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Una News: मैं तां मरके बी रेहणा माहिया तेरी...
Mon, 30 Sep 2024 01:31 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Mon, 30 Sep 2024 01:31 AM IST
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ऊना। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की धर्मपत्नी एवं प्रख्यात शिक्षाविद दिवंगत प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री के 56वें जन्मदिन पर रविवार को हरोली के कॉलेज परिसर में आयोजित ‘एहसास’ कार्यक्रम में उनकी पुण्य स्मृतियों को नमन किया गया।
प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में सूफी गायक लखविंदर वडाली ने अपनी रूहानी गायकी से स्मृतियों के ‘एहसास’ को सुरों से महकाया। उन्होंने तू माने या ना माने दिलदारा, असां तां तेनूं रब्ब मन्नेया... से रूहानी गायकी की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने मैं तां मरके बी रेहणा माहिया तेरी, दुआ ना कोई होर मंगदी की प्रस्तुति से सभी को भावुक कर दिया। कार्यक्रम में प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री के पति उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, उनकी बेटी डॉ. आस्था अग्निहोत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने प्रो. सिम्मी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री के भाई डॉ. राकेश अग्निहोत्री समेत सभी परिजन, पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री रैंक) आरएस बाली, विधानसभा उपाध्यक्ष विनय कुमार, सीपीएस आशीष बुटेल, विधायक विवेक शर्मा सहित पार्टी के अन्य पदाधिकारी, उपायुक्त जतिन लाल, पुलिस अधीक्षक राकेश सिंह समेत अन्य अधिकारियों व बड़ी संख्या में जनता ने प्रो. सिम्मी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रो. सिम्मी की उपलब्धियां हर बच्ची के लिए प्रेरणादायक : डॉ. आस्था
कार्यक्रम में डॉ. आस्था अग्निहोत्री ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में प्रो. सिम्मी की उपलब्धियां हर बच्ची को प्रेरणा देने वाली हैं। उनके जीवन से यह सीख मिलती है कि कोई व्यक्ति जीवन में कहां पहुंचेगा, क्या मुकाम हासिल करेगा, ये जीवन की बाधाओं में आगे बढ़ते जाने का जज्बा और आपके कर्म, संघर्ष और मेहनत तय करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री का जीवन एक दीपक की तरह था, जिन्होंने अनगिनत जीवनों को रोशन किया। उन्होंने प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री के निधन के बाद दुख की घडि़यों में मजबूत साथ के लिए हरोली समेत सभी हिमाचलवासियों का आभार जताया।
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एक महान शिक्षाविद और सच्ची समाजसेवी थीं प्रो. सिम्मी
29 सितंबर 1968 को मंडी में जन्मीं प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री 9 फरवरी 2024 को अपनी सांसारिक यात्रा पूरी करके माता श्री चिंतपूर्णी की दिव्य ज्योति में विलीन हो गईं। अपने छोटे से जीवनकाल में उनकी अनगिनत अकादमिक उपलब्धियां अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक मंचों पर भारतीय शिक्षा का प्रतिनिधित्व करती हैं। हरोली कॉलेज का नामकरण प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री के नाम पर किया गया है, जो कि यहां पढ़ने वाले हर विद्यार्थी के लिए ज्ञान की वृहद परंपरा से जुड़ने और असाधारण शैक्षणिक कर्तृत्व संपन्न व्यक्तित्व से जुड़ने का गौरव प्रदान करता है। प्रो. सिम्मी सबके लिए स्नेह, समझदारी व सीख का भंडार थीं। इरादों की ऐसी अटल कि लगातार पांच बार विधायक के रूप में रिकॉर्ड मतों से विजयी रहे मुकेश अग्निहोत्री की पांचों जीत में निर्णायक भूमिका निभाने वाली प्रो. सिम्मी नंगे पांव माता चिंतपूर्णी, माता ज्वालामुखी, बगलामुखी में शीश नवाने घर से पैदल पहुंचतीं थीं।
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प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में सूफी गायक लखविंदर वडाली ने अपनी रूहानी गायकी से स्मृतियों के ‘एहसास’ को सुरों से महकाया। उन्होंने तू माने या ना माने दिलदारा, असां तां तेनूं रब्ब मन्नेया... से रूहानी गायकी की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने मैं तां मरके बी रेहणा माहिया तेरी, दुआ ना कोई होर मंगदी की प्रस्तुति से सभी को भावुक कर दिया। कार्यक्रम में प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री के पति उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, उनकी बेटी डॉ. आस्था अग्निहोत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने प्रो. सिम्मी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री के भाई डॉ. राकेश अग्निहोत्री समेत सभी परिजन, पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री रैंक) आरएस बाली, विधानसभा उपाध्यक्ष विनय कुमार, सीपीएस आशीष बुटेल, विधायक विवेक शर्मा सहित पार्टी के अन्य पदाधिकारी, उपायुक्त जतिन लाल, पुलिस अधीक्षक राकेश सिंह समेत अन्य अधिकारियों व बड़ी संख्या में जनता ने प्रो. सिम्मी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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प्रो. सिम्मी की उपलब्धियां हर बच्ची के लिए प्रेरणादायक : डॉ. आस्था
कार्यक्रम में डॉ. आस्था अग्निहोत्री ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में प्रो. सिम्मी की उपलब्धियां हर बच्ची को प्रेरणा देने वाली हैं। उनके जीवन से यह सीख मिलती है कि कोई व्यक्ति जीवन में कहां पहुंचेगा, क्या मुकाम हासिल करेगा, ये जीवन की बाधाओं में आगे बढ़ते जाने का जज्बा और आपके कर्म, संघर्ष और मेहनत तय करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री का जीवन एक दीपक की तरह था, जिन्होंने अनगिनत जीवनों को रोशन किया। उन्होंने प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री के निधन के बाद दुख की घडि़यों में मजबूत साथ के लिए हरोली समेत सभी हिमाचलवासियों का आभार जताया।
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एक महान शिक्षाविद और सच्ची समाजसेवी थीं प्रो. सिम्मी
29 सितंबर 1968 को मंडी में जन्मीं प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री 9 फरवरी 2024 को अपनी सांसारिक यात्रा पूरी करके माता श्री चिंतपूर्णी की दिव्य ज्योति में विलीन हो गईं। अपने छोटे से जीवनकाल में उनकी अनगिनत अकादमिक उपलब्धियां अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक मंचों पर भारतीय शिक्षा का प्रतिनिधित्व करती हैं। हरोली कॉलेज का नामकरण प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री के नाम पर किया गया है, जो कि यहां पढ़ने वाले हर विद्यार्थी के लिए ज्ञान की वृहद परंपरा से जुड़ने और असाधारण शैक्षणिक कर्तृत्व संपन्न व्यक्तित्व से जुड़ने का गौरव प्रदान करता है। प्रो. सिम्मी सबके लिए स्नेह, समझदारी व सीख का भंडार थीं। इरादों की ऐसी अटल कि लगातार पांच बार विधायक के रूप में रिकॉर्ड मतों से विजयी रहे मुकेश अग्निहोत्री की पांचों जीत में निर्णायक भूमिका निभाने वाली प्रो. सिम्मी नंगे पांव माता चिंतपूर्णी, माता ज्वालामुखी, बगलामुखी में शीश नवाने घर से पैदल पहुंचतीं थीं।