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बदले की भावना रखना राक्षस प्रवृत्ति होने के बराबर : आचार्य

Sun, 09 Feb 2025 07:55 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 09 Feb 2025 07:55 PM IST
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Having a feeling of revenge is equivalent to having demonic tendencies: Acharya
ऊना। हिंदू वैदिक सनातन धर्म में व्यक्ति बदला नहीं लेते, प्रकृति बदला लेती है। अगर किसी के साथ कुछ अनुचित होता है और वह बदला लेने की भावना रखता है तो यह राक्षस प्रवृत्ति का लक्षण है। लोग बदला लेने के लिए यहां तक भी सोच लेते है कि इसकी मृत्यु कैसे की जाए। बदला लेने की भावना उसी में होती है जिसमें ईष्र्या होती है। यह बात राधा कृष्ण मंदिर कोटला कलां में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन रविवार को कथाव्यास आचार्य इंद्रेश ने कही। उन्होंने बताया कि वैष्णव बदला नहीं लेता है। घटी हुई घटना पर भगवत इच्छा मानता है और उसे जो भोगना है वह भगवान पर छोड़ता है। प्रकृति यानी पृथ्वी, अग्नि, जल, वायु, आकाश मनुष्य के साथ घटी घटना का बदला लेती है। कई बार संत के प्रति दुर्भाव रख लिया तो प्रकृति बदला लेती है।
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