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सुलग रहे जंगल मासूमों के लिए बने खतरा
Updated Fri, 25 May 2018 07:16 PM IST
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सुलग रहे जंगल मासूमों के लिए बने खतरा
तपती गर्मी में छह किलोमीटर चलकर स्कूल पहुंच रहे बच्चे
अभिभावकों ने की स्कूलों में अवकाश की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
अंब (ऊना)।
चिलचिलाती धूप, सांस सुखा देने वाली लू और पीठ पर बस्ता लादे दो से छह किलोमीटर तक का सफर। उपमंडल अंब के तहत पहाड़ी क्षेत्र के बच्चों के लिए सुबह 8:00 बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक का स्कूल का समय एक सजा बन गया है। उस पर पिछले सात दिनों से सुलग रहे अंब के जंगल इन मासूमों के लिए भारी खतरा बन गए हैं। क्षेत्र के तहत राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला ज्वार, दलोह, राजकीय उच्च पाठशाला राजपुर जस्वां, घगोह, प्राथमिक पाठशाला मसलाना सहित पहाड़ी क्षेत्र में ऐसे दर्जनों सरकारी स्कूल हैं जहां औसत और गरीब घरों के बच्चे दो से लेकर छह किलोमीटर दूरी तक पैदल चलकर स्कूल पहुंचते हैं। दोपहर के डेढ़ बजे स्कूल में छुट्टी के समय गर्मी अपने चरम पर होती है। जिन लोगों के पास अपने वाहन हैं, वे तो बच्चों को स्कूल से लेकर आसानी से घर तक पहुंच सकते हैं। हालांकि, ज्वार सीसे स्कूल जैसे स्कूलों में जहां छह किलोमीटर दूरी का सफर कर बच्चे वन क्षेत्र पार कर स्कूल पहुंचते हैं। साथ ही गुलिया जैसे क्षेत्र से प्राथमिक पाठशाला मसलाना में पढ़ने वाले बच्चे दो-तीन किलोमीटर का सफर कर पाठशाला पहुंचते हैं। उनके लिए यह समयसारिणी किसी सजा से कम नहीं है। ऊपर से पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र के वनों में अचानक आग के गुबार निकलना आम सी बात है। ऐसे में इन क्षेत्रों से आनेवाले बच्चों की सुरक्षा रामभरोसे है। स्थानीय लोगों में अनिल कुमार, संजीव कुमार सोनी, गुरदेव सिंह, सरिता देवी, चैंचला देवी, अशवनी कुमार, सुरिंद्र कुमार, आशीष कुमार, सतपाल सिंह, दविंद्री देवी ने प्रशासन से मांग की है कि गर्मी, लू और वनों में आग को देखते हुए कुछ दिनों के लिए स्कूलों में अवकाश किया जाए। या फिर, स्कूलों का समय सुबह 10 बजे से शाम चार बजे किया जाए जिससे बच्चों को भीषण गर्मी से निजात मिल सके।
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तपती गर्मी में छह किलोमीटर चलकर स्कूल पहुंच रहे बच्चे
अभिभावकों ने की स्कूलों में अवकाश की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
अंब (ऊना)।
चिलचिलाती धूप, सांस सुखा देने वाली लू और पीठ पर बस्ता लादे दो से छह किलोमीटर तक का सफर। उपमंडल अंब के तहत पहाड़ी क्षेत्र के बच्चों के लिए सुबह 8:00 बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक का स्कूल का समय एक सजा बन गया है। उस पर पिछले सात दिनों से सुलग रहे अंब के जंगल इन मासूमों के लिए भारी खतरा बन गए हैं। क्षेत्र के तहत राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला ज्वार, दलोह, राजकीय उच्च पाठशाला राजपुर जस्वां, घगोह, प्राथमिक पाठशाला मसलाना सहित पहाड़ी क्षेत्र में ऐसे दर्जनों सरकारी स्कूल हैं जहां औसत और गरीब घरों के बच्चे दो से लेकर छह किलोमीटर दूरी तक पैदल चलकर स्कूल पहुंचते हैं। दोपहर के डेढ़ बजे स्कूल में छुट्टी के समय गर्मी अपने चरम पर होती है। जिन लोगों के पास अपने वाहन हैं, वे तो बच्चों को स्कूल से लेकर आसानी से घर तक पहुंच सकते हैं। हालांकि, ज्वार सीसे स्कूल जैसे स्कूलों में जहां छह किलोमीटर दूरी का सफर कर बच्चे वन क्षेत्र पार कर स्कूल पहुंचते हैं। साथ ही गुलिया जैसे क्षेत्र से प्राथमिक पाठशाला मसलाना में पढ़ने वाले बच्चे दो-तीन किलोमीटर का सफर कर पाठशाला पहुंचते हैं। उनके लिए यह समयसारिणी किसी सजा से कम नहीं है। ऊपर से पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र के वनों में अचानक आग के गुबार निकलना आम सी बात है। ऐसे में इन क्षेत्रों से आनेवाले बच्चों की सुरक्षा रामभरोसे है। स्थानीय लोगों में अनिल कुमार, संजीव कुमार सोनी, गुरदेव सिंह, सरिता देवी, चैंचला देवी, अशवनी कुमार, सुरिंद्र कुमार, आशीष कुमार, सतपाल सिंह, दविंद्री देवी ने प्रशासन से मांग की है कि गर्मी, लू और वनों में आग को देखते हुए कुछ दिनों के लिए स्कूलों में अवकाश किया जाए। या फिर, स्कूलों का समय सुबह 10 बजे से शाम चार बजे किया जाए जिससे बच्चों को भीषण गर्मी से निजात मिल सके।