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Una News: मक्की और हरी सब्जियों की फसल बर्बाद, हर किसान को हुआ घाटा
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अब किसानों को आलू की फसल से है अच्छी आय की आस
वर्तमान में जोरों पर चली हुई है आलू की बिजाई
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में मक्की और हरी सब्जियों की फसल लगभग समाप्त हो चुकी है। आलम यह है कि किसानों को इन फसलों से न तो आय हुई और न ही लागत निकल पाई। भारी बारिश से हरी सब्जियों की खेती पूरी तरह तहस-नहस हो गई। कई किसानों ने बारिश के प्रकोप से मक्की को किसी तरह बचाने की कोशिश की, इसके बावजूद पैदावार 40 फीसदी तक घट गई। नुकसान यहीं तक सीमित नहीं रहा। जब किसानों ने मक्की की थ्रेसिंग कर मंडियों में बेचा तो इस बार उन्हें पिछले साल की तुलना में काफी कम दाम मिले। किसानों का कहना है कि पिछले वर्ष मक्की 2000 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक बिकी थी, जबकि इस बार अच्छी गुणवत्ता वाली फसल भी केवल 1500 रुपये प्रति क्विंटल में बिकी। इससे लागत भी पूरी नहीं हो पाई।
वर्तमान में गैर-सिंचित क्षेत्रों में कुछ जगह मक्की की फसल अब भी खड़ी दिखाई दे रही है, लेकिन लगातार बारिश से उसकी स्थिति भी बिगड़ चुकी है। कई किसानों ने खराब फसल को खेतों से हटा दिया है। वहीं, जहां थोड़ी बहुत पैदावार की उम्मीद है, वहां किसान अभी भी फसल संभाले हुए हैं। सिंचाई सुविधा वाले क्षेत्रों में मक्की की कटाई और थ्रेसिंग पूरी हो चुकी है। अब किसान आलू की बिजाई में जुट गए हैं।
किसानों हरबंस लाल, रामपाल, तरसेम लाल, विजय कुमार और यशपाल ने बताया कि मक्की की बिजाई से लेकर मंडी तक पहुंचाने में केवल खर्च ही करना पड़ा। बिक्री के दौरान दाम कम मिलने से जेब खाली रह गई। उन्होंने सरकार से मांग की कि हर फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाए, ताकि किसानों को घाटा न झेलना पड़े। फिलहाल किसानों को दो माह वाली आलू की फसल से बेहतर आय की उम्मीद है। उनका कहना है कि भले ही इस बार आलू की बिजाई देरी से हो रही है, लेकिन इससे उन्हें अन्य फसलों में हुए घाटे की भरपाई की आस है।
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इस संबंध में जिला कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. कुलभूषण धीमान ने बताया कि लगातार और तेज बारिश से फसलों को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, ऊना मैदानी क्षेत्र होने के कारण यहां उतना नुकसान नहीं हुआ, जितना कि प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में देखा गया। उन्होंने कहा कि फसलों के नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट सरकार को भेज दी गई है और इस पर विचार चल रहा है।
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वर्तमान में जोरों पर चली हुई है आलू की बिजाई
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में मक्की और हरी सब्जियों की फसल लगभग समाप्त हो चुकी है। आलम यह है कि किसानों को इन फसलों से न तो आय हुई और न ही लागत निकल पाई। भारी बारिश से हरी सब्जियों की खेती पूरी तरह तहस-नहस हो गई। कई किसानों ने बारिश के प्रकोप से मक्की को किसी तरह बचाने की कोशिश की, इसके बावजूद पैदावार 40 फीसदी तक घट गई। नुकसान यहीं तक सीमित नहीं रहा। जब किसानों ने मक्की की थ्रेसिंग कर मंडियों में बेचा तो इस बार उन्हें पिछले साल की तुलना में काफी कम दाम मिले। किसानों का कहना है कि पिछले वर्ष मक्की 2000 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक बिकी थी, जबकि इस बार अच्छी गुणवत्ता वाली फसल भी केवल 1500 रुपये प्रति क्विंटल में बिकी। इससे लागत भी पूरी नहीं हो पाई।
वर्तमान में गैर-सिंचित क्षेत्रों में कुछ जगह मक्की की फसल अब भी खड़ी दिखाई दे रही है, लेकिन लगातार बारिश से उसकी स्थिति भी बिगड़ चुकी है। कई किसानों ने खराब फसल को खेतों से हटा दिया है। वहीं, जहां थोड़ी बहुत पैदावार की उम्मीद है, वहां किसान अभी भी फसल संभाले हुए हैं। सिंचाई सुविधा वाले क्षेत्रों में मक्की की कटाई और थ्रेसिंग पूरी हो चुकी है। अब किसान आलू की बिजाई में जुट गए हैं।
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किसानों हरबंस लाल, रामपाल, तरसेम लाल, विजय कुमार और यशपाल ने बताया कि मक्की की बिजाई से लेकर मंडी तक पहुंचाने में केवल खर्च ही करना पड़ा। बिक्री के दौरान दाम कम मिलने से जेब खाली रह गई। उन्होंने सरकार से मांग की कि हर फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाए, ताकि किसानों को घाटा न झेलना पड़े। फिलहाल किसानों को दो माह वाली आलू की फसल से बेहतर आय की उम्मीद है। उनका कहना है कि भले ही इस बार आलू की बिजाई देरी से हो रही है, लेकिन इससे उन्हें अन्य फसलों में हुए घाटे की भरपाई की आस है।
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इस संबंध में जिला कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. कुलभूषण धीमान ने बताया कि लगातार और तेज बारिश से फसलों को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, ऊना मैदानी क्षेत्र होने के कारण यहां उतना नुकसान नहीं हुआ, जितना कि प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में देखा गया। उन्होंने कहा कि फसलों के नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट सरकार को भेज दी गई है और इस पर विचार चल रहा है।