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Una News: चमयाड़ी और सरोह पंचायत के गांवों में तेंदुओं की दहशत
Mon, 08 Jul 2024 03:26 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Mon, 08 Jul 2024 03:26 AM IST
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बंगाणा (ऊना)। क्षेत्र की सोहलसिंगी धार पर स्थित चमयाड़ी और सरोह पंचायत के गांवों में तेंदुओं की दहशत से ग्रामीण खेत खलिहानों में जाने से भी कतरा रहे हैं। शनिवार देर शाम चमयाड़ी पंचायत के गांव सुटनेहड़ा में घर से लगभग 100 मीटर दूरी पर एक मादा तेंदुआ अपने दो से तीन शावक सहित खेलते हुए देखी गई। एक साथ तीन से चार तेंदुओं को देखकर गांव में दहशत का माहौल बना हुआ है।
इसके अलावा सरोह में भी दो बड़े तेंदुए देखे गए। इस मामले पर चमयाड़ी पंचायत के प्रधान अशोक ठाकुर, सिहाणा पंचायत के प्रधान सुनील कुमार, उपप्रधान मनजीत सिंह, उपप्रधान पवन कुमार, रिशू बनियाल, दिनेश कुमार, रवि ठाकुर, शेर सिंह, कुलदीप सिंह, सतीश कुमार, अजय कुमार सहित चमयाड़ी पंचायत के गांव सुक नेहडा, बसातर, सरोह, डरोह, बरोटी, खेडी, रछोह, सिहाणा पंचायत के गांव कोट, मतोह, घराना, सिहाणा, डोलू सहित अन्य गांववासियों ने वन विभाग से दोनों पंचायतों में अलग-अलग स्थानों पर पिंजरे लगाने की मांग की है।
इस पर वन विभाग बंगाणा रेंज अधिकारी अंकुश आनंद का कहना है कि लोगों की मांग पर पहले भी अलग-अलग स्थानों पर तेदुओं को पकडऩे लिए पिंजरा लगाया गया था, परंतु कामयाबी नहीं मिल पाई थी। वहीं, ग्रामीणों की मांग पर दोबारा से पिंजरा लगा दिया जाएगा। उन्होंने लोगों से भी अपील की है कि जंगलों या घासनियों में अकेले जाने से परहेज़ करें। दूसरा पशुधन को भी जंगल में अकेले न छोड़ें।
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इसके अलावा सरोह में भी दो बड़े तेंदुए देखे गए। इस मामले पर चमयाड़ी पंचायत के प्रधान अशोक ठाकुर, सिहाणा पंचायत के प्रधान सुनील कुमार, उपप्रधान मनजीत सिंह, उपप्रधान पवन कुमार, रिशू बनियाल, दिनेश कुमार, रवि ठाकुर, शेर सिंह, कुलदीप सिंह, सतीश कुमार, अजय कुमार सहित चमयाड़ी पंचायत के गांव सुक नेहडा, बसातर, सरोह, डरोह, बरोटी, खेडी, रछोह, सिहाणा पंचायत के गांव कोट, मतोह, घराना, सिहाणा, डोलू सहित अन्य गांववासियों ने वन विभाग से दोनों पंचायतों में अलग-अलग स्थानों पर पिंजरे लगाने की मांग की है।
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इस पर वन विभाग बंगाणा रेंज अधिकारी अंकुश आनंद का कहना है कि लोगों की मांग पर पहले भी अलग-अलग स्थानों पर तेदुओं को पकडऩे लिए पिंजरा लगाया गया था, परंतु कामयाबी नहीं मिल पाई थी। वहीं, ग्रामीणों की मांग पर दोबारा से पिंजरा लगा दिया जाएगा। उन्होंने लोगों से भी अपील की है कि जंगलों या घासनियों में अकेले जाने से परहेज़ करें। दूसरा पशुधन को भी जंगल में अकेले न छोड़ें।
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