फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Una News ›   Country's picture brightened due to development works, fate of laborers did not change

Una News: विकास कार्यों से चमकी देश की तस्वीर, नहीं बदली मजदूर की तकदीर

Thu, 01 May 2025 07:57 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 01 May 2025 07:57 PM IST
विज्ञापन
Country's picture brightened due to development works, fate of laborers did not change
बोले- केवल एक दिन नहीं साल के 365 दिन हो मजदूरों का सम्मान
विज्ञापन


देश के विकास में आती है मजदूर के पसीने की सुगंध
संवाद न्यूज एजेंसी
नारी (ऊना)। भवन, सड़क और अन्य विकास कार्यों से देश और प्रदेश की तस्वीर चमकाने वाले मजदूरों की तकदीर आज तक नहीं बदल पाई है। एक मई को हर वर्ष मजदूर दिवस के रूप मनाया जाता है। इसे मनाने का उद्देश्य मजदूरों के शोषण को रोकना था लेकिन वर्षों से ऐसा नहीं हो पाया है। क्षेत्र के मजदूर वर्ग की मानें तो उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। सीटू के महासचिव गुरनाम सिंह ने कहा कि आज भी मजदूरों को हक के लिए संघर्ष करना पड़ता है। जबकि, उनका देश के विकास में सबसे अहम योगदान है। मजदूरों के कार्यों से देश की तस्वीर तो चमकी लेकिन मजदूर की तकदीर नहीं बदली। कहा कि मजदूरों को मनमाने तरीके से मजदूरी दी जाती है। कोई नियमों को नहीं मानता। महंगाई कई सालों में कई गुना बढ़ गई लेकिन मजदूरी की राशि को नाममात्र बढ़ाकर खानापूर्ति की जा रही। कई औद्योगिक संस्थान हैं, जहां मजदूरों को सरकार की ओर से तय राशि भी नहीं मिलती। बंधुआ मजदूरों की तरह काम लिया जाता और वेतन में कई तरह की कटौतियां कर ली जातीं। मजदूर दिवस पर क्षेत्र के लोगों ने अमर उजाला संवाददाता से बातचीत में अपने विचार इस प्रकार रखे।



देश के विकास में जिस भी व्यक्ति ने अपना पसीना बहाया, उसे सम्मान और हक देना मौजूदा सरकारों का कर्तव्य है। मल्टी टास्क वर्कर जो सड़कों पर मिट्टी ढोते हैं, उनके लिए नीति बनाने की जरूरत है। अन्य कर्मचारियों की तरह उन्हें भी वेतन वृद्धि मिलनी चाहिए। उनकी सेवाएं भी 10 वर्ष बाद सरकार की ओर से नियमित करना जरूरी है। मिड-डे मील वर्कर जो पूरा दिन कार्य करते हैं, सरकार उनके लिए भी ठोस नीति बनाए।
विज्ञापन

-जिला मजदूर संघ के प्रधान केशव कुमार

गांवों में अति जरूरत होने पर मजदूर को 500 से 600 तक प्रतिदिन की दिहाड़ी दी जाती है लेकिन किसी निजी उद्योग में जाएं तो वहां प्रति माह के 9000 रुपये दिए जाते हैं। यही हाल स्कूलों में मिड-डे मील वर्करों का है। उनकी स्थिति मजदूरों से भी बदतर है। कहा कि सरकार को मजदूरी के नियम सख्ती से लागू करने चाहिए ताकि किसी के साथ भेदभाव न हो। -क्षेत्र निवासी रश्मा देवी
विज्ञापन
विज्ञापन


धूप और सर्दी में मजदूरी करती हैं। फिर भी मुश्किल हालात में गुजारा हो रहा है। परिवार का पालन पोषण करने के लिए बच्चों की पढ़ाई, घर के सदस्यों की दवाई इतने पैसे से संभव नहीं है। सरकार से अपील है कि वेतन में वृद्धि हो, तभी मजदूर दिवस मनाने का फायदा होगा। -अनीशा देवी


निर्माण कार्यों में सरिया बांधने का काम करते हैं। उनके पास सालभर काम नहीं होता। प्रति माह 15 से 20 दिन काम होता है। अन्य दिन खाली बैठना पड़ता है। जो कार्य किया होता है, उसकी मजदूरी भी समय पर नहीं मिलती। अगर किसी फैक्ट्री में मजदूरी करे तो खुद का कौशल व्यर्थ हो जाता है। कई बार घर चलाना बेहद मुश्किल होता है। सरकार को रोजगार के लिए पुख्ता रास्ते तलाशने चाहिए जिससे उन्हें नियमित मजदूरी और काम मिल पाए। -बलवीर चंद
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed