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Una News: राशन के डिपुओं में जबरदस्ती मक्की का आटा देने पर जताया रोष
Sat, 01 Mar 2025 06:58 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sat, 01 Mar 2025 06:58 AM IST
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50 रुपये प्रति किलो दिया जा रहा है मक्की का आटा
संवाद न्यूज एजेंसी
जोल(ऊना)। खाद्य आपूर्ति विभाग की ओर से सस्ते राशन की दुकानों पर उपलब्ध करवाए गए मक्की के आटा जबरदस्ती कार्ड धारकों को देने पर लोगों ने रोष प्रकट किया है। लोगोंं ने मांग उठाई है कि जिसे इस आटे की जरूरत है, केवल उसी को दिया जाए।
उपभोक्ता रोहित सोनी, गोल्डी दयाल, देस राज शर्मा, यशपाल, बॉबी, तरसेम चंद, भाग सिंह, शिव नाथ, सुभाष लोहिया, हिमांशु परमार ने बताते हुए कहा कि इस बार जब वे सस्ते राशन की दुकान पर राशन लेने गए तो सेल्समैन की ओर से उन्हें मक्की का आटा 50 रुपये प्रति किलो के हिसाब से लेने के लिए कहा गया है। जब कोई मना करता है तो सेल्समैन के की ओर से उसे जबरदस्ती सौंपने का प्रयास किया जा रहा है। जो कि उपभोक्ताओं के साथ पूरी तरह से धक्केशाही है। उपभोक्ताओं ने तो यहां तक कहा कि जिस मक्की के आटे को सरकार 50 रुपये प्रति किलो के हिसाब से उपभोक्ताओं को खरीदने पर बाध्य कर रही है। यदि सरकार इसी मक्की के आटे को उनसे खरीदे तो वे सरकार को यही आटा तीस रुपये किलो के हिसाब से दे सकते हैं। उपभोक्ताओं ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग से इस निर्णय को शीघ्र वापस लेकर लोगों को उनकी जरूरतों के अनुसार बढि़या गुणवत्ता का सामान उचित मूल्य की दुकानों पर उपलब्ध करवाना चाहिए न की ऐसा कोई सामान जो की यहां के लोग खुद काफी मात्रा में पैदा करते हों ।
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संवाद न्यूज एजेंसी
जोल(ऊना)। खाद्य आपूर्ति विभाग की ओर से सस्ते राशन की दुकानों पर उपलब्ध करवाए गए मक्की के आटा जबरदस्ती कार्ड धारकों को देने पर लोगों ने रोष प्रकट किया है। लोगोंं ने मांग उठाई है कि जिसे इस आटे की जरूरत है, केवल उसी को दिया जाए।
उपभोक्ता रोहित सोनी, गोल्डी दयाल, देस राज शर्मा, यशपाल, बॉबी, तरसेम चंद, भाग सिंह, शिव नाथ, सुभाष लोहिया, हिमांशु परमार ने बताते हुए कहा कि इस बार जब वे सस्ते राशन की दुकान पर राशन लेने गए तो सेल्समैन की ओर से उन्हें मक्की का आटा 50 रुपये प्रति किलो के हिसाब से लेने के लिए कहा गया है। जब कोई मना करता है तो सेल्समैन के की ओर से उसे जबरदस्ती सौंपने का प्रयास किया जा रहा है। जो कि उपभोक्ताओं के साथ पूरी तरह से धक्केशाही है। उपभोक्ताओं ने तो यहां तक कहा कि जिस मक्की के आटे को सरकार 50 रुपये प्रति किलो के हिसाब से उपभोक्ताओं को खरीदने पर बाध्य कर रही है। यदि सरकार इसी मक्की के आटे को उनसे खरीदे तो वे सरकार को यही आटा तीस रुपये किलो के हिसाब से दे सकते हैं। उपभोक्ताओं ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग से इस निर्णय को शीघ्र वापस लेकर लोगों को उनकी जरूरतों के अनुसार बढि़या गुणवत्ता का सामान उचित मूल्य की दुकानों पर उपलब्ध करवाना चाहिए न की ऐसा कोई सामान जो की यहां के लोग खुद काफी मात्रा में पैदा करते हों ।
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