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पाबंदियों के चलते चिंतपूर्णी श्रावण अष्टमी मेले में कम पहुंचे श्रद्धालु
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कोविड पाबंदियों के चलते श्रद्धालुओं के कम संख्या में पहुंचने पर खाली पड़ा चिंतपूर्णी बाजार
- फोटो : Una
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भरवाईं (ऊना)। पाबंदियों के बीच चिंतपूर्णी में श्रावण अष्टमी मेला सोमवार से शुरू हो गया है। मेले के पहले दिन श्रद्धालुओं की भीड़ कम दिखी। सोमवार शाम पांच बजे तक सात हजार श्रद्धालुुओं में मां चिंतपूर्णी के दर्शन किए। श्रद्धालुओं के कम संख्या में पहुंचने पर दर्शन के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ा। मात्र 10 से 15 मिनट में ही श्रद्धालुुओं ने माता रानी के दर्शन कर लिए।
पाबंदियों के चलते अधिकतर श्रद्धालुओं को पंजाब-हिमाचल सीमा से ही लौटना पड़ा। केवल कोविड आरटीपीसीआर लैब की निगेटिव और डबल डोज रिपोर्ट वाले श्रद्धालु ही चिंतपूर्णी तक पहुंच पाए। ऐसे में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ काफी कम दिखी। मंदिर प्रशासन की ओर से भी प्रबंध पुख्ता दिखे। बाजार में ट्रैफिक समेत अन्य सभी चीजें सामान्य ही रही। जिस कारण श्रद्धालु आरामदायक तरीके से माता रानी के दर्शन कर रहे हैं। कई श्रद्धालु पैदल और साइकिल मां के दर पहुंचे।
कम श्रद्धालु होने के कारण एसओपी का भी सख्ती से पालन करवाया गया। बिना दर्शन पर्ची और मास्क के मंदिर जाने और दर्शन से रोका गया। बीते रविवार को किसी भी प्रकार पाबंदी न होने पर यहां 20 हजार श्रद्धालुओं ने माथा टेका था। जबकि श्रावण अष्टमी मेल के पहले दिन संख्या बेहद कम रही है। इसका मुख्य कारण पाबंदियां लगना ही माना जा रहा है। डीसी राघव शर्मा ने बताया कि बिना रिपोर्ट वाले श्रद्धालुओं को हिमाचल पंजाब सीमा पर लगे बैरियर से लौटाया गया है। जबकि रिपोर्ट वाले श्रद्धालुओं को ही प्रवेश करने दिया गया है। उन्होंने कहा कि सभी नियमों का पालन करें और जरूरी रिपोर्ट लेकर दर्शन करने के लिए पहुंचे।
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बाप-बेटी ने दंडवत होकर मां के दर भरी हाजिरी
चिंतपूर्णी मां के दर आने वाले श्रद्धालुओं की माता रानी के प्रति श्रद्धा भक्ति देखते ही बनती है। सोमवार को दिल्ली से आए बाप और बेटी भरवाईं से चिंतपूर्णी मंदिर तक दंडवत होकर माता रानी के दर्शनों को पहुंचे। श्रद्धालुओं ने बताया कि वह सावन मेले में हर साल ही दंडवत होकर माता रानी के दरबार में माथा टेकने आते हैं। श्रद्धालुओं के साथ आए इनके रिश्तेदार मोहित ने बताया कि माता चिंतपूर्णी सबकी मनोकामना पूरी करती है। यही कारण है कि दूरदराज राज्यों से श्रद्धालु मां के दर आकर शीश झुकाते हैं।
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पाबंदियों के चलते अधिकतर श्रद्धालुओं को पंजाब-हिमाचल सीमा से ही लौटना पड़ा। केवल कोविड आरटीपीसीआर लैब की निगेटिव और डबल डोज रिपोर्ट वाले श्रद्धालु ही चिंतपूर्णी तक पहुंच पाए। ऐसे में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ काफी कम दिखी। मंदिर प्रशासन की ओर से भी प्रबंध पुख्ता दिखे। बाजार में ट्रैफिक समेत अन्य सभी चीजें सामान्य ही रही। जिस कारण श्रद्धालु आरामदायक तरीके से माता रानी के दर्शन कर रहे हैं। कई श्रद्धालु पैदल और साइकिल मां के दर पहुंचे।
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कम श्रद्धालु होने के कारण एसओपी का भी सख्ती से पालन करवाया गया। बिना दर्शन पर्ची और मास्क के मंदिर जाने और दर्शन से रोका गया। बीते रविवार को किसी भी प्रकार पाबंदी न होने पर यहां 20 हजार श्रद्धालुओं ने माथा टेका था। जबकि श्रावण अष्टमी मेल के पहले दिन संख्या बेहद कम रही है। इसका मुख्य कारण पाबंदियां लगना ही माना जा रहा है। डीसी राघव शर्मा ने बताया कि बिना रिपोर्ट वाले श्रद्धालुओं को हिमाचल पंजाब सीमा पर लगे बैरियर से लौटाया गया है। जबकि रिपोर्ट वाले श्रद्धालुओं को ही प्रवेश करने दिया गया है। उन्होंने कहा कि सभी नियमों का पालन करें और जरूरी रिपोर्ट लेकर दर्शन करने के लिए पहुंचे।
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बाप-बेटी ने दंडवत होकर मां के दर भरी हाजिरी
चिंतपूर्णी मां के दर आने वाले श्रद्धालुओं की माता रानी के प्रति श्रद्धा भक्ति देखते ही बनती है। सोमवार को दिल्ली से आए बाप और बेटी भरवाईं से चिंतपूर्णी मंदिर तक दंडवत होकर माता रानी के दर्शनों को पहुंचे। श्रद्धालुओं ने बताया कि वह सावन मेले में हर साल ही दंडवत होकर माता रानी के दरबार में माथा टेकने आते हैं। श्रद्धालुओं के साथ आए इनके रिश्तेदार मोहित ने बताया कि माता चिंतपूर्णी सबकी मनोकामना पूरी करती है। यही कारण है कि दूरदराज राज्यों से श्रद्धालु मां के दर आकर शीश झुकाते हैं।