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Una News: जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों का रिकाॅर्ड पंचायतों में रखने की उठाई मांग

Thu, 05 Dec 2024 06:15 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 05 Dec 2024 06:15 PM IST
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Demand raised to keep records of birth and death certificates in Panchayats
सीएमओ कार्यालय ऊना जाने में ग्रामीणों को हो रही परेशानी
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संवाद न्यूज एजेंसी
घनारी (ऊना)। ग्रामीण क्षेत्रों में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों की सुविधा को पंचायत स्तर पर ही रखे जाने की मांग जोर पकड़ रही है। वर्तमान में यह रिकॉर्ड क्षेत्र की सभी पंचायतें तीन से चार साल तक अपने कार्यालय में रखती हैं। उसके बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय ऊना में जमा करवा देती हैं। इससे ग्रामीणों को जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र हासिल करने में समय और पैसे की बर्बादी झेलनी पड़ती है। हाल ही में दियोली निवासी सुषमा देवी का मामला प्रकाश में आया है। जिन्होंने अपने आधार कार्ड में जन्म तिथि सुधारने की कोशिश की। सुषमा देवी का जन्म 1964 में पंजावर में हुआ था और शादी के बाद वह दियोली आ गईं। आधार कार्ड बनवाते समय उनकी जन्म तिथि गलत दर्ज हो गई। जिसे ठीक कराने के लिए उन्हें सीएमओ कार्यालय का रुख करना पड़ा। लेकिन, कार्यालय ने यह कहते हुए असमर्थता जताई कि उनके पास 1963 से 1965 के बीच का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। यह पुष्टि सीएमओ कार्यालय ने लिखित में की है। सुषमा देवी ने बुधवार को सीएमओ कार्यालय की ओर से ज़ारी लिखित नोट और प्राथमिक पाठशाला पंजावर की ओर से ज़ारी स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट दिखाते हुए बताया कि उन्होंने पंजावर स्थित अपने स्कूल से स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट प्राप्त किया। इसमें उनकी सही जन्म तिथि दर्ज है। हालांकि, लोक मित्र केंद्र और आधार सेंटर इसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं। अगर मुझे स्कूल प्रमाण पत्र से अपनी जन्म तिथि साबित करनी पड़ी तो 1963 से 1965 के दौरान जन्मे उन अनपढ़ लोगों का क्या होगा, जिनके पास स्कूल जाने का रिकॉर्ड नहीं है। सुषमा देवी ने जिलाधीश ऊना से आग्रह किया है कि उनके स्कूल प्रमाण पत्र को आधार कार्ड सुधार के लिए मान्यता दी जाए। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि जन्म और मृत्यु का रिकॉर्ड पूर्व की भांति पंचायतों में ही रखा जाए, ताकि ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर यह सुविधा मिल सके।
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