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Una News: माता अनसूया की पावन कथा से भक्त भावविभोर
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कथा में गुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादों के बलिदान को भी किया याद
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ूही (ऊना)। टकारला गांव में श्रीराम कथा के आठवें दिन श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। कथावाचक निखिल महाराज ने माता अनसूया की पावन कथा का विस्तारपूर्वक और भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने माता अनसूया की तपस्या, त्याग और धर्म निष्ठा को अत्यंत श्रद्धा और भाव के साथ प्रस्तुत किया। इसे सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। अपने प्रवचनों में निखिल ने सनातन धर्म की महानता को भी उजागर किया। कहा कि सनातन धर्म सहिष्णुता, सेवा और सत्य जैसे मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित है। जिसने सदियों से मानवता को सन्मार्ग दिखाया है। यह भी कहा कि यह धर्म केवल एक पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक उच्चतम शैली है। उन्होंने अपने वक्तव्य में गुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादों के बलिदान को भी श्रद्धा से याद किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार छोटे-छोटे बालकों ने धर्म की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति दी परंतु अपने सिद्धांतों से विचलित नहीं हुए। उन्होंने अमानवीय कष्टों जैसे दीवार में जिंदा चिनवा दिए जाने को सहते हुए भी धर्म नहीं छोड़ा। यह सनातन परंपरा की अडिग निष्ठा और आत्मबल का जीवंत उदाहरण है। निखिल महाराज ने श्रद्धालुओं को सनातन धर्म की मर्यादा अनुसार जीवन जीने की प्रेरणा दी और सत्य, सेवा तथा सदाचार को अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया। कथा स्थल पर भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जो महाराज के प्रवचनों से प्रेरित होकर धर्म मार्ग पर चलने का संकल्प लेते दिखाई दिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ूही (ऊना)। टकारला गांव में श्रीराम कथा के आठवें दिन श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। कथावाचक निखिल महाराज ने माता अनसूया की पावन कथा का विस्तारपूर्वक और भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने माता अनसूया की तपस्या, त्याग और धर्म निष्ठा को अत्यंत श्रद्धा और भाव के साथ प्रस्तुत किया। इसे सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। अपने प्रवचनों में निखिल ने सनातन धर्म की महानता को भी उजागर किया। कहा कि सनातन धर्म सहिष्णुता, सेवा और सत्य जैसे मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित है। जिसने सदियों से मानवता को सन्मार्ग दिखाया है। यह भी कहा कि यह धर्म केवल एक पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक उच्चतम शैली है। उन्होंने अपने वक्तव्य में गुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादों के बलिदान को भी श्रद्धा से याद किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार छोटे-छोटे बालकों ने धर्म की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति दी परंतु अपने सिद्धांतों से विचलित नहीं हुए। उन्होंने अमानवीय कष्टों जैसे दीवार में जिंदा चिनवा दिए जाने को सहते हुए भी धर्म नहीं छोड़ा। यह सनातन परंपरा की अडिग निष्ठा और आत्मबल का जीवंत उदाहरण है। निखिल महाराज ने श्रद्धालुओं को सनातन धर्म की मर्यादा अनुसार जीवन जीने की प्रेरणा दी और सत्य, सेवा तथा सदाचार को अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया। कथा स्थल पर भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जो महाराज के प्रवचनों से प्रेरित होकर धर्म मार्ग पर चलने का संकल्प लेते दिखाई दिए।