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Una News: निजी स्कूलों में दाखिला राशि पर शिक्षा विभाग की नजर
Sun, 01 Mar 2026 06:47 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sun, 01 Mar 2026 06:47 AM IST
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ऊना। जिले में नए शैक्षणिक सत्र की तैयारियों के बीच निजी स्कूलों द्वारा ली जा रही दाखिला राशि को लेकर शिक्षा विभाग सतर्क हो गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रवेश प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और शिकायत मिलने पर संबंधित स्कूल के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार जिले के निजी स्कूलों में दाखिला शुल्क को लेकर भारी अंतर देखने को मिल रहा है। कुछ स्कूल जहां एक कक्षा का पांच से सात हजार रुपये तक दाखिला राशि ले रहे हैं, वहीं कई शिक्षण संस्थान उसी कक्षा की दोगुनी या उससे भी अधिक राशि वसूल रहे हैं। आलम यह है कि कई स्कूल इससे जुड़े बिलों में भी गड़बड़ी कर रहे हैं। इस असमानता को लेकर अभिभावकों में असंतोष बढ़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि हर वर्ष नए सत्र की शुरुआत में निजी स्कूल अलग-अलग मदों के नाम पर फीस वसूलते हैं, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। खासकर मध्य वर्गीय परिवारों के लिए यह अतिरिक्त राशि चिंता का कारण बन रही है।
अभिभावकों में हरीश कुमार, रमेश शर्मा, सुरेंद्र पाल, अजय कुमार, अरविंद कुमार ने बताया कि शिक्षा विभाग को स्कूलों पर नकेल कसनी चाहिए। स्कूलों को मनमानी से दाखिला राशि बढ़ाने पर कार्रवाई होनी चाहिए। एक ही बोर्ड के तहत आने वाले स्कूलों में दाखिला राशि में भिन्नता कैसे हो सकती है।
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उपनिदेशक जिला उच्च शिक्षा विभाग अनिल कुमार ने बताया कि सभी निजी स्कूलों को निर्धारित नियमों के तहत ही दाखिला शुल्क लेने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। विभाग ने अभिभावकों से भी अपील की है कि यदि किसी स्कूल द्वारा अनावश्यक या अत्यधिक शुल्क की मांग की जाती है तो इसकी सूचना संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी को दें। विभाग आगामी दिनों में निजी स्कूलों की फीस संरचना की जांच भी कर सकता है ताकि प्रवेश प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के अनुरूप सुनिश्चित की जा सके।
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जानकारी के अनुसार जिले के निजी स्कूलों में दाखिला शुल्क को लेकर भारी अंतर देखने को मिल रहा है। कुछ स्कूल जहां एक कक्षा का पांच से सात हजार रुपये तक दाखिला राशि ले रहे हैं, वहीं कई शिक्षण संस्थान उसी कक्षा की दोगुनी या उससे भी अधिक राशि वसूल रहे हैं। आलम यह है कि कई स्कूल इससे जुड़े बिलों में भी गड़बड़ी कर रहे हैं। इस असमानता को लेकर अभिभावकों में असंतोष बढ़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि हर वर्ष नए सत्र की शुरुआत में निजी स्कूल अलग-अलग मदों के नाम पर फीस वसूलते हैं, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। खासकर मध्य वर्गीय परिवारों के लिए यह अतिरिक्त राशि चिंता का कारण बन रही है।
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अभिभावकों में हरीश कुमार, रमेश शर्मा, सुरेंद्र पाल, अजय कुमार, अरविंद कुमार ने बताया कि शिक्षा विभाग को स्कूलों पर नकेल कसनी चाहिए। स्कूलों को मनमानी से दाखिला राशि बढ़ाने पर कार्रवाई होनी चाहिए। एक ही बोर्ड के तहत आने वाले स्कूलों में दाखिला राशि में भिन्नता कैसे हो सकती है।
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उपनिदेशक जिला उच्च शिक्षा विभाग अनिल कुमार ने बताया कि सभी निजी स्कूलों को निर्धारित नियमों के तहत ही दाखिला शुल्क लेने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। विभाग ने अभिभावकों से भी अपील की है कि यदि किसी स्कूल द्वारा अनावश्यक या अत्यधिक शुल्क की मांग की जाती है तो इसकी सूचना संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी को दें। विभाग आगामी दिनों में निजी स्कूलों की फीस संरचना की जांच भी कर सकता है ताकि प्रवेश प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के अनुरूप सुनिश्चित की जा सके।