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Una News: बच्चों की पढ़ाई पर महंगाई की मार, 10 रुपये तक महंगी हुईं कॉपियां

Sat, 29 Mar 2025 06:54 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 29 Mar 2025 06:54 PM IST
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Inflation has affected children's education, notebooks have become costlier by up to Rs 10
भाग-3
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बीते साल 24 रुपये में मिलने वाली कॉपी इस बार 34 रुपये तक बिक रही

अभिभावकों ने कहा- हर वस्तु की बेलगाम तरीके से बढ़ रही कीमत

बोले- पढ़ाई से जुड़ी वस्तुओं के कीमत पर बनने चाहिए नियम

संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। स्कूलों में वार्षिक परिणाम घोषित होने के बाद अब सभी की नजर नए सत्र की पढ़ाई पर है। अभिभावक जरूरत की शिक्षा सामग्री खरीद रहे हैं। वहीं, दुकानें भी कॉपियों और किताबों से सजी नजर आ रही हैं। हर साल की तरह इस शैक्षणिक सत्र में भी महंगाई की मार कॉपियों-किताबों पर पड़ी है। बच्चों की पढ़ाई में सबसे अहम वस्तु कॉपियों की कीमत में 10 रुपये तक इजाफा हुआ है। जानकारी के अनुसार 24 रुपये की बिकने वाली 80 पेज की कॉपी अब 34 रुपये के आसपास बिक रही है। हालांकि कुछ दुकानों में इसकी कीमत में थोड़ा बहुत अंतर है। दुकानों पर कॉपियों की खरीद करने पहुंचे अभिभावक भी अचानक बढ़ी कीमतों पर हैरानी जता रहे हैं। बताया जा रहा कि जिन दुकानों पर कॉपियां पुराने दामों पर मिल रही, वहां पेज संख्या कम पाई जा रही है। 100 से अधिक पेज संख्या वाली कॉपियां 45 रुपये तक की कीमत में उपलब्ध हैं। पहले 30 रुपये की कॉपी में पेज संख्या 120 के आसपास रहती थी। इसके अलावा स्टेशनरी के अन्य सामान कलर, पेन की कीमत में दो से पांच रुपये तक बढ़ी है। अभिभावकों में सुधीर कुमार, विनोद कुमार, सिद्धांत सूदल, बलबीर सिंह, रविंद्र कुमार ने बताया कि कम कीमत वाली सामग्री की गुणवत्ता घटा दी गई है। अच्छी गुणवत्ता वाला सामान अत्यधिक महंगा हो चुका है। कहा कि एक साल की पढ़ाई में प्रति बच्चा औसत 30 कॉपियों का इस्तेमाल करता है। अगर 40 रुपये प्रति कॉपी खरीदें तो 1200 रुपये एक बच्चे की कॉपियों पर खर्च हो जाएंगे। कहा कि पढ़ाई के मोटे खर्च फीस, वर्दी, किताबों और कॉपियों की खरीद रहती है। इनकी कीमतों का दायरा सीमित करना चाहिए।



उपनिदेशक जिला उच्च शिक्षा विभाग अनिल कुमार ने बताया कि सरकारी स्कूलों में प्रयास रहता है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई अभिभावकों के लिए आर्थिक बोझ न बनें। लेकिन कुछ निजी स्कूलों में शिक्षा सामग्री से जुड़ी मनमानी जरूर देखने को मिली है। विभाग ऐसे संस्थानों पर नजर बनाए हुए हैं। इस पर जल्द आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
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