{"_id":"b2396c887094fced8720c0d35e315410","slug":"maggi-production-low-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मैगी उत्पादन ठप होने से ट्रक ऑपरेटर मायूस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मैगी उत्पादन ठप होने से ट्रक ऑपरेटर मायूस
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊना, टाहलीवाल
Updated Sat, 06 Jun 2015 07:17 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
टाहलीवाल (ऊना)। देशभर में मैगी को लेकर उपजे विवाद से प्रदेश के एकमात्र टाहलीवाल में स्थापित प्लांट में उत्पादन घटने का असर टाहलीवाल ट्रक यूनियन पर दिखना शुरू हो गया है। नेस्ले मैगी के उत्पादन में कमी आते ही माल ढुलाई में भारी कटौती होने से ट्रक यूनियन की मासिक 1.5 करोड़ की टर्न ओवर को भारी नुकसान होना शुरू हो गया है। जिसके तहत हर रोज लाखों रुपये के हिसाब से नुकसान हो रहा है। हालत यह है कि ट्रक यूनियन के लगभग 15 सौ के करीब ऑपरेटरों का कामकाज बुरी तरह से प्रभावित हो चुका है।
बीते दिनों से नेस्ले मैगी विवाद के चलते टाहलीवाल प्लांट में उत्पादन ठप होने से ट्रक यूनियन को नेस्ले से माल ढुलाई की मांग में भी भारी गिरावट आ गई है। ट्रक यूनियन के अध्यक्ष सतीश बिट्टू, कुलदीप, गुरनाम मूंछी, सोहन लाल, मनोहर लाल, राज कुमार, बलबीर सिंह, सतनाम सिंह, सुभाष चंद, किशन कुमार, हरी सिंह, शशिपाल सहित ट्रक ऑपरेटरों ने बताया कि नेस्ले मैगी विवाद से पहले टाहलीवाल प्लांट से हर रोज 35 से 40 ट्रकों तक माल ढुलाई की डिमांड आती थी और ट्रकों से हजारों टन माल हरियाणा, दिल्ली, जयपुर, ऋषिकेश, पाहल खन्ना, चंडीगढ़ सहित अन्य स्थानों पर पहुंचाया जाता है। जिससे ट्रकों का भाड़ा हर रोज के हिसाब से 40 से 50 लाख रुपये तक होता था। अब माल ढुलाई की डिमांड न के बराबर होने से ट्रक यूनियन को हर रोज लाखों का नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि ट्रक यूनियन को औद्योगिक क्षेत्र से माल ढुलाई की मांग सबसे ज्यादा हर रोज की थी। उन्होंने बताया कि नेस्ले मैगी विवाद से ट्रक ऑपरेटरों को अपनी रोजी रोटी की चिंता सताने लगी है।
विज्ञापन
बीते दिनों से नेस्ले मैगी विवाद के चलते टाहलीवाल प्लांट में उत्पादन ठप होने से ट्रक यूनियन को नेस्ले से माल ढुलाई की मांग में भी भारी गिरावट आ गई है। ट्रक यूनियन के अध्यक्ष सतीश बिट्टू, कुलदीप, गुरनाम मूंछी, सोहन लाल, मनोहर लाल, राज कुमार, बलबीर सिंह, सतनाम सिंह, सुभाष चंद, किशन कुमार, हरी सिंह, शशिपाल सहित ट्रक ऑपरेटरों ने बताया कि नेस्ले मैगी विवाद से पहले टाहलीवाल प्लांट से हर रोज 35 से 40 ट्रकों तक माल ढुलाई की डिमांड आती थी और ट्रकों से हजारों टन माल हरियाणा, दिल्ली, जयपुर, ऋषिकेश, पाहल खन्ना, चंडीगढ़ सहित अन्य स्थानों पर पहुंचाया जाता है। जिससे ट्रकों का भाड़ा हर रोज के हिसाब से 40 से 50 लाख रुपये तक होता था। अब माल ढुलाई की डिमांड न के बराबर होने से ट्रक यूनियन को हर रोज लाखों का नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि ट्रक यूनियन को औद्योगिक क्षेत्र से माल ढुलाई की मांग सबसे ज्यादा हर रोज की थी। उन्होंने बताया कि नेस्ले मैगी विवाद से ट्रक ऑपरेटरों को अपनी रोजी रोटी की चिंता सताने लगी है।
विज्ञापन