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Una News: हुक्के पर हुक्का ए घर भुक्खा... लोहड़ी न देने पर कसते थे तंज
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अब लोहड़ी मांगना गर्व नहीं, शर्म समझते हैं बच्चे
तिल का दान और सरोवर में स्नान से मिलता है पुण्य
संवाद न्यूज़ एजेंसी
मैहतपुर (ऊना )। जिले में लोहड़ी पर्व आज धूमधाम से मनाया जाएगा। यह एक ऐसा पर्व है जिसमें खाद्य चीजों को दूसरे घरों से मांग कर लाना और फिर एक स्थान पर अलाव जलाकर मिल बांटकर खाना बहुत ही पवित्र और सब लोगों में आपसी सौहार्द को बढ़ाने वाला माना जाता है। लोहड़ी पर्व की बदली परंपरा के मुताबिक अब नई पीढ़ी के बच्चे लोहड़ी पर्व पर मांगना गर्व नहीं, बल्कि शर्म की बात समझते हैं। दो से तीन दशक पूर्व जब लोहड़ी पर्व मनाते थे, उस समय सब लोग दूसरे घरों में खाद्य वस्तुओं को मांगकर लाया करते थे और एक स्थान पर एकत्र होकर अलाव जलाकर हंसी खुशी गीत-गाते हुए उन्हें मिल बांटकर खाया करते थे। लोहड़ी दियो जी लोहड़ी, जीवे तुआड़ी जोड़ी अर्थात इस वाक्य में लोहड़ी देने वाले घर के परिजनों, पति-पत्नी की जोड़ी की सलामती की दुआ की जाती थी। कोठे पर कद्दू रुपया लेके छड्डू.. लोहड़ी मांगने का एक प्रचलित वाक्य सुनाया जाता था। बदले में घर के लोग कुछ खाद्य चीजों के साथ साथ रुपये भी दे देते थे। लोहड़ी मांगने पर जब किसी घर से खाद्य वस्तुओं के साथ रुपया-पैसा नहीं मिलता था, तो फिर हुक्के पर हुक्का ए घर भुक्खा.. कहकर भागते हुए उन पर तंज कसा जाता था। वर्तमान में परंपरागत लोहड़ी पर्व महज एक औपचारिकता रह गई है, जिसमें न तो आपसी सौहार्द दिखता है और न इस पर्व की परंपरा को मनाने के पीछे का संदेश नजर आता है। वशिष्ठ ज्योतिष सदन के अध्यक्ष पंडित शशिपाल डोगरा ने कहा कि मकर संक्रांति पर तिल गुड़ का दान और सरोवर में स्नान का बड़ा महत्व है। इस दिन लोग तिल और गुड़ के साथ साथ मूंगफली, चिड़वे आदि का दान करते हैं।
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तिल का दान और सरोवर में स्नान से मिलता है पुण्य
संवाद न्यूज़ एजेंसी
मैहतपुर (ऊना )। जिले में लोहड़ी पर्व आज धूमधाम से मनाया जाएगा। यह एक ऐसा पर्व है जिसमें खाद्य चीजों को दूसरे घरों से मांग कर लाना और फिर एक स्थान पर अलाव जलाकर मिल बांटकर खाना बहुत ही पवित्र और सब लोगों में आपसी सौहार्द को बढ़ाने वाला माना जाता है। लोहड़ी पर्व की बदली परंपरा के मुताबिक अब नई पीढ़ी के बच्चे लोहड़ी पर्व पर मांगना गर्व नहीं, बल्कि शर्म की बात समझते हैं। दो से तीन दशक पूर्व जब लोहड़ी पर्व मनाते थे, उस समय सब लोग दूसरे घरों में खाद्य वस्तुओं को मांगकर लाया करते थे और एक स्थान पर एकत्र होकर अलाव जलाकर हंसी खुशी गीत-गाते हुए उन्हें मिल बांटकर खाया करते थे। लोहड़ी दियो जी लोहड़ी, जीवे तुआड़ी जोड़ी अर्थात इस वाक्य में लोहड़ी देने वाले घर के परिजनों, पति-पत्नी की जोड़ी की सलामती की दुआ की जाती थी। कोठे पर कद्दू रुपया लेके छड्डू.. लोहड़ी मांगने का एक प्रचलित वाक्य सुनाया जाता था। बदले में घर के लोग कुछ खाद्य चीजों के साथ साथ रुपये भी दे देते थे। लोहड़ी मांगने पर जब किसी घर से खाद्य वस्तुओं के साथ रुपया-पैसा नहीं मिलता था, तो फिर हुक्के पर हुक्का ए घर भुक्खा.. कहकर भागते हुए उन पर तंज कसा जाता था। वर्तमान में परंपरागत लोहड़ी पर्व महज एक औपचारिकता रह गई है, जिसमें न तो आपसी सौहार्द दिखता है और न इस पर्व की परंपरा को मनाने के पीछे का संदेश नजर आता है। वशिष्ठ ज्योतिष सदन के अध्यक्ष पंडित शशिपाल डोगरा ने कहा कि मकर संक्रांति पर तिल गुड़ का दान और सरोवर में स्नान का बड़ा महत्व है। इस दिन लोग तिल और गुड़ के साथ साथ मूंगफली, चिड़वे आदि का दान करते हैं।