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Una News: शीत लहर का प्रकोप, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी
Tue, 16 Dec 2025 06:56 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 16 Dec 2025 06:56 AM IST
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ऊना। स्वास्थ्य विभाग ने शीतलहर को लेकर एडवाइजरी जारी की है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक वर्ष दिसंबर-जनवरी के महीनों में शीत लहर का प्रभाव बढ़ता है।
इन दिनों में सर्द हवाओं के कारण स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ने के साथ-साथ कई बार मृत्यु होने की आशंका भी रहती है। शीतलहर का सबसे अधिक प्रभाव दिव्यांगजनों, बेघर व्यक्तियों, बजुर्गों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, गर्भवती व धात्री माताओं, महिलाओं, बच्चों, खुले क्षेत्र में व्यवसाय करने वाले लोगों पर पड़ता है।
शीत ऋतु में शीत-घात की वजह से अनेक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इससे बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में गर्म कपड़े पहनें । नियमित रूप से गर्म पेय पीते रहें।
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शीत लहर के समय विभिन्न प्रकार की बीमारियों की संभावना अधिक बढ़ जाती है। जैसे फ्लू, सर्दी, खांसी एवं जुकाम आदि के लक्षण हो जाने पर चिकित्सक से संपर्क करें।
इन दिनाें इन समस्याओं को लेकर काफी लोग अस्पतालों में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। अल्प ताप अवस्था के लक्षण जैसे सामान्य से कम शरीर का तापमान, न रुकने वाली कंपकपी, याददाश्त चले जाना, बेहोशी या मूर्छा की अवस्था का होना, जुबान का लड़खडाना, बच्चों की लाल व ठंडी त्वचा का होना, ऊर्जा में कमी दिखाई देने पर चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी गई है। शीत लहर के समय जितना संभव हो सके, घर के अंदर ही रहें और कोशिश करें कि अतिआवश्यक हो तो ही बाहर यात्रा करें।
पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्वों से युक्त भोजन ग्रहण करें। शरीर की प्रतिरोध क्षमता को बढ़ाने के लिए विटामिन-सी से भरपूर फल और सब्जियां खाएं एवं नियमित रूप से प्रयोग करें। सभी लोग खानपान का विशेष ध्यान रखें ताकि बीमारियों से बचा जा सके।
शीत लहर के समय बुजुर्ग, नवजात शिशुओं तथा बच्चों का यथा संभव अधिक ध्यान रखें क्योंकि उन्हें शीत ऋतु का प्रभाव होने की आशंका अधिक रहती है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसके वर्मा ने बताया कि सर्दी के मौसम में सेहत का ध्यान रखें। कोई समस्या होने पर अस्पताल में आकर जांच जरूर करवाएं।
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इन दिनों में सर्द हवाओं के कारण स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ने के साथ-साथ कई बार मृत्यु होने की आशंका भी रहती है। शीतलहर का सबसे अधिक प्रभाव दिव्यांगजनों, बेघर व्यक्तियों, बजुर्गों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, गर्भवती व धात्री माताओं, महिलाओं, बच्चों, खुले क्षेत्र में व्यवसाय करने वाले लोगों पर पड़ता है।
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शीत ऋतु में शीत-घात की वजह से अनेक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इससे बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में गर्म कपड़े पहनें । नियमित रूप से गर्म पेय पीते रहें।
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शीत लहर के समय विभिन्न प्रकार की बीमारियों की संभावना अधिक बढ़ जाती है। जैसे फ्लू, सर्दी, खांसी एवं जुकाम आदि के लक्षण हो जाने पर चिकित्सक से संपर्क करें।
इन दिनाें इन समस्याओं को लेकर काफी लोग अस्पतालों में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। अल्प ताप अवस्था के लक्षण जैसे सामान्य से कम शरीर का तापमान, न रुकने वाली कंपकपी, याददाश्त चले जाना, बेहोशी या मूर्छा की अवस्था का होना, जुबान का लड़खडाना, बच्चों की लाल व ठंडी त्वचा का होना, ऊर्जा में कमी दिखाई देने पर चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी गई है। शीत लहर के समय जितना संभव हो सके, घर के अंदर ही रहें और कोशिश करें कि अतिआवश्यक हो तो ही बाहर यात्रा करें।
पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्वों से युक्त भोजन ग्रहण करें। शरीर की प्रतिरोध क्षमता को बढ़ाने के लिए विटामिन-सी से भरपूर फल और सब्जियां खाएं एवं नियमित रूप से प्रयोग करें। सभी लोग खानपान का विशेष ध्यान रखें ताकि बीमारियों से बचा जा सके।
शीत लहर के समय बुजुर्ग, नवजात शिशुओं तथा बच्चों का यथा संभव अधिक ध्यान रखें क्योंकि उन्हें शीत ऋतु का प्रभाव होने की आशंका अधिक रहती है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसके वर्मा ने बताया कि सर्दी के मौसम में सेहत का ध्यान रखें। कोई समस्या होने पर अस्पताल में आकर जांच जरूर करवाएं।