{"_id":"6a2b01cee8685970dc00cc34","slug":"despite-collecting-milk-cess-farmers-are-not-getting-the-declared-msp-aujla-una-news-c-93-1-ssml1048-194801-2026-06-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"मिल्क सेस वसूलने के बावजूद किसानों को नहीं मिल रहा घोषित एमएसपी : औजला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मिल्क सेस वसूलने के बावजूद किसानों को नहीं मिल रहा घोषित एमएसपी : औजला
Fri, 12 Jun 2026 12:13 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Fri, 12 Jun 2026 12:13 AM IST
विज्ञापन
हरोली (ऊना)। हरोली विधानसभा क्षेत्र के तहत ग्राम भदौड़ी निवासी जनजातीय विकास विभाग हरोली के सदस्य, पूर्व प्रधान एवं पूर्व बीडीसी सदस्य प्रेम सिंह औजला ने प्रदेश सरकार की दूध खरीद नीति और मिल्क सेस को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। वीरवार को उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, पशुपालन मंत्री चंद्र कुमार और मिल्कफेड के प्रबंध निदेशक को पत्र भेजकर प्रदेश के लाखों दूध उत्पादक किसानों की बदहाल स्थिति का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।
औजला ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने चुनावों से पहले गाय का दूध 80 रुपये और भैंस का दूध 100 रुपये प्रति किलो खरीदने का वादा किया था। इसके बाद सरकार ने हालिया बजट में गाय के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 61 रुपये प्रति किलो घोषित किया लेकिन धरातल पर किसानों को अब भी मात्र 40 रुपये प्रति किलो के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण स्तर की डेयरियों में 4 फैट और 8.50 एसएनएफ वाले उच्च गुणवत्ता के दूध का भी उचित मूल्य नहीं मिल रहा।
प्रेम सिंह औजला ने कहा कि जनता से दूध के नाम पर लगातार मिल्क सेस वसूला जा रहा लेकिन इसका लाभ सीधे तौर पर किसानों तक नहीं पहुंच रहा। उन्होंने कहा कि पशुपालन का कारोबार लगातार घाटे का सौदा बनता जा रहा है। पशु आहार, खल, तारामीरा, मिनरल मिक्सचर और दवाइयों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं जबकि दूध के दाम लंबे समय से स्थिर हैं। इससे पशुपालकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि लोग अपने दुधारू पशु औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर हो रहे हैं।
विज्ञापन
उन्होंने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई। औजला ने कहा कि वह इससे पहले भी मुख्यमंत्री और पशुपालन मंत्री के समक्ष यह मामला उठा चुके हैं। औजला ने सरकार से मांग की कि बजट में घोषित 61 रुपये प्रति किलो की एमएसपी दर को तुरंत प्रभाव से ग्रामीण स्तर की डेयरियों में लागू करवाया जाए।
विज्ञापन
औजला ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने चुनावों से पहले गाय का दूध 80 रुपये और भैंस का दूध 100 रुपये प्रति किलो खरीदने का वादा किया था। इसके बाद सरकार ने हालिया बजट में गाय के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 61 रुपये प्रति किलो घोषित किया लेकिन धरातल पर किसानों को अब भी मात्र 40 रुपये प्रति किलो के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण स्तर की डेयरियों में 4 फैट और 8.50 एसएनएफ वाले उच्च गुणवत्ता के दूध का भी उचित मूल्य नहीं मिल रहा।
विज्ञापन
प्रेम सिंह औजला ने कहा कि जनता से दूध के नाम पर लगातार मिल्क सेस वसूला जा रहा लेकिन इसका लाभ सीधे तौर पर किसानों तक नहीं पहुंच रहा। उन्होंने कहा कि पशुपालन का कारोबार लगातार घाटे का सौदा बनता जा रहा है। पशु आहार, खल, तारामीरा, मिनरल मिक्सचर और दवाइयों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं जबकि दूध के दाम लंबे समय से स्थिर हैं। इससे पशुपालकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि लोग अपने दुधारू पशु औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर हो रहे हैं।
विज्ञापन
उन्होंने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई। औजला ने कहा कि वह इससे पहले भी मुख्यमंत्री और पशुपालन मंत्री के समक्ष यह मामला उठा चुके हैं। औजला ने सरकार से मांग की कि बजट में घोषित 61 रुपये प्रति किलो की एमएसपी दर को तुरंत प्रभाव से ग्रामीण स्तर की डेयरियों में लागू करवाया जाए।