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Una News: मजदूर, किसान विरोधी नीतियों को तुरंत वापस लेने की मांग
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इंटक ने जिलाधीश के माध्यम से राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। देशभर में बुधवार को श्रमिक संगठनों की ओर से राष्ट्रव्यापी हड़ताल के समर्थन में ऊना के मजदूर संगठनों ने राष्ट्रपति को जिलाधीश के माध्यम से ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में श्रमिकों ने केंद्र सरकार से पिछले 11 वर्षों से मजदूर, किसान और आम जनता विरोधी नीतियों को तुरंत वापस लेने की मांग की है। मांग की गई है कि चारों श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को रद्द किया जाए। न्यूनतम मजदूरी 26,000 रुपये प्रति माह निर्धारित की जाए। आंगनबाड़ी, आशा और मिड-डे मील वर्करों को श्रमिक का दर्जा दिया जाए और मनरेगा में 120 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया जाए।
संगठनों ने मांग की है कि संविदा, आउटसोर्सिंग, ठेका, गेस्ट टीचर, आशा, आंगनबाड़ी, मिड-डे मील, सफाई कर्मचारी सहित असंगठित क्षेत्र के सभी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ दिया जाए। इसके अलावा सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण पर रोक लगाने, बढ़ती महंगाई को रोकने और आवश्यक वस्तुओं के दाम नियंत्रित करने की भी मांग की गई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। देशभर में बुधवार को श्रमिक संगठनों की ओर से राष्ट्रव्यापी हड़ताल के समर्थन में ऊना के मजदूर संगठनों ने राष्ट्रपति को जिलाधीश के माध्यम से ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में श्रमिकों ने केंद्र सरकार से पिछले 11 वर्षों से मजदूर, किसान और आम जनता विरोधी नीतियों को तुरंत वापस लेने की मांग की है। मांग की गई है कि चारों श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को रद्द किया जाए। न्यूनतम मजदूरी 26,000 रुपये प्रति माह निर्धारित की जाए। आंगनबाड़ी, आशा और मिड-डे मील वर्करों को श्रमिक का दर्जा दिया जाए और मनरेगा में 120 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया जाए।
संगठनों ने मांग की है कि संविदा, आउटसोर्सिंग, ठेका, गेस्ट टीचर, आशा, आंगनबाड़ी, मिड-डे मील, सफाई कर्मचारी सहित असंगठित क्षेत्र के सभी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ दिया जाए। इसके अलावा सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण पर रोक लगाने, बढ़ती महंगाई को रोकने और आवश्यक वस्तुओं के दाम नियंत्रित करने की भी मांग की गई।
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