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हादसे ने बुझा दिया घर का चिराग
Updated Sat, 28 Apr 2018 07:16 PM IST
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अचानक मातम में बदल गईं शादी की खुशियां
ढिल्लवां के समीप हादसे में बुझा घर का चिराग, बहन की विदाई के बाद हुई मौत
एक साल पहले सर से उठ गया था पिता का साया
गोपाल शर्मा
अंब (ऊना)।
सड़क हादसे ने घर का चिराग बुझा दिया। शादी की खुशियों से चहक रहे परिवार में अचानक मातम छा गया। अपनी बहन की डोली को खुशी-खुशी विदा करने के बाद गगन इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह गया। रात को शादी समारोह के बाद सुबह होते ही घर में मौत का मातम पसर गया। शादी में आए मेहमान को कुछ दूर छोड़कर वापस आने के लिए घर से निकला घर का चिराग वापस नहीं लौटा। गगनदीप के पिता नरेश कुमार का अभी एक साल पहले ही देहांत हुआ था। अकेला बेटा होने के कारण परिवार का सारा बोझ उसके कंधों पर था। पिता की मौत के के बाद एक साल बाद जब उसके घर बहन की शादी की खुशियां आईं तो इस घड़ी को सही अंजाम देने की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी। रात भर घर में शादी की रस्में निभाने के बाद सुबह बहन की विदाई के बाद वह अपनी कार में किसी रिश्तेदार को दियाड़ा तक छोड़ने के लिए कार लेकर गया था। वापसी में सड़क किनारे खड़ी एक कार से उसकी कार की भिड़ंत ने उसकी जान ले ली। अभी दौलतपुर कॉलेज से ग्रेजुएशन के बाद उसका परिवार जल्द ही उसके बेहतर कॅरिअर की योजनाएं संजोए था। इस अनहोनी ने परिवार की सारी खुशियों को निगल लिया।
नोट- कृपया मुख्य खबर में सुधार कर लें। गगन बहन को छोडने नहीं बल्कि डोली को विदाई देन के बाद किसी रिश्तेदार को छोडने गया था।
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ढिल्लवां के समीप हादसे में बुझा घर का चिराग, बहन की विदाई के बाद हुई मौत
एक साल पहले सर से उठ गया था पिता का साया
गोपाल शर्मा
अंब (ऊना)।
सड़क हादसे ने घर का चिराग बुझा दिया। शादी की खुशियों से चहक रहे परिवार में अचानक मातम छा गया। अपनी बहन की डोली को खुशी-खुशी विदा करने के बाद गगन इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह गया। रात को शादी समारोह के बाद सुबह होते ही घर में मौत का मातम पसर गया। शादी में आए मेहमान को कुछ दूर छोड़कर वापस आने के लिए घर से निकला घर का चिराग वापस नहीं लौटा। गगनदीप के पिता नरेश कुमार का अभी एक साल पहले ही देहांत हुआ था। अकेला बेटा होने के कारण परिवार का सारा बोझ उसके कंधों पर था। पिता की मौत के के बाद एक साल बाद जब उसके घर बहन की शादी की खुशियां आईं तो इस घड़ी को सही अंजाम देने की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी। रात भर घर में शादी की रस्में निभाने के बाद सुबह बहन की विदाई के बाद वह अपनी कार में किसी रिश्तेदार को दियाड़ा तक छोड़ने के लिए कार लेकर गया था। वापसी में सड़क किनारे खड़ी एक कार से उसकी कार की भिड़ंत ने उसकी जान ले ली। अभी दौलतपुर कॉलेज से ग्रेजुएशन के बाद उसका परिवार जल्द ही उसके बेहतर कॅरिअर की योजनाएं संजोए था। इस अनहोनी ने परिवार की सारी खुशियों को निगल लिया।
नोट- कृपया मुख्य खबर में सुधार कर लें। गगन बहन को छोडने नहीं बल्कि डोली को विदाई देन के बाद किसी रिश्तेदार को छोडने गया था।