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Una News: लहलहाने लगी मक्की की फसल
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किसान कर रहे अगेती फसल को तैयार करने में मेहनत
जिला में करीब 1000 हेक्टेयर में तैयार होती है मक्की की अगेती फसल
इस फसल की पंजाब अन्य राज्यों के पोल्ट्री फार्म में रहती है काफी मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिला के सिंचाई सुविधा वाले इलाकों में मक्की की फसल लहलहाने लगी है। करीब 1000 हेक्टेयर जमीन पर उगाई गई इस फसल को लेकर किसान भीषण गर्मी में कड़ी मेहनत कर रहे हैं। किसानों को इस फसल से अच्छी आय की उम्मीद है। जानकारी के अनुसार जिला के हरोली, अंब, गगरेट और ऊना क्षेत्र में मक्की की अगेती फसल तैयार होती है। फसल की अप्रैल माह के अंतिम दिनों में बिजाई की जाती है और जुलाई के शुरुआती दिनों में इसकी कटाई आरंभ हो जाती है। फसल को कच्चा ही काट लिया जाता है और थ्रेशिंग के बाद दानों को पंजाब की मंडियों में सप्लाई किया जाता है। बताया जा रहा है कि कच्ची मक्की के दानों की मांग पोल्ट्री उद्योगों में काफी रहती है। इसी वजह से अच्छे दाम भी किसानों को मिल पाते हैं। क्षेत्र के किसान अरविंद कुमार, जितेंद्र कुमार, सुनील, सुरेश व अनिल ने बताया कि अगेती मक्की तैयार करने के बाद उनके लिए आलू की दो माह वाली फसल तैयार करने का विकल्प खुला रहता है। इसके अलावा खेतों में एक साल के भीतर तीन फसलें भी तैयार होती हैं। अगर गेहूं या आलू की फसल में उनका नुकसान भी होता है, तो मक्की की फसल में नुकसान की भरपाई हो जाती है। इसलिए वे अगेती मक्की उगाते हैं। कृषि उपनिदेशक कुलभूषण धीमान ने बताया कि अगेती मक्की की फसल केवल सिंचाई सुविधा वाले इलाकों में ही तैयार हो पाती है। हालांकि भीषण गर्मी में किसानों को इस फसल को तैयार करना आसान नहीं रहता। कहा कि किसान किसी भी प्रकार के मार्गदर्शन के लिए विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।
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जिला में करीब 1000 हेक्टेयर में तैयार होती है मक्की की अगेती फसल
इस फसल की पंजाब अन्य राज्यों के पोल्ट्री फार्म में रहती है काफी मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिला के सिंचाई सुविधा वाले इलाकों में मक्की की फसल लहलहाने लगी है। करीब 1000 हेक्टेयर जमीन पर उगाई गई इस फसल को लेकर किसान भीषण गर्मी में कड़ी मेहनत कर रहे हैं। किसानों को इस फसल से अच्छी आय की उम्मीद है। जानकारी के अनुसार जिला के हरोली, अंब, गगरेट और ऊना क्षेत्र में मक्की की अगेती फसल तैयार होती है। फसल की अप्रैल माह के अंतिम दिनों में बिजाई की जाती है और जुलाई के शुरुआती दिनों में इसकी कटाई आरंभ हो जाती है। फसल को कच्चा ही काट लिया जाता है और थ्रेशिंग के बाद दानों को पंजाब की मंडियों में सप्लाई किया जाता है। बताया जा रहा है कि कच्ची मक्की के दानों की मांग पोल्ट्री उद्योगों में काफी रहती है। इसी वजह से अच्छे दाम भी किसानों को मिल पाते हैं। क्षेत्र के किसान अरविंद कुमार, जितेंद्र कुमार, सुनील, सुरेश व अनिल ने बताया कि अगेती मक्की तैयार करने के बाद उनके लिए आलू की दो माह वाली फसल तैयार करने का विकल्प खुला रहता है। इसके अलावा खेतों में एक साल के भीतर तीन फसलें भी तैयार होती हैं। अगर गेहूं या आलू की फसल में उनका नुकसान भी होता है, तो मक्की की फसल में नुकसान की भरपाई हो जाती है। इसलिए वे अगेती मक्की उगाते हैं। कृषि उपनिदेशक कुलभूषण धीमान ने बताया कि अगेती मक्की की फसल केवल सिंचाई सुविधा वाले इलाकों में ही तैयार हो पाती है। हालांकि भीषण गर्मी में किसानों को इस फसल को तैयार करना आसान नहीं रहता। कहा कि किसान किसी भी प्रकार के मार्गदर्शन के लिए विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।