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Una News: बिजली महंगी, सब्सिडी बंद, उद्योगों पर बढ़ा आर्थिक संकट
Tue, 23 Jun 2026 05:07 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 23 Jun 2026 05:07 AM IST
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ऊना। प्रदेश सरकार की नीतियां उद्योगों को राहत देने के बजाय अब उन पर आर्थिक बोझ बढ़ाने का कारण बन रही हैं। बिजली दरों में लगातार बढ़ोतरी, सब्सिडी बंद होने और औद्योगिक प्रोत्साहन में कटौती से उद्योग जगत में नाराजगी नजर आने लगी है। जिला उद्योग संघ ऊना ने आरोप लगाया है कि सरकार के फैसलों से प्रदेश में स्थापित उद्योगों का संचालन मुश्किल होता जा रहा है।
जिला उद्योग संघ के महासचिव चमन कपूर ने कहा कि सरकार ने पहले बिजली शुल्क बढ़ाया और जब उद्योगपतियों ने इसका विरोध किया तो सरकार ने कुछ समय बाद राहत देने का वादा किया लेकिन राहत देने के बजाय सरकार ने बिजली के बिलों में नया सेस जोड़ कर उद्योगों पर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है। सरकार ने पर्यावरण और मिल्क सेस जैसे नए शुल्क लगाकर औद्योगिक इकाइयों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव डाल दिया है। इतना ही नहीं, बिजली बोर्ड ने हाल ही में एफपीपीएएस (फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट) सेस लगाना शुरू कर दिया है, जिसके तहत उपभोक्ताओं से करीब 33 पैसे प्रति यूनिट सेस वसूला जा रहा है। उद्योगपतियों का कहना है कि इससे बिजली के बिलों का खर्चा पहले से कहीं अधिक बढ़ेगा जिसके कारण उत्पादन लागत और बढ़ेगी।
उद्योग संघ का कहना है कि पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में बिजली दरें कम हैं जबकि हिमाचल में उद्योगों को प्रति यूनिट अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। इससे उत्पादन लागत बढ़ रही है और प्रदेश के उद्योग प्रतिस्पर्धा में कमजोर पड़ रहे हैं।
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उद्योग संघ ने यह भी कहा कि प्रदेश की औद्योगिक नीति को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा रहा। 31 मार्च 2024 के बाद प्रदेश में स्थापित उद्योगों के लिए सब्सिडी और अन्य प्रोत्साहन लगभग बंद पड़े हैं। नए उद्योग लगाने से पहले निवेशक यह देख रहे हैं कि पहले से लगे उद्योग किन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं और मौजूदा हालात नए निवेश के लिए उत्साहजनक नहीं हैं। उद्योगपतियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द राहत देने वाले फैसले नहीं लिए तो प्रदेश में नए निवेश की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
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जिला उद्योग संघ के महासचिव चमन कपूर ने कहा कि सरकार ने पहले बिजली शुल्क बढ़ाया और जब उद्योगपतियों ने इसका विरोध किया तो सरकार ने कुछ समय बाद राहत देने का वादा किया लेकिन राहत देने के बजाय सरकार ने बिजली के बिलों में नया सेस जोड़ कर उद्योगों पर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है। सरकार ने पर्यावरण और मिल्क सेस जैसे नए शुल्क लगाकर औद्योगिक इकाइयों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव डाल दिया है। इतना ही नहीं, बिजली बोर्ड ने हाल ही में एफपीपीएएस (फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट) सेस लगाना शुरू कर दिया है, जिसके तहत उपभोक्ताओं से करीब 33 पैसे प्रति यूनिट सेस वसूला जा रहा है। उद्योगपतियों का कहना है कि इससे बिजली के बिलों का खर्चा पहले से कहीं अधिक बढ़ेगा जिसके कारण उत्पादन लागत और बढ़ेगी।
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उद्योग संघ का कहना है कि पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में बिजली दरें कम हैं जबकि हिमाचल में उद्योगों को प्रति यूनिट अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। इससे उत्पादन लागत बढ़ रही है और प्रदेश के उद्योग प्रतिस्पर्धा में कमजोर पड़ रहे हैं।
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उद्योग संघ ने यह भी कहा कि प्रदेश की औद्योगिक नीति को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा रहा। 31 मार्च 2024 के बाद प्रदेश में स्थापित उद्योगों के लिए सब्सिडी और अन्य प्रोत्साहन लगभग बंद पड़े हैं। नए उद्योग लगाने से पहले निवेशक यह देख रहे हैं कि पहले से लगे उद्योग किन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं और मौजूदा हालात नए निवेश के लिए उत्साहजनक नहीं हैं। उद्योगपतियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द राहत देने वाले फैसले नहीं लिए तो प्रदेश में नए निवेश की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।