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Una News: आलू की देरी से बिजाई का दाम पर पड़ेगा असर, किसान चिंतित
Sun, 08 Sep 2024 02:22 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sun, 08 Sep 2024 02:22 AM IST
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ऊना। आलू के बड़े उत्पादक जिलों में शुमार ऊना जिले में खराब मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अमूमन 25 अगस्त से शुरू होने वाली आलू की बिजाई अभी तक खुलकर शुरू नहीं हो पाई है। इसका कारण लगातार हो रही बारिश है।
खेतों में नमी की मात्रा अधिक है, जिस कारण बिजाई कर पाना संभव नहीं। सीजन में 7000 क्विंटल आलू का उत्पादन होता है। हालांकि जहां रेतीली भूमि है, वहां बारिश हटते ही बिजाई हो रही है। बिजाई में हो रही देरी से किसानों को चिंता यह है कि फसल देरी से तैयार होगी, जिसका सीधा असर इसके दामों पर होगा।
जानकारी के अनुसार जिला में 2500 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर आलू की दो माह वाली फसल तैयार होती है। यह फसल दो माह में अगस्त के अंतिम दिनों से लेकर नवंबर माह के शुरुआती हफ्तों के भीतर तैयार होती है। ऊना में तैयार होने वाला आलू मंडियों में सबसे पहले पहुंचने वाली नई फसल होती है, जिसे अच्छे दाम मिलते हैं। इसके 20 दिन बाद पंजाब और उत्तर प्रदेश से आलू आना शुरू हो जाता है। अधिक आमद होने के चलते दाम गिरने लगते हैं। ऐसे में ऊना के किसानों का प्रयास रहता है कि आलू की बिजाई अगस्त माह के अंतिम दिनों में हो जाए, ताकि पंजाब और उत्तर प्रदेश से पहले आलू मंडियों में पहुंचाकर अच्छे दाम लिए जा सकें, लेकिन इस बार बिजाई में 10 दिन की देरी हो चुकी है। कुछ किसानों ने रेतीले खेतों में शनिवार को मौसम साफ होते ही दोबारा बिजाई शुरू की, लेकिन अधिकतर किसान खेतों में नमी सूखने का इंतजार कर रहे हैं।
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सोमभद्रा नदी के किनारे आलू के बड़े उत्पादक
जिले में सोमभद्रा नदी के आसपास आलू की बिजाई सबसे अधिक होती है। इन इलाकों में सिंचाई सुविधा आसानी से मिल जाती है। किसानों को अपने ट्यूबवेल लगाने में भी अधिक खर्च नहीं करना पड़ता। वहीं, इस क्षेत्र में सबसे अधिक ठंड पड़ती है। सर्द मौसम में आलू का उत्पादन अधिक होता है। किसान विनोद कुमार, रामपाल, अमृत लाल, हरबंस लाल ने कहा कि इस बार आलू की बिजाई करने का मौका नहीं मिल रहा। कुछ देर मौसम साफ होता है, उसके बाद दोबारा बारिश हो जाती है। कहा कि अगर बिजाई के तुरंत बाद बारिश हो जाए, तो भी उत्पादन अच्छा नहीं हो पाता, इसलिए मौसम पूरी तरह साफ होने का इंतजार है। उन्होंने कहा कि देरी से हुई बिजाई को कई बार कम दाम मिलते हैं, इसी की उन्हें चिंता सता रही है।
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Iवर्तमान समय आलू की बिजाई के लिए उपयुक्त है। हालांकि खराब मौसम बिजाई में विघ्न डाल रहा है। जमीन में अधिक नमी से बिजाई करना मुश्किल होती है और उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है। उम्मीद करते हैं कि कुछ दिन में मौसम साफ होगा, जिससे बिजाई पूरी हो पाए। I
डॉ. कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग
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खेतों में नमी की मात्रा अधिक है, जिस कारण बिजाई कर पाना संभव नहीं। सीजन में 7000 क्विंटल आलू का उत्पादन होता है। हालांकि जहां रेतीली भूमि है, वहां बारिश हटते ही बिजाई हो रही है। बिजाई में हो रही देरी से किसानों को चिंता यह है कि फसल देरी से तैयार होगी, जिसका सीधा असर इसके दामों पर होगा।
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जानकारी के अनुसार जिला में 2500 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर आलू की दो माह वाली फसल तैयार होती है। यह फसल दो माह में अगस्त के अंतिम दिनों से लेकर नवंबर माह के शुरुआती हफ्तों के भीतर तैयार होती है। ऊना में तैयार होने वाला आलू मंडियों में सबसे पहले पहुंचने वाली नई फसल होती है, जिसे अच्छे दाम मिलते हैं। इसके 20 दिन बाद पंजाब और उत्तर प्रदेश से आलू आना शुरू हो जाता है। अधिक आमद होने के चलते दाम गिरने लगते हैं। ऐसे में ऊना के किसानों का प्रयास रहता है कि आलू की बिजाई अगस्त माह के अंतिम दिनों में हो जाए, ताकि पंजाब और उत्तर प्रदेश से पहले आलू मंडियों में पहुंचाकर अच्छे दाम लिए जा सकें, लेकिन इस बार बिजाई में 10 दिन की देरी हो चुकी है। कुछ किसानों ने रेतीले खेतों में शनिवार को मौसम साफ होते ही दोबारा बिजाई शुरू की, लेकिन अधिकतर किसान खेतों में नमी सूखने का इंतजार कर रहे हैं।
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सोमभद्रा नदी के किनारे आलू के बड़े उत्पादक
जिले में सोमभद्रा नदी के आसपास आलू की बिजाई सबसे अधिक होती है। इन इलाकों में सिंचाई सुविधा आसानी से मिल जाती है। किसानों को अपने ट्यूबवेल लगाने में भी अधिक खर्च नहीं करना पड़ता। वहीं, इस क्षेत्र में सबसे अधिक ठंड पड़ती है। सर्द मौसम में आलू का उत्पादन अधिक होता है। किसान विनोद कुमार, रामपाल, अमृत लाल, हरबंस लाल ने कहा कि इस बार आलू की बिजाई करने का मौका नहीं मिल रहा। कुछ देर मौसम साफ होता है, उसके बाद दोबारा बारिश हो जाती है। कहा कि अगर बिजाई के तुरंत बाद बारिश हो जाए, तो भी उत्पादन अच्छा नहीं हो पाता, इसलिए मौसम पूरी तरह साफ होने का इंतजार है। उन्होंने कहा कि देरी से हुई बिजाई को कई बार कम दाम मिलते हैं, इसी की उन्हें चिंता सता रही है।
Iवर्तमान समय आलू की बिजाई के लिए उपयुक्त है। हालांकि खराब मौसम बिजाई में विघ्न डाल रहा है। जमीन में अधिक नमी से बिजाई करना मुश्किल होती है और उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है। उम्मीद करते हैं कि कुछ दिन में मौसम साफ होगा, जिससे बिजाई पूरी हो पाए। I
डॉ. कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग