछ वर्ष तक तो सरकार टैक्स में छूट प्रदान करती है। कुछ वर्षों के बाद नगर निगम होने के चलते लोगों से कई प्रकार के टैक्स जैसे हाउस टैक्स, सीवरेज टैक्स और अन्य टैक्स वसूल किए जाते हैं। इससे लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
वेद प्रकाश, ग्रामीण
नक्श पास करवाने के लिए लगते हैं कई चक्कर
नगर निगम बनने के बाद जिन पंचायतों को इसमें शामिल किया जाएगा, उनके बाशिंदों को निर्माण कार्य संबंधी ऊना जाकर कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इससे लोगों का समय और पैसा दोनों खर्च होगा।
ईशान, ग्रामीण
लोगों की समस्याओं का निपटारे में लगेगा समय
नगर निगम बनने के बाद इसका क्षेत्र काफी बड़ा होता है। पंचायतों में तो स्थानीय समस्याओं को पंचायत स्तर पर सुलझा दिया जाता है लेकिन नगर निगम के अधीन आने के बाद छोटी-छोटी समस्याओं को निपटाने के लिए समय लगने से भी परेशानी होगी। इससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
पूजा सैणी, पूर्व प्रधान।
सरकार फैसले पर करे विचार
नगर निगम बनाने के लिए पंचायत क्षेत्रों को शामिल करने के फैसले पर सरकार को विचार करना चाहिए। इससे पंचायत क्षेत्रों में सरकार की तरफ से दी जाने वाली सुविधाएं मिलना बंद हो जाएंगी। विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र बनाने के लिए नगर निगम कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ेेंगे। इससे लोगों की समस्याएं बढ़ जाएंगी।
पूर्ण चंद, ग्रामीण