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प्रशासन ने रामपुर में पकड़ा झोलाछाप डॉक्टर
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ऊना। एसडीएम डॉ. निधि पटेल के नेतृत्व में टीम ने ऊना के साथ लगते रामपुर में क्लीनिक पर छापा मारा। इस दौरान काफी अरसे से बिना लाइसेंस संचालित कर रहे एक झोला छाप चिकित्सक पर कार्रवाई की गई। इस दौरान बीएमओ डॉ. बलराम धीमान तथा ड्रग इंस्पेक्टर विकास ठाकुर भी मौजूद रहे।
एसडीएम ने चिकित्सक से आरएमपी प्रमाण पत्र मांगा। इसे वह मौके पर पेश नहीं कर पाया। इसके अलावा क्लीनिक में काफी मात्रा में रखी गई दवाइयों का भी कोई रिकॉर्ड नहीं दिया गया। इस पर ड्रग्ज एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 के तहत कार्रवाई करते हुए इनके विरुद्ध मामला बनाया गया है। बताया जा रहा है कि उक्त क्लीनिक के डॉक्टर की कोरोना संक्रमित को लेकर भी लापरवाही भी उजागर हुई है।
एसडीएम डॉ. निधि पटेल ने बताया कि ऐसे झोलाछाप डॉक्टर लोगों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, जिन पर प्रशासन कड़ी नजर रख रहा है। आरोप सिद्ध होने पर इस मामले में पांच साल की जेल और एक लाख रुपये तक जुर्माना का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि लोग डॉक्टर को भगवान का दर्जा देते हैं, वहीं ऐसे झोलाछाप डॉक्टर बेकसूर लोगों की जान को खतरे में डाल रहे हैं। इन पर अंकुश लगाना अनिवार्य है। उन्होंने लोगों से भी आह्वान किया है कि कोरोना संक्रमण के दौरान वह ऐसे किसी भी बिना चिकित्सा लाइसेंस दवाइयां दे रहे चिकित्सकों के पास न जाएं। वहीं ड्रग इंस्पेक्टर विकास ठाकुर ने बताया कि इस मामले में क्लीनिकल एस्टब्लिशमेंट एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा रही है।
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दोबारा निरीक्षण कर लिया जाएगा जायजा
डॉक्टर के दोबारा क्लीनिक चलाने को लेकर टीम औचक निरीक्षण कर जायजा लेगी। यदि दोबारा क्लीनिक चलाते हुए पकड़ा जाता है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभागीय टीम इसे लेकर चौकस है कि कहीं दोबारा क्लीनिक चलाया न जाए।
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एसडीएम ने चिकित्सक से आरएमपी प्रमाण पत्र मांगा। इसे वह मौके पर पेश नहीं कर पाया। इसके अलावा क्लीनिक में काफी मात्रा में रखी गई दवाइयों का भी कोई रिकॉर्ड नहीं दिया गया। इस पर ड्रग्ज एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 के तहत कार्रवाई करते हुए इनके विरुद्ध मामला बनाया गया है। बताया जा रहा है कि उक्त क्लीनिक के डॉक्टर की कोरोना संक्रमित को लेकर भी लापरवाही भी उजागर हुई है।
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एसडीएम डॉ. निधि पटेल ने बताया कि ऐसे झोलाछाप डॉक्टर लोगों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, जिन पर प्रशासन कड़ी नजर रख रहा है। आरोप सिद्ध होने पर इस मामले में पांच साल की जेल और एक लाख रुपये तक जुर्माना का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि लोग डॉक्टर को भगवान का दर्जा देते हैं, वहीं ऐसे झोलाछाप डॉक्टर बेकसूर लोगों की जान को खतरे में डाल रहे हैं। इन पर अंकुश लगाना अनिवार्य है। उन्होंने लोगों से भी आह्वान किया है कि कोरोना संक्रमण के दौरान वह ऐसे किसी भी बिना चिकित्सा लाइसेंस दवाइयां दे रहे चिकित्सकों के पास न जाएं। वहीं ड्रग इंस्पेक्टर विकास ठाकुर ने बताया कि इस मामले में क्लीनिकल एस्टब्लिशमेंट एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा रही है।
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दोबारा निरीक्षण कर लिया जाएगा जायजा
डॉक्टर के दोबारा क्लीनिक चलाने को लेकर टीम औचक निरीक्षण कर जायजा लेगी। यदि दोबारा क्लीनिक चलाते हुए पकड़ा जाता है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभागीय टीम इसे लेकर चौकस है कि कहीं दोबारा क्लीनिक चलाया न जाए।