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Una News: स्वां नदी के तट पर हरियाली, प्रवासी और स्थानीय लोग साथ-साथ उगा रहे सब्जियां

Sat, 31 Jan 2026 12:10 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 31 Jan 2026 12:10 AM IST
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Greenery on the banks of the Swan River, with migrants and locals growing vegetables together.
स्वां नदी के किनारे रेतीली भूमि पर हरी सब्जियों की खेती
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नदी क्षेत्र के भीतर और आसपास के इलाकों में बड़े स्तर पर उगाई गई हां हरी सब्जियां
प्रवासी लोगों के साथ स्थानीय लोगों ने भी सब्जियों में भाग्य आजमाया
अधिकतर स्थानों पर पहले हुआ करती थी आलू की खेती
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में स्वां नदी के किनारे रेतीली भूमि पर इस बार बड़े स्तर पर हरी सब्जियों की खेती की जा रही है। अब तक नदी क्षेत्र में प्रवासी मजदूर ही हर वर्ष सब्जियों का उत्पादन करते थे, लेकिन इस बार स्थानीय किसानों ने भी इस खेती में अपनी किस्मत आजमाई है। आसपास के करीब 100 कनाल क्षेत्र में स्थानीय किसान हरी सब्जियों की खेती कर रहे हैं। वर्तमान में फसल शुरुआती चरण में है और मार्च तक उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। जानकारी के अनुसार स्वां नदी क्षेत्र में उत्तर प्रदेश और बिहार से आए करीब 1500 परिवारों को वर्षों से निरंतर रोजगार मिलता रहा है। ये प्रवासी परिवार पहले हिमाचल प्रदेश में मेहनत-मजदूरी के लिए आए थे, बाद में उन्होंने स्वां नदी क्षेत्र में खेतीबाड़ी को ही अपना व्यवसाय बना लिया। वर्तमान में प्रवासी किसान उन्नत तरीके से खेती कर रहे हैं और स्थानीय किसान भी उनसे सीख लेकर सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं।इस समय लगभग 6000 कनाल भूमि पर घीया, कद्दू, करेला, टिंडा, शिमला मिर्च, बैंगन, टमाटर और खीरे जैसी सब्जियां उगाई जा रही हैं। गर्मी के मौसम में इन सब्जियों की मांग काफी अधिक रहती है। बाहरी राज्यों से आने वाले लोग भी लौटते समय यहां से सब्जियां खरीदते हैं। इसके अतिरिक्त पैदावार को जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में भेजा जा रहा है।
टकारला से पंजाब और हिमाचल के बाथड़ी बॉर्डर तक स्वां नदी के लगभग 24 किलोमीटर लंबे बहाव क्षेत्र में यह खेती की जा रही है। इसके अलावा लाल सिंगी गांव के साथ लगते स्वां नदी क्षेत्र के खेतों में भी सब्जियों का उत्पादन हो रहा है।
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कैसे होती है खेती
स्वां नदी क्षेत्र में बरसात के बाद अक्तूबर से फल और सब्जियों की खेती की तैयारी शुरू कर दी जाती है। भूमि को समतल कर चार फीट गहरी खाइयां बनाई जाती हैं, जिनमें सब्जियों के पौधे रोपे जाते हैं। पौधों को सर्दी और तेज धूप से बचाने के लिए जालीदार कपड़े से ढका जाता है। कई किसान पॉलिथीन का भी उपयोग करते हैं, जिसे मौसम साफ होने पर हटा दिया जाता है। दिसंबर और जनवरी में लगाए गए पौधे मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत में उत्पादन देना शुरू कर देते हैं। प्रतिदिन लगभग 1000 टन बेमौसमी हरी सब्जियों का उत्पादन किया जाता है।
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जिला कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. कुलभूषण धीमान ने बताया कि स्वां नदी क्षेत्र में सब्जियों की खेती कड़ी मेहनत का काम है। रेतीली भूमि होने के कारण किसानों को नियमित सिंचाई करनी पड़ती है। साथ ही मौसम की मार और नदी का जलस्तर बढ़ने पर फसलों को नुकसान का खतरा भी बना रहता है। उन्होंने कहा कि प्रवासी और स्थानीय किसान खेती के लिए प्रशिक्षित हैं और किसी भी समस्या की स्थिति में कृषि विभाग की ओर से उन्हें पूरा सहयोग प्रदान किया जाता है।
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