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दो दिन बाद उठनी थी बेटी की डोली, पिता की मौत
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विवेक शर्मा
गगरेट (ऊना) बेटी की विदाई पर गाया जाने वाला लोक गीत मैनूं रख ले दो दिन होर ओ बाबुला न केवल पिता और बेटी के प्रेम को दर्शाता है बल्कि बेटी भी अपने परिवार को छोड़ पराए घर जाने से पहले पिता से दो दिन और अपने घर रखने की गुहार लगाती है। लेकिन यहां बाबुल ही बेटी की विदाई से दो दिन पहले सभी को अलविदा कह कभी वापस न आने वाले सफर पर निकल गया।
गगरेट के जाडला कोडी निवासी गुरपाल की अकस्मात मौत से घर में न केवल मातम पसर गया बल्कि बेटी की शादी की तैयारियों में जुटे परिवार पर दुखों का पहाड़ भी टूट पड़ा। पांच बेटियों के पिता गुरपाल चाय-समोसे की दुकान चला कर किसी तरह बेटियों के हाथ पीले कर जिम्मेवारी से धीरे-धीरे मुक्त हो रहे थे। परंतु भगवान ने उसके भाग्य में कुछ और ही लिखा था। बताया जा रहा है कि गुरपाल अपनी पांच बेटियों में से तीन की शादी कर चुका था।
19 फरवरी को गुरपाल की चौथी बेटी की शादी तय थी। गुरपाल की मौत से घर में बेटी की खुशियों का माहौल मातम में तबदील हो गया। किसी को क्या पता था कि बेटी की विदाई से पहले ही गुरपाल दुनिया से ही विदा हो जाएगा। बेटी की शादी की तैयारियों में जुटे परिजनों पर इस प्रकार दुखों का पहाड़ टूटने से गांव में हर कोई गमगीन है।
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गगरेट (ऊना) बेटी की विदाई पर गाया जाने वाला लोक गीत मैनूं रख ले दो दिन होर ओ बाबुला न केवल पिता और बेटी के प्रेम को दर्शाता है बल्कि बेटी भी अपने परिवार को छोड़ पराए घर जाने से पहले पिता से दो दिन और अपने घर रखने की गुहार लगाती है। लेकिन यहां बाबुल ही बेटी की विदाई से दो दिन पहले सभी को अलविदा कह कभी वापस न आने वाले सफर पर निकल गया।
गगरेट के जाडला कोडी निवासी गुरपाल की अकस्मात मौत से घर में न केवल मातम पसर गया बल्कि बेटी की शादी की तैयारियों में जुटे परिवार पर दुखों का पहाड़ भी टूट पड़ा। पांच बेटियों के पिता गुरपाल चाय-समोसे की दुकान चला कर किसी तरह बेटियों के हाथ पीले कर जिम्मेवारी से धीरे-धीरे मुक्त हो रहे थे। परंतु भगवान ने उसके भाग्य में कुछ और ही लिखा था। बताया जा रहा है कि गुरपाल अपनी पांच बेटियों में से तीन की शादी कर चुका था।
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19 फरवरी को गुरपाल की चौथी बेटी की शादी तय थी। गुरपाल की मौत से घर में बेटी की खुशियों का माहौल मातम में तबदील हो गया। किसी को क्या पता था कि बेटी की विदाई से पहले ही गुरपाल दुनिया से ही विदा हो जाएगा। बेटी की शादी की तैयारियों में जुटे परिजनों पर इस प्रकार दुखों का पहाड़ टूटने से गांव में हर कोई गमगीन है।
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