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पहाड़ों में मौत के सफर पर हिमाचल पुलिस मौन
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शशिभूषण पुरोहित
ऊना। हिमाचल की सर्पीली सड़कों में आस्था के नाम पर चल रहे मौत के सफर पर हिमाचल पुलिस और सरकार मौन है। सीमांत राज्य पंजाब से ट्रकों, ट्रैक्टरों और टेंपो को डबल डैकर बनाकर आ रहे श्रद्धालु हादसों का शिकार होकर बेमौत मारे जा रहे हैं।
इसके बावजूद हैरत है कि हिमाचल सरकार और प्रदेश पुलिस इस पर कुछ भी नहीं कर पा रही है। बैरियर पर महज चालान काटकर ऐसे वाहनों में यात्रियों को मौत के मुंह में धकेल दिया जा रहा है। प्रदेश पुलिस के पास ऐसे वाहनों को रोकने के लिए न तो कोई ठोस नीति है और न ही कोई प्रावधान।
करीब डेढ़ साल पहले पुलिस ने बैरियर पर ही ऐसे वाहनों को रोकने की कवायद शुरू की थी। इसके बाद यात्रियों ने निजी और सरकारी बसों में आगे का सफर तय किया। कमोबेश इससे हादसों में कमी भी आई। लेकिन सरकारी स्तर पर ऐसे यात्रियों के वैकल्पिक परिवहन को लेकर आज तक ठोस नीति नहीं बन पाई। इससे हिमाचल पुलिस भी कार्रवाई को लेकर बेबस है।
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जानकारों का कहना है कि हिमाचल पुलिस अथवा प्रदेश सरकार के स्तर पर पंजाब से इस मामले में किसी ठोस परिवहन नीति पर विचार हो तभी मालवाहक वाहनों में सफर रोका जा सकता है। गौरतलब है कि बीते रोज ऐसे ही एक हादसे में डेढ़ वर्षीय बच्चे की मौत और 19 लोग घायल हुए थे। एक दिन बाद शनिवार को फिर से एक हादसे में 12 लोग घायल हो गए। पंजाब के साथ लगते प्रदेश के जिलों में यह समस्या बढ़ती जा रही है। ऊना के वनखंडी, बंगाणा, मैड़ी, पीरनिगाह एवं हमीरपुर के शाहतलाई में ऐसे वाहनों में आने वाले दर्जनों लोग मौत का शिकार हो चुके हैं, जबकि कई अपाहिज हो चुके हैं।
एसपी दिवाकर शर्मा का भी मानना है कि मालवाहक वाहनों में आ रहे श्रद्धालुओं को रोकने के लिए पंजाब के पुलिस अधिकारियों से बात करने की आवश्यकता है। एसपी ने कहा कि नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ पुलिस अपने स्तर पर सख्त कार्रवाई कर रही है।
सरकार को प्रस्ताव भेजेगी पुलिस : डीजीपी
हिमाचल प्रदेश पुलिस महानिदेशक एसआर मरडी का कहना है कि जहां तक पुलिस का सवाल है, ऐसे वाहनों के चालान काटे जा रहे हैं। लेकिन परिवहन को लेकर सरकारी स्तर पर ही कुछ किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बढ़ते हादसों को देखते हुए हिमाचल पुलिस सरकार के समक्ष प्रस्ताव रखेगी। ताकि पंजाब सरकार से इस संबंध में किसी ठोस परिवहन नीति पर बात हो सके।
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ऊना। हिमाचल की सर्पीली सड़कों में आस्था के नाम पर चल रहे मौत के सफर पर हिमाचल पुलिस और सरकार मौन है। सीमांत राज्य पंजाब से ट्रकों, ट्रैक्टरों और टेंपो को डबल डैकर बनाकर आ रहे श्रद्धालु हादसों का शिकार होकर बेमौत मारे जा रहे हैं।
इसके बावजूद हैरत है कि हिमाचल सरकार और प्रदेश पुलिस इस पर कुछ भी नहीं कर पा रही है। बैरियर पर महज चालान काटकर ऐसे वाहनों में यात्रियों को मौत के मुंह में धकेल दिया जा रहा है। प्रदेश पुलिस के पास ऐसे वाहनों को रोकने के लिए न तो कोई ठोस नीति है और न ही कोई प्रावधान।
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करीब डेढ़ साल पहले पुलिस ने बैरियर पर ही ऐसे वाहनों को रोकने की कवायद शुरू की थी। इसके बाद यात्रियों ने निजी और सरकारी बसों में आगे का सफर तय किया। कमोबेश इससे हादसों में कमी भी आई। लेकिन सरकारी स्तर पर ऐसे यात्रियों के वैकल्पिक परिवहन को लेकर आज तक ठोस नीति नहीं बन पाई। इससे हिमाचल पुलिस भी कार्रवाई को लेकर बेबस है।
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जानकारों का कहना है कि हिमाचल पुलिस अथवा प्रदेश सरकार के स्तर पर पंजाब से इस मामले में किसी ठोस परिवहन नीति पर विचार हो तभी मालवाहक वाहनों में सफर रोका जा सकता है। गौरतलब है कि बीते रोज ऐसे ही एक हादसे में डेढ़ वर्षीय बच्चे की मौत और 19 लोग घायल हुए थे। एक दिन बाद शनिवार को फिर से एक हादसे में 12 लोग घायल हो गए। पंजाब के साथ लगते प्रदेश के जिलों में यह समस्या बढ़ती जा रही है। ऊना के वनखंडी, बंगाणा, मैड़ी, पीरनिगाह एवं हमीरपुर के शाहतलाई में ऐसे वाहनों में आने वाले दर्जनों लोग मौत का शिकार हो चुके हैं, जबकि कई अपाहिज हो चुके हैं।
एसपी दिवाकर शर्मा का भी मानना है कि मालवाहक वाहनों में आ रहे श्रद्धालुओं को रोकने के लिए पंजाब के पुलिस अधिकारियों से बात करने की आवश्यकता है। एसपी ने कहा कि नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ पुलिस अपने स्तर पर सख्त कार्रवाई कर रही है।
सरकार को प्रस्ताव भेजेगी पुलिस : डीजीपी
हिमाचल प्रदेश पुलिस महानिदेशक एसआर मरडी का कहना है कि जहां तक पुलिस का सवाल है, ऐसे वाहनों के चालान काटे जा रहे हैं। लेकिन परिवहन को लेकर सरकारी स्तर पर ही कुछ किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बढ़ते हादसों को देखते हुए हिमाचल पुलिस सरकार के समक्ष प्रस्ताव रखेगी। ताकि पंजाब सरकार से इस संबंध में किसी ठोस परिवहन नीति पर बात हो सके।