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Una News: अंबोटा की नीलम सूद हल्दी मशरूम मटर और करेला का बना रहीं अचार
Sat, 22 Nov 2025 01:01 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sat, 22 Nov 2025 01:01 AM IST
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अंबोटा की निलम सूद आचार तैयार करती हुई।
गगरेट/नारी (ऊना)। गगरेट क्षेत्र के अंबोटा गांव की नीलम सूद ने पीएनबी आरसेटी के माध्यम से अचार बनाने की ट्रेनिंग ली। अब वह मास्टर ट्रेनर बन गई हैं। इस वर्ष में ही 30 महिलाओं को हल्दी, करेला, मटर और मशरूम के अचार बनाने की ट्रेनिंग देकर खुद 35 हजार रुपये प्रतिमाह कमा रही हैं।
महिलाएं भी प्रशिक्षित हो चुकी हैं और आगे से आगे महिलाओं को जोड़ रही हैं। महिलाएं भी 18 से 20 हजार रुपये प्रति महीना कमाने लगी हैं। नीलम ट्रेनिंग लेने का श्रेय पीएनबी आरसेटी के जिला समन्वयक आकाश भारद्वाज को देती हैं। जिन्होंने ऐसे हुनर सीखने में दिन-रात एक किया है। अचार बनाने की विधि बताते हुए कहा कि हल्दी, करेला और मशरूम के छोटे-छोटे पीस करके धूप में कुछ दिन तक सुखाया जाता है। जब इनका पानी सूख जाता है, तब थोड़े से देसी मसाले डालकर इन्हें सरसों के तेल में डाल देते हैं।
कुछ दिनों के बाद अचार तैयार हो जाता है। एक किलोग्राम अचार पर 30 से 35 रुपये की आमदनी हो जाती है, बाकी अपनी मेहनत पर निर्भर करता है। स्थानीय लोगों के अलावा आसपास कस्बों के दुकानदार भी अचार ले जाते हैं। बाजार में इसकी बहुत मांग है। हिमाचल प्रदेश के दूसरे जिलों और पंजाब को भी अचार ऑनलाइन भेजा जा रहा है। इससे महिलाओं के जीवन स्तर में परिवर्तन आया है। पीएनबी आरसेटी द्वारा विभिन्न प्रकार के महिलाओं को प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। कई महिलाएं अधिक रुचि लेने के कारण मास्टर ट्रेनर बनने के साथ-साथ खुद भी काम करके अच्छा धन कमा रही हैं। जिससे जिले में महिलाओं के जीवन स्तर में काफी सुधार आया है।
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महिलाएं भी प्रशिक्षित हो चुकी हैं और आगे से आगे महिलाओं को जोड़ रही हैं। महिलाएं भी 18 से 20 हजार रुपये प्रति महीना कमाने लगी हैं। नीलम ट्रेनिंग लेने का श्रेय पीएनबी आरसेटी के जिला समन्वयक आकाश भारद्वाज को देती हैं। जिन्होंने ऐसे हुनर सीखने में दिन-रात एक किया है। अचार बनाने की विधि बताते हुए कहा कि हल्दी, करेला और मशरूम के छोटे-छोटे पीस करके धूप में कुछ दिन तक सुखाया जाता है। जब इनका पानी सूख जाता है, तब थोड़े से देसी मसाले डालकर इन्हें सरसों के तेल में डाल देते हैं।
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कुछ दिनों के बाद अचार तैयार हो जाता है। एक किलोग्राम अचार पर 30 से 35 रुपये की आमदनी हो जाती है, बाकी अपनी मेहनत पर निर्भर करता है। स्थानीय लोगों के अलावा आसपास कस्बों के दुकानदार भी अचार ले जाते हैं। बाजार में इसकी बहुत मांग है। हिमाचल प्रदेश के दूसरे जिलों और पंजाब को भी अचार ऑनलाइन भेजा जा रहा है। इससे महिलाओं के जीवन स्तर में परिवर्तन आया है। पीएनबी आरसेटी द्वारा विभिन्न प्रकार के महिलाओं को प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। कई महिलाएं अधिक रुचि लेने के कारण मास्टर ट्रेनर बनने के साथ-साथ खुद भी काम करके अच्छा धन कमा रही हैं। जिससे जिले में महिलाओं के जीवन स्तर में काफी सुधार आया है।
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