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Una News: भाकपा ने मजदूर, किसान और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ नारेबाजी
Sun, 28 Jun 2026 12:16 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sun, 28 Jun 2026 12:16 AM IST
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ऊना। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) जिला ऊना ने केंद्र सरकार की कथित मजदूर, किसान और जनविरोधी नीतियों के विरोध में शनिवार को जिला मुख्यालय ऊना के एमसी पार्क में नारेबाजी की। इस संबंध में पार्टी ने राष्ट्रपति के नाम उपायुक्त ऊना के माध्यम से ज्ञापन भी भेजा।
संगठन की जिला कमेटी के नेताओं करनैल सिंह, केवल सिंह, यशप्रीत गिल, चनन सिंह ढिल्लों, जोगिंद्र सिंह, बलबिंद्र कौर, अंबिका ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा महंगाई, मजदूरों और किसानों से जुड़े कई ऐसे निर्णय लिए गए, जिनसे आम जनता प्रभावित हुई। ज्ञापन में प्रमुख रूप से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में कथित बदलाव वापस लेने, चार नई श्रम संहिताओं को रद्द कर पुराने श्रम कानून बहाल करने, स्मार्ट मीटर एवं प्रीपेड बिजली योजना वापस लेने तथा किसानों को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार फसलों का समर्थन मूल्य देने की मांग की गई है। साथ ही छोटे किसानों के कर्ज माफ करने की भी मांग रखी गई है। माकपा ने ज्ञापन में हिमाचल प्रदेश में आपदा के दौरान घोषित 1500 करोड़ रुपये की राहत राशि शीघ्र जारी करने की मांग भी उठाई है।
इसके अलावा स्कीम वर्कर्स, आंगनबाड़ी, मिड-डे मील, आशा वर्कर्स और मल्टी टास्क वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी घोषित कर 26 हजार रुपये मासिक वेतन देने, महंगाई पर नियंत्रण करने तथा खाद्य पदार्थों, दाल, तेल, रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम करने की मांग की गई है। वहीं मिड-डे मील वर्कर्स के लिए 25 बच्चों की शर्त समाप्त करने, सभी स्कीम वर्कर्स को 12 माह का वेतन, वर्ष में दो वेतन वृद्धि, 25 लाख रुपये का सरकारी बीमा, मुफ्त चिकित्सा सुविधा तथा सेवानिवृत्ति के बाद 10 हजार रुपये मासिक पेंशन देने की भी मांग ज्ञापन में शामिल है।
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संगठन की जिला कमेटी के नेताओं करनैल सिंह, केवल सिंह, यशप्रीत गिल, चनन सिंह ढिल्लों, जोगिंद्र सिंह, बलबिंद्र कौर, अंबिका ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा महंगाई, मजदूरों और किसानों से जुड़े कई ऐसे निर्णय लिए गए, जिनसे आम जनता प्रभावित हुई। ज्ञापन में प्रमुख रूप से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में कथित बदलाव वापस लेने, चार नई श्रम संहिताओं को रद्द कर पुराने श्रम कानून बहाल करने, स्मार्ट मीटर एवं प्रीपेड बिजली योजना वापस लेने तथा किसानों को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार फसलों का समर्थन मूल्य देने की मांग की गई है। साथ ही छोटे किसानों के कर्ज माफ करने की भी मांग रखी गई है। माकपा ने ज्ञापन में हिमाचल प्रदेश में आपदा के दौरान घोषित 1500 करोड़ रुपये की राहत राशि शीघ्र जारी करने की मांग भी उठाई है।
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इसके अलावा स्कीम वर्कर्स, आंगनबाड़ी, मिड-डे मील, आशा वर्कर्स और मल्टी टास्क वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी घोषित कर 26 हजार रुपये मासिक वेतन देने, महंगाई पर नियंत्रण करने तथा खाद्य पदार्थों, दाल, तेल, रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम करने की मांग की गई है। वहीं मिड-डे मील वर्कर्स के लिए 25 बच्चों की शर्त समाप्त करने, सभी स्कीम वर्कर्स को 12 माह का वेतन, वर्ष में दो वेतन वृद्धि, 25 लाख रुपये का सरकारी बीमा, मुफ्त चिकित्सा सुविधा तथा सेवानिवृत्ति के बाद 10 हजार रुपये मासिक पेंशन देने की भी मांग ज्ञापन में शामिल है।
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