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Una News: सीमा पर सीजफायर से परिजनों को मिली राहत, बोले- अब सुकून से सो सकेंगे

Sat, 10 May 2025 08:40 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 10 May 2025 08:40 PM IST
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Family members got relief from ceasefire on the border, said - now they will be able to sleep peacefully
अधिकतर को भारतीय सेना और सेना में कार्यरत अपने बच्चों पर नाज
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संवाद न्यूज एजेंसी

घनारी/नारी (ऊना)। भारत-पाकिस्तान सीमा पर हुए युद्धविराम समझौते से न केवल दोनों देशों के रिश्तों में नई उम्मीद जगी है, बल्कि सीमा पर तैनात जवानों के परिजनों को भी बड़ी राहत मिली है। वर्षों से असुरक्षा और चिंता के साये में जी रहे इन परिवारों का कहना है कि अगर यह शांति कायम रही, तो यह सबसे बड़ी जीत होगी।
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घनारी निवासी सीमा चौधरी ने कहा- हर रात हम दुआ करते हैं कि कोई अनहोनी न हो। मेरा बेटा सीमा पर तैनात है। सीजफायर से ऐसा लगता है जैसे कोई भारी बोझ उतर गया हो। हमारे बच्चे सहित हज़ारों माताओं के बच्चे सीमा पर तैनात हैं, शांति ही हर समस्या का हल है। हमारा बच्चा ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा बना, इसके लिए गर्व है।
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घनारी की संगीता शर्मा ने भी समझौते की सराहना करते हुए कहा कि शांति होगी तो सेना और भी मजबूत होगी। हमारे सैनिक बॉर्डर पर डटे हैं, यह गर्व की बात है लेकिन हम चाहते हैं कि वह सिर्फ दुश्मन ही नहीं, देश के विकास का भी हिस्सा बनें। कहा कि सीमा पर तैनात हजारों जवानों के परिवारों को यह समझौता एक नई उम्मीद की तरह दिख रहा है। अब देखना यह है कि यह युद्धविराम सफलता प्राप्त करता है या नहीं।
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जवान रजत कुमार की माता स्वर्ण देवी ने कहा कि हमारी सीमाएं सुरक्षित है, क्योंकि देश के बेटे वहां खड़े हैं। कहा कि उनका बेटा सीमा पर डटा हुआ है। इसका उन्हें गर्व है। कहा कि किसी भी देश की सुरक्षा के लिए जवानों की जरूरत होती है और उन्हें गर्व है कि उनका बेटा इस सेवा में जुटा है।




जवान शिवम शर्मा की माता ओम कुमारी ने बताया कि जंग के माहौल में घर का बेटा सीमा पर तैनात रहे तो घबराहट तो होती है। रात को नींद भी नहीं आती थी। हर समय बेटे के फोन का इंतजार रहता था। कहा कि जंग खुद में एक समस्या है, यह हल नहीं। अगर ऐसा माहौल बनता है तो जवानों को जान हथेली पर रखकर आगे आना होता है। किसी घर का बेटा तो सीमाओं पर रहेगा ही। इस सेवा में हमारे घर का भी योगदान है और हमें इसपर गर्व है।
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