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Una News: किसान ने प्रदेश में पहला ऑटोमेटिक साइलेज प्लांट लगाया
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उपमंडल अंब की चूरूडू पंचायत में लगा पहला ऑटोमैटिक साइलेज प्लांट।स्रोत स्वयं
बड़ूही (ऊना)। उपमंडल अंब की चुरूडू पंचायत में किसान संदीप ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश का पहला ऑटोमैटिक साइलेज प्लांट स्थापित किया है। इस पहल से अब प्रदेश के किसान चारे के लिए पंजाब पर निर्भर नहीं रहेंगे।
यह प्लांट आधुनिक तकनीक से लैस है और पशुपालन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखता है। साइलेज बनाने की यह विदेशी तकनीक विशेष है। इसमें सबसे पहले मक्की की कुतराई की जाती है और फिर उसे विशेष लिफाफा बैग में पैक किया जाता है। लगभग एक महीने बाद यह चारा पककर पशुओं के खाने योग्य हो जाता है।
पशु इसे बड़े चाव से खाते हैं, जिससे उनकी सेहत में सुधार होता है और दूध उत्पादन बढ़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार साइलेज हरे चारे को सुरक्षित करने का सबसे अच्छा तरीका है, खासकर ड्राई सीजन में। इसमें पशुओं के लिए आवश्यक पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद रहते हैं। यदि बैग बंद रखा जाए तो यह लंबे समय तक खराब नहीं होता, लेकिन खुलने के 15 दिनों के भीतर इसका उपयोग करना जरूरी है। प्लांट में दो आधुनिक मशीनें लगाई गई हैं, जो मिलकर एक दिन में लगभग दो एकड़ मक्की काटकर पैक करने की क्षमता रखती हैं। इन मशीनों की लागत लगभग 10-12 लाख रुपये बताई जा रही है। अब स्थानीय स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाला साइलेज सस्ती दरों पर उपलब्ध होगा। प्लांट लगाने वाले संदीप ठाकुर का कहना है कि यह पहल प्रदेश के किसानों को आत्मनिर्भर बनाएगी। गांव के अन्य किसानों ने भी इस कदम का स्वागत किया और कहा कि इससे पशुपालन क्षेत्र में क्रांति आएगी।
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चुरूडू के पशु चिकित्सालय अधिकारी डॉ. गोपाल कृष्ण ने बताया कि साइलेज पशुओं के लिए बेहद फायदेमंद है।
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यह प्लांट आधुनिक तकनीक से लैस है और पशुपालन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखता है। साइलेज बनाने की यह विदेशी तकनीक विशेष है। इसमें सबसे पहले मक्की की कुतराई की जाती है और फिर उसे विशेष लिफाफा बैग में पैक किया जाता है। लगभग एक महीने बाद यह चारा पककर पशुओं के खाने योग्य हो जाता है।
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पशु इसे बड़े चाव से खाते हैं, जिससे उनकी सेहत में सुधार होता है और दूध उत्पादन बढ़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार साइलेज हरे चारे को सुरक्षित करने का सबसे अच्छा तरीका है, खासकर ड्राई सीजन में। इसमें पशुओं के लिए आवश्यक पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद रहते हैं। यदि बैग बंद रखा जाए तो यह लंबे समय तक खराब नहीं होता, लेकिन खुलने के 15 दिनों के भीतर इसका उपयोग करना जरूरी है। प्लांट में दो आधुनिक मशीनें लगाई गई हैं, जो मिलकर एक दिन में लगभग दो एकड़ मक्की काटकर पैक करने की क्षमता रखती हैं। इन मशीनों की लागत लगभग 10-12 लाख रुपये बताई जा रही है। अब स्थानीय स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाला साइलेज सस्ती दरों पर उपलब्ध होगा। प्लांट लगाने वाले संदीप ठाकुर का कहना है कि यह पहल प्रदेश के किसानों को आत्मनिर्भर बनाएगी। गांव के अन्य किसानों ने भी इस कदम का स्वागत किया और कहा कि इससे पशुपालन क्षेत्र में क्रांति आएगी।
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चुरूडू के पशु चिकित्सालय अधिकारी डॉ. गोपाल कृष्ण ने बताया कि साइलेज पशुओं के लिए बेहद फायदेमंद है।