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Una News: लगातार बारिश और धूप न खिलने से हरी सब्जियां बर्बाद
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उमस और बारिश से सब्जियों में पैदा होने लगी सड़न, उत्पादन घटना तय
किसानों ने कहा- इस बार जून में हो गया नुकसान, पूरी नहीं हुई लागत
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में बीते कई दिन से लगातार बारिश और उमस भरा मौसम रहने से हरी सब्जियों की खेती बर्बाद होने लगी हैं। कई स्थानों पर खेतों में ही सब्जियां सड़ने लगी हैं। जून में लगातार हो रही बारिश से किसानों को भी खासा नुकसान हुआ है। अमूमन जुलाई से बरसात का ऐसा दौर शुरू होता है। किसानों को जून में सब्जियों की बिक्री में अच्छा लाभ मिल जाता था लेकिन समय से पहले की बारिश ने किसानों को फसलों पर आई लागत को पूरा करना भी मुश्किल कर दिया।
जानकारी के अनुसार ऊना जिले में इस समय भिंडी, बैंगन, घीया, कद्दू, शिमला मिर्च, हरी मिर्च, गोभी और खीरा जैसी फसलें तैयार हो रही हैं। अधिकतर फसलें तैयार हैं और किसान मंडी में बिक्री करने पहुंच रहे हैं लेकिन 20 जून के बाद से प्रतिदिन बारिश हो रही है। जबकि, थोड़ी देर ही धूप खिल पाई। इससे फसलों पर संक्रामक बीमारियां, कीड़ा व अन्य कारण से सड़न पैदा होने लगी है। सब्जियों को लगने वाली बीमारियों में फंगल रोग, बैक्टीरियल रोग और कीटों से होने वाले रोग शामिल हैं। इससे फसल की पत्तियों से लेकर सब्जियां भी प्रभावित हो रहीं और गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा। बीमारियों के चलते सब्जियों को मंडियों में खरीदने से व्यापारी हाथ खींच रहे।
किसान देसराज, अमित कुमार, राजेश कुमार, सुरेंद्र सैनी, अमरीक सिंह, सतविंदर सिंह ने बताया कि फसलों को बारिश के साथ धूप की जरूरत भी रहती है। बीते आठ दिन में कुछ घंटे ही धूप के दर्शन हुए। जबकि उमस और बारिश का दौर नियमित अंतराल में जारी है। इस मौसम में फसलें बीमारियों की जकड़ में आ रही हैं। अगर खेतों में जलभराव हो जाए तो पूरी फसल बर्बाद हो सकती है। पहले जुलाई में 15 तारीख के आसपास बारिश होती थी, तब तक अधिकतर फसलें बेच चुके होते थे। इस बार पहले ही बरसात शुरू हो गई। कहा कि ऐसे मौसम में बीमारियों से बचाव को लेकर कीटनाशक का छिड़काव भी नहीं कर सकते क्योंकि उनकी कीमत काफी अधिक है और कब बारिश में धुल जाए, कह नहीं सकते।
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उपनिदेशक कृषि विभाग डॉ. कुलभूषण धीमान ने बताया कि बरसात और उमस के बीच सब्जियों को बीमारियों और कीड़े से बचाना अपने आप में चुनौती रहता है। कहा कि किसान अपनी समस्या कृषि विभाग के विशेषज्ञों के समझ रख सकते हैं, ताकि मौके का निरीक्षण कर उचित कदम उठाए जा सकें।
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किसानों ने कहा- इस बार जून में हो गया नुकसान, पूरी नहीं हुई लागत
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में बीते कई दिन से लगातार बारिश और उमस भरा मौसम रहने से हरी सब्जियों की खेती बर्बाद होने लगी हैं। कई स्थानों पर खेतों में ही सब्जियां सड़ने लगी हैं। जून में लगातार हो रही बारिश से किसानों को भी खासा नुकसान हुआ है। अमूमन जुलाई से बरसात का ऐसा दौर शुरू होता है। किसानों को जून में सब्जियों की बिक्री में अच्छा लाभ मिल जाता था लेकिन समय से पहले की बारिश ने किसानों को फसलों पर आई लागत को पूरा करना भी मुश्किल कर दिया।
जानकारी के अनुसार ऊना जिले में इस समय भिंडी, बैंगन, घीया, कद्दू, शिमला मिर्च, हरी मिर्च, गोभी और खीरा जैसी फसलें तैयार हो रही हैं। अधिकतर फसलें तैयार हैं और किसान मंडी में बिक्री करने पहुंच रहे हैं लेकिन 20 जून के बाद से प्रतिदिन बारिश हो रही है। जबकि, थोड़ी देर ही धूप खिल पाई। इससे फसलों पर संक्रामक बीमारियां, कीड़ा व अन्य कारण से सड़न पैदा होने लगी है। सब्जियों को लगने वाली बीमारियों में फंगल रोग, बैक्टीरियल रोग और कीटों से होने वाले रोग शामिल हैं। इससे फसल की पत्तियों से लेकर सब्जियां भी प्रभावित हो रहीं और गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा। बीमारियों के चलते सब्जियों को मंडियों में खरीदने से व्यापारी हाथ खींच रहे।
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किसान देसराज, अमित कुमार, राजेश कुमार, सुरेंद्र सैनी, अमरीक सिंह, सतविंदर सिंह ने बताया कि फसलों को बारिश के साथ धूप की जरूरत भी रहती है। बीते आठ दिन में कुछ घंटे ही धूप के दर्शन हुए। जबकि उमस और बारिश का दौर नियमित अंतराल में जारी है। इस मौसम में फसलें बीमारियों की जकड़ में आ रही हैं। अगर खेतों में जलभराव हो जाए तो पूरी फसल बर्बाद हो सकती है। पहले जुलाई में 15 तारीख के आसपास बारिश होती थी, तब तक अधिकतर फसलें बेच चुके होते थे। इस बार पहले ही बरसात शुरू हो गई। कहा कि ऐसे मौसम में बीमारियों से बचाव को लेकर कीटनाशक का छिड़काव भी नहीं कर सकते क्योंकि उनकी कीमत काफी अधिक है और कब बारिश में धुल जाए, कह नहीं सकते।
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उपनिदेशक कृषि विभाग डॉ. कुलभूषण धीमान ने बताया कि बरसात और उमस के बीच सब्जियों को बीमारियों और कीड़े से बचाना अपने आप में चुनौती रहता है। कहा कि किसान अपनी समस्या कृषि विभाग के विशेषज्ञों के समझ रख सकते हैं, ताकि मौके का निरीक्षण कर उचित कदम उठाए जा सकें।